
मखाना बना कमाई का जरिया Image Credit source: getty image
बिहार के तालाबों में उगने वाला मखाना अब सिर्फ व्रत या पारंपरिक खान-पान तक सीमित नहीं है. इसकी मांग देश ही नहीं, विदेशों में भी बढ़ रही है और इसे अब ग्लोबल सुपरफूड के तौर पर पहचान मिल रही है. बिहार इस कारोबार का सबसे बड़ा केंद्र है. ऐसे में सवाल उठता है कि जिस मखाने का बाजार तेजी से बढ़ रहा है, क्या इसका फायदा मखाना किसानों की कमाई में भी दिखाई दे रहा है?
केंद्र सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, 2025-26 में बिहार में मखाने का उत्पादन करीब 60,000 मीट्रिक टन रहा. देश के कुल मखाना उत्पादन में बिहार की हिस्सेदारी करीब तीन-चौथाई है. लेकिन सिर्फ उत्पादन बढ़ने से किसान अमीर नहीं होते. उनकी असली कमाई इस बात पर निर्भर करती है कि उन्हें अपनी उपज का कितना दाम मिलता है और मखाने की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और बिक्री से बनने वाले अतिरिक्त मूल्य में उनकी कितनी हिस्सेदारी है.
मखाने के कारोबार में बिहार का दबदबा
भारत दुनिया का सबसे बड़ा मखाना उत्पादक देश है और इसका उत्पादन मुख्य रूप से बिहार, पश्चिम बंगाल और असम में होता है इनमें बिहार सबसे आगे है. 2024-25 में भारत में मखाने का कुल उत्पादन 63,910 मीट्रिक टन था, जबकि 2025-26 में यह बढ़कर 80,590 मीट्रिक टन हो गया. यानी एक साल में उत्पादन में अच्छी बढ़ोतरी हुई. बिहार की हिस्सेदारी सिर्फ उत्पादन तक सीमित नहीं है. देश के कुल मखाना उत्पादन में राज्य की हिस्सेदारी करीब तीन-चौथाई और वैश्विक आपूर्ति में करीब 80-85 प्रतिशत बताई गई है.
किसान कितना कमा रहा है, असली सवाल यही है
मखाने की खेती दूसरे अनाजों से अलग है. इसकी खेती तालाबों और जलभराव वाले क्षेत्रों में होती है और इसके बाद भी किसान का काम खत्म नहीं होता. बीज निकालने, सुखाने, ग्रेडिंग, भूनने और पैकेजिंग जैसे कई चरणों के बाद मखाना बाजार में पहुंचता है. यही प्रक्रिया इसकी कीमत को कई गुना बढ़ा सकती है. यहीं मखाना किसान की कमाई का सबसे बड़ा पेंच है. अगर किसान कच्चा माल बेच देता है, तो उसे कीमत का सीमित हिस्सा मिलता है. वहीं प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और सीधे बाजार तक पहुंचने पर उसी उत्पाद की कीमत बढ़ जाती है.
किसानों की कमाई बढ़ाने के लिए क्या किया?
मखाना सेक्टर को मजबूत करने के लिए सरकार ने राष्ट्रीय मखाना बोर्ड की स्थापना की है. इसका औपचारिक शुभारंभ 15 सितंबर 2025 को बिहार में हुआ. 2025-26 से 2030-31 के लिए मखाना विकास से जुड़ी योजना के तहत 476.03 करोड़ रुपये का परिव्यय निर्धारित किया गया है. इसका फोकस बेहतर बीज, रिसर्च, किसानों की ट्रेनिंग, कटाई के बाद की प्रक्रिया, प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग, मार्केटिंग और निर्यात को बढ़ावा देने पर है. इसके अलावा 2025-26 में मखाना विकास की केंद्रीय योजना के तहत देशभर में 8,159 किसान लाभान्वित हुए.

अंकिता
शिव की नगरी काशी से अपने करियर की शुरुआत करने वाली अंकिता पाण्डेय ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से पत्रकारिता में अपनी मास्टर्स की डिग्री पूरी की है. पत्रकारिता में आने के लिए उन्होंने बनारस के लोकल न्यूज पेपर "काशीवार्ता" से अपनी शुरुआत की, बाद में दिल्ली जैसे महानगरी का रुख करते हुए उन्होंने TV9 भारतवर्ष में अक्टूबर साल 2023 से जुड़ी. आज वह इस ऑर्गनाइजेशन में बतौर सब-एडिटर काम कर रही हैं. क्राइम, एंटरटेनमेंट और अन्य सभी को न्यूज के साथ विजुअल तरीके से पेश करने में रुचि है. पत्रकारिता के अलावा कविताएं लिखना, फोटोग्राफी करना और म्यूजिक का भी शौक रखती हैं.
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