किसान सम्मान निधि में 60 करोड़ के फर्जीवाड़े का आरोप: प्रतापगढ़ में 3.18 लाख संदिग्ध लाभार्थियों पर FIR, सरकारी लॉगिन के दुरुपयोग का मामला - Pratapgarh News

Published on 27 अग॰ 2026

मनु कुमार सिंह | प्रतापगढ़52 मिनट पहले

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प्रतापगढ़ में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। कुंडा तहसील की आईडी/लॉगिन का कथित दुरुपयोग कर 3,18,846 संदिग्ध लाभार्थियों का पंजीकरण कराए जाने का आरोप है। इन पंजीकरणों के जरिए सरकारी योजना की धनराशि का कथित रूप से अनुचित भुगतान कराया गया। उप कृषि निदेशक अश्विनी कुमार सिंह की तहरीर पर पुलिस ने मामले में मुकदमा दर्ज किया है।

तहरीर में सरकारी खजाने से करीब 60 करोड़ रुपए से अधिक के कथित दुरुपयोग की बात कही गई है। इतनी बड़ी संख्या में संदिग्ध लाभार्थियों के सामने आने से योजना की निगरानी, सत्यापन और सरकारी लॉगिन की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

कुंडा तहसील की आईडी का कथित दुरुपयोग

उप कृषि निदेशक अश्विनी कुमार सिंह ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि कुंडा तहसील की आईडी/लॉगिन का कथित तौर पर दुरुपयोग कर बड़ी संख्या में संदिग्ध और फर्जी पंजीकरण कराए गए। तहरीर के मुताबिक, डायरेक्ट एंट्री के माध्यम से पंजीकृत 3,18,846 लाभार्थियों की सूची भी उपलब्ध कराई गई है। आरोप है कि इन एंट्री के आधार पर योजना की धनराशि का भुगतान कराया गया।

नाबालिगों और दूसरे जिलों-राज्यों के लोगों की भी एंट्री

जांच में सामने आए आरोपों के अनुसार, संदिग्ध पंजीकरण केवल अपात्र लोगों तक सीमित नहीं रहे। सूची में नाबालिग बच्चों के साथ जिले और प्रदेश से बाहर के लोगों को भी लाभार्थी के तौर पर शामिल किए जाने का आरोप है। अब जांच एजेंसियां यह पता करेंगी कि इन लोगों के नाम किस आधार पर दर्ज किए गए और उनके खातों में किसान सम्मान निधि की राशि पहुंची या नहीं।

3.18 लाख एंट्री से उठे कई सवाल

मामले में सबसे बड़ा सवाल सरकारी लॉगिन के कथित दुरुपयोग को लेकर है। आखिर कुंडा तहसील की आईडी तक किसकी पहुंच थी और उसके जरिए इतनी बड़ी संख्या में लाभार्थियों की एंट्री कैसे होती रही।

इसके अलावा यह भी जांच का विषय है कि इतनी बड़ी संख्या में संदिग्ध पंजीकरण होने के बावजूद संबंधित स्तर पर सत्यापन और निगरानी के दौरान इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई। क्या मामला केवल लापरवाही का है या इसके पीछे किसी स्तर पर मिलीभगत थी, यह जांच के बाद स्पष्ट होगा।

राजपत्रित अधिकारी की निगरानी में होगी जांच

पुलिस अधीक्षक दीपक भूकर ने बताया कि उप कृषि निदेशक की तहरीर पर करीब 3.18 लाख से अधिक संदिग्ध लाभार्थियों से जुड़े मामले में मुकदमा दर्ज किया गया है। उन्होंने बताया कि प्रकरण में करीब 60 करोड़ रुपए की धनराशि के कथित गबन का मामला सामने आया है।

एसपी के अनुसार, मामले की जांच राजपत्रित अधिकारी की निगरानी में कराई जाएगी। जांच में पंजीकरण की प्रक्रिया, सरकारी लॉगिन के इस्तेमाल, लाभार्थियों के दस्तावेज और भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड को खंगाला जाएगा।

पोर्टल से डायरेक्ट एंट्री विकल्प हटाने की भी चर्चा

मामला सामने आने के बाद भारत सरकार की ओर से किसान सम्मान निधि पोर्टल पर डायरेक्ट एंट्री का विकल्प तत्काल प्रभाव से हटाए जाने की बात भी सामने आई है। इससे इस प्रक्रिया के इस्तेमाल को लेकर उठ रहे सवाल और गंभीर हो गए हैं।

हालांकि, पोर्टल पर यह बदलाव इसी मामले के कारण किया गया या इसके पीछे कोई अन्य प्रशासनिक वजह थी, इसका सीधा संबंध अभी स्पष्ट नहीं है। इसकी स्थिति भी जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर ही साफ होगी।

फिलहाल पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सरकारी लॉगिन के कथित दुरुपयोग से लेकर संदिग्ध लाभार्थियों के पंजीकरण और करीब 60 करोड़ रुपए की धनराशि के भुगतान तक पूरे नेटवर्क की पड़ताल की जा रही है।

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