रूस में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के शासन के दौरान हुए पहले युद्धकालीन संसदीय चुनाव के अंतिम नतीजों ने एक बार फिर क्रेमलिन की मजबूत राजनीतिक पकड़ की तस्वीर सामने रख दी है। शुक्रवार को जारी नतीजों के मुताबिक, पुतिन की मुख्य पार्टी यूनाइटेड रशिया ने 450 सदस्यीय स्टेट ड्यूमा में 349 सीटें जीत ली हैं। चुनाव ऐसे समय हुआ जब यूक्रेन के साथ युद्ध जारी है, देश आर्थिक दबावों से जूझ रहा है और विपक्ष पर सरकार की कार्रवाई लगातार चर्चा में है। केंद्रीय चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, यूनाइटेड रशिया को पार्टियों के लिए तय 225 सीटों के चुनाव में करीब 58 प्रतिशत वोट मिले। इसके अलावा पार्टी ने 225 में से 209 सिंगल-सीट निर्वाचन क्षेत्रों में भी जीत दर्ज की। इस तरह पार्टी के खाते में कुल 349 सीटें आईं, जो ड्यूमा में तीन-चौथाई से भी ज्यादा है।
विपक्ष को कितनी सीटें मिली?
विपक्ष की कई पार्टियां चुनाव मैदान में थीं, लेकिन वे मुख्य तौर पर वही दल हैं जिन्हें रूस में ‘सिस्टम के अंदर का विपक्ष’ कहा जाता है। ये पार्टियां बड़े और अहम मुद्दों पर अक्सर क्रेमलिन के साथ खड़ी दिखाई देती हैं। इन दलों को कुल 97 सीटें मिलीं, जबकि चार सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में गईं।
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तीन दिन चली वोटिंग, करीब 60 फीसदी लोगों ने डाला वोट
18 से 20 सितंबर तक तीन दिनों में मतदान कराया गया। चुनाव आयोग के मुताबिक, करीब 11.1 करोड़ पात्र मतदाताओं में से लगभग 60 प्रतिशत ने मतदान किया। एक दशक से ज्यादा समय में किसी संसदीय चुनाव के दौरान दर्ज हुई यह सबसे ज्यादा मतदान दरों में से एक रही। मतदान को तीन दिनों तक चलाने के साथ कुछ क्षेत्रों में ऑनलाइन वोटिंग की सुविधा भी दी गई थी। अधिकारियों का कहना था कि इससे ज्यादा से ज्यादा लोगों को मतदान का मौका मिलेगा।
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यूक्रेन पर हमले के बाद पहला संसदीय चुनाव
यह चुनाव 2022 में यूक्रेन पर रूस के बड़े पैमाने पर हमले के बाद होने वाला पहला संसदीय चुनाव था। खास बात यह भी रही कि रूस ने यूक्रेन के उन चार क्षेत्रों के निवासियों को भी मतदान में शामिल किया, जिन पर उसी साल रूसी सेना ने कब्जा किया था और जिन्हें मॉस्को ने बाद में रूस में शामिल करने का दावा किया। क्रीमिया में भी मतदान कराया गया। रूस ने 2014 में क्रीमिया को अपने साथ मिला लिया था। यूक्रेन ने इन सभी क्षेत्रों में कराए गए मतदान को अवैध बताया है।
विपक्ष के लिए मैदान पहले ही काफी मुश्किल था
चुनाव में वास्तविक विपक्षी दलों और उम्मीदवारों की मौजूदगी बेहद सीमित रही। चुनाव प्रचार शुरू होने से पहले ही युद्ध का विरोध करने वाले कई नेताओं को जेल भेज दिया गया था या उन्हें देश छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा था। उदारवादी याब्लोको पार्टी भी चुनाव में बड़ा प्रभाव नहीं छोड़ सकी। यह रूस की उन गिनी-चुनी पंजीकृत पार्टियों में थी जिसने यूक्रेन युद्ध की खुलकर आलोचना की थी। पिछले महीने रूस की सुप्रीम कोर्ट ने उसे बैलेट से हटा दिया था। सिंगल-सीट वाली सीटों पर उसके कुछ दर्जन उम्मीदवार मैदान में थे, लेकिन कोई भी जीत हासिल नहीं कर सका।
चुनाव पर अंतरराष्ट्रीय निगरानी भी नहीं हुई
रूस ने इस बार ऑर्गनाइजेशन फॉर सिक्योरिटी एंड कोऑपरेशन इन यूरोप (OSCE) के चुनाव पर्यवेक्षकों को आमंत्रित नहीं किया। ऐसे में चुनाव प्रक्रिया पर स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय निगरानी की गुंजाइश भी सीमित रही। राष्ट्रपति पुतिन ने बुधवार को कहा कि चुनाव के नतीजे उनकी नीतियों के लिए जनता के समर्थन को दिखाते हैं।
संसद में युद्ध लड़ चुके सैनिकों की भी एंट्री
चुनाव आयोग की प्रमुख एला पमफिलोवा ने बताया कि यूक्रेन युद्ध में हिस्सा ले चुके 46 पूर्व सैनिक चुनाव जीतकर संसद पहुंचे हैं। इनमें से 41 यूनाइटेड रशिया के उम्मीदवार थे। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि युद्ध में शामिल रहे इन लोगों के अनुभव की जरूरत है और चुनाव के नतीजों ने इसे साफ कर दिया है। उनके मुताबिक, ये लोग आगे अलग-अलग सरकारी पहलों को तैयार करने में ज्यादा योगदान देंगे।
चुनाव के नतीजे आते ही राजनीतिक विश्लेषक की गिरफ्तारी
चुनाव के पूरे नतीजे सामने आने के बाद रूसी मीडिया में स्वतंत्र राजनीतिक विश्लेषक अलेक्जेंडर काइनेव की गिरफ्तारी की खबर आई। काइनेव चुनाव प्रचार पर बारीकी से नजर रख रहे थे। उन पर ड्रग्स से जुड़े आरोप लगाए गए हैं, हालांकि उन्होंने इन आरोपों से इनकार किया है। अगर अदालत उन्हें दोषी ठहराती है तो उन्हें 10 से 20 साल तक की जेल हो सकती है। इस साल की शुरुआत में रूस के न्याय मंत्रालय ने काइनेव को ‘विदेशी एजेंट’ घोषित किया था। रूस में इस दर्जे के साथ कई तरह की अतिरिक्त सरकारी निगरानी और कानूनी पाबंदियां जुड़ी होती हैं।
चुनाव के बीच यूक्रेनी ड्रोन हमलों का भी असर
रूस में मतदान ऐसे समय हुआ जब यूक्रेन की ओर से लगातार ड्रोन हमले किए जा रहे थे। रूसी अधिकारियों के मुताबिक, एयर डिफेंस सिस्टम ने चुनाव के तीन दिनों के दौरान 1,100 से ज्यादा यूक्रेनी ड्रोन मार गिराए। मतदान के आखिरी दिन मॉस्को की ओर बढ़ रहे करीब 450 ड्रोन को मार गिराने का दावा किया गया। मॉस्को के मेयर सर्गेई सोब्यानिन ने इसे राजधानी पर अब तक का सबसे बड़ा ड्रोन हमला बताया। अधिकारियों के मुताबिक, हमले में एक तेल रिफाइनरी और एक रिहायशी इमारत को नुकसान पहुंचा। मॉस्को के आसपास के इलाकों में तीन लोगों की मौत हुई और 38 लोग घायल हुए
चुनाव कर्मचारियों की भी हुई मौत
एला पमफिलोवा ने बताया कि यूक्रेनी हमलों के दौरान चुनाव कराने में जुटे छह कर्मचारी मारे गए। गोलाबारी में 75 मतदान केंद्रों को नुकसान पहुंचा या वे पूरी तरह नष्ट हो गए। इन घटनाओं के बावजूद मतदान प्रक्रिया पूरी की गई और केंद्रीय चुनाव आयोग ने अंतिम नतीजे जारी कर दिए।
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अब बुधवार से नई संसद की शुरुआत
नवनिर्वाचित स्टेट ड्यूमा का पहला सत्र बुधवार को होने वाला है। रूसी मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक, मौजूदा स्पीकर व्याचेस्लाव वोलोडिन के अपने पद पर बने रहने की उम्मीद है। इन नतीजों के साथ यूनाइटेड रशिया के पास ड्यूमा में स्पष्ट बहुमत से कहीं ज्यादा सीटें हैं। चुनाव ने यह भी दिखाया कि युद्ध, विपक्ष पर कार्रवाई और राजनीतिक नियंत्रण के बीच रूस की मौजूदा सत्ता संरचना संसद में फिलहाल मजबूत बनी हुई है।