संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय ने कब्जे वाले वेस्ट बैंक में इजरायली बस्तियों से कारोबारी संबंध रखने वाली 61 और कंपनियों को अपनी ब्लैकलिस्ट में शामिल किया है। अब इस सूची में कुल 214 कंपनियां हैं, जिनमें ज्यादातर इस्राइली हैं। UN का कहना है कि कंपनियों को मानवाधिकारों के उल्लंघन से बचने के लिए उचित जांच-पड़ताल करनी चाहिए, जबकि इस्राइल ने इस सूची को 'राजनीतिक हथियार' बताया है। यह कदम ऐसे समय आया है जब ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा भी इजरायली बस्तियों से जुड़े कारोबार पर कार्रवाई की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
11 देशों की कंपनियां सूची में, ज्यादातर इस्राइल की
संयुक्त राष्ट्र की इस सूची में शामिल 214 कंपनियों में ज्यादातर इस्राइल की हैं। ये कंपनियां कुल 11 देशों में स्थित हैं। हालांकि, पिछले साल जारी की गई सूची में शामिल 158 कंपनियों में से पांच को इस बार के अपडेट में हटा दिया गया है। इस सूची को संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय की ओर से अपडेट किया गया है। इसमें उन कंपनियों को शामिल किया जाता है जिनके कब्जे वाले वेस्ट बैंक में इजरायली बस्तियों से कारोबारी संबंध होने की बात सामने आई है।
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2020 में बनी थी कंपनियों की यह ब्लैकलिस्ट
संयुक्त राष्ट्र की यह ब्लैकलिस्ट पहली बार 2020 में जारी की गई थी। इसे UN मानवाधिकार परिषद में हुए मतदान के बाद तैयार किया गया था। हालांकि, मानवाधिकार परिषद के पास इन कंपनियों के खिलाफ सीधे कोई कार्रवाई करने या उन्हें कारोबार बंद करने के लिए मजबूर करने की शक्ति नहीं है। इस सूची का मुख्य उद्देश्य उन कंपनियों के नाम सार्वजनिक करना है, जिनके इस्राइली बस्तियों से कारोबारी संबंध हैं, और उन पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव बनाना है।
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कंपनियों पर आर्थिक असर कितना पड़ा, यह साफ नहीं
हालांकि, इस ब्लैकलिस्ट में नाम आने के बाद संबंधित कंपनियों पर वास्तव में कितना आर्थिक असर पड़ा है, इसकी कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने एक बयान में कहा कि यह रिपोर्ट कंपनियों को एक बार फिर याद दिलाती है कि मानवाधिकारों के प्रति उनकी जिम्मेदारियां हैं। उन्होंने कहा कि कंपनियों से उम्मीद की जाती है कि वे उचित जांच-पड़ताल करें और यह सुनिश्चित करें कि उनकी कारोबारी गतिविधियां मानवाधिकारों के उल्लंघन या दुर्व्यवहार में शामिल न हों।
इस्राइल ने UN की सूची को बताया 'राजनीतिक हथियार'
जेनेवा में इस्राइल के राजनयिक मिशन ने इस डेटाबेस की आलोचना की है। इजरायली मिशन ने इसे एक 'राजनीतिक हथियार' बताया। मिशन का आरोप है कि वोल्कर तुर्क का कार्यालय इस सूची का इस्तेमाल ऐसे कारोबारी उद्यमों के खिलाफ "बदनाम करने का अभियान" चलाने के लिए कर रहा है, जिन्होंने कोई गलत काम नहीं किया है। इस्राइल पहले भी संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की कार्यप्रणाली और उसके रुख की आलोचना करता रहा है।
इस्राइली बस्तियों को लेकर बढ़ रही अंतरराष्ट्रीय जांच
संयुक्त राष्ट्र की यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब कब्जे वाले फलस्तीनी इलाकों में इस्राइली बस्तियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जांच और दबाव बढ़ रहा है। वेस्ट बैंक में इस्राइली बस्तियों का मुद्दा लंबे समय से इजरायल और फिलिस्तीन के बीच विवाद का अहम हिस्सा रहा है और इसे लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अलग-अलग रुख देखने को मिलते रहे हैं।
ब्रिटेन ने व्यापार पर लगाया प्रतिबंध
इसी महीने की शुरुआत में ब्रिटेन ने कब्जे वाले वेस्ट बैंक में इस्राइली बस्तियों के साथ व्यापार पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया। ब्रिटेन का कहना है कि वहां 'बस्ती में रहने वाले आतंकवादी' फलस्तीनियों का 'जातीय सफाया' कर रहे हैं। यह ब्रिटेन की ओर से बस्तियों से जुड़े कारोबार पर उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है।
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फ्रांस और कनाडा भी कार्रवाई की तैयारी में
ब्रिटेन के अलावा फ्रांस और कनाडा ने भी इसी तरह की कार्रवाई करने की घोषणा की है। इन देशों के कदम और संयुक्त राष्ट्र की ताजा सूची इस बात की ओर इशारा करते हैं कि इस्राइली बस्तियों से जुड़े कारोबार को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कंपनियों की भूमिका पर ध्यान लगातार बढ़ रहा है। हालांकि, सूची में शामिल कंपनियों पर इसके व्यावहारिक और आर्थिक प्रभाव का आकलन अभी स्पष्ट नहीं है।