Mithlesh Pal MLA Fund Report MLALAD: चार वर्षों में मीरापुर के 653 कार्य प्रस्तावित, 282 को मिली स्वीकृति

Published on 14 जुल॰ 2026

Mithlesh Pal MLA Fund Report के तहत उत्तर प्रदेश ग्राम्य विकास विभाग की चार आधिकारिक विधायकवार रिपोर्टों में क्रम संख्या 16 पर दर्ज मीरापुर विधानसभा क्षेत्र के विकास कार्यों का विश्लेषण कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने लाता है। वित्तीय वर्ष 2023-24 से 2026-27 तक क्रम संख्या 16 की पंक्ति में कुल 653 विकास कार्य अनुशंसित दिखाए गए हैं। इनमें 282 कार्यों को स्वीकृति मिलने और 315 प्रस्तावों के निरस्त होने की प्रविष्टि दिखाई देती है। वर्ष 2025-26 में 41 कार्य लंबित दर्ज हैं, जबकि 2026-27 की पंक्ति में अनुशंसित, स्वीकृत और निरस्त कार्यों के बीच 16 कार्यों की स्थिति उपलब्ध टेक्स्ट से पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो रही है।

मीरापुर विधानसभा सीट से मिथलेश पाल नवंबर 2024 के उपचुनाव में विधायक चुनी गई थीं। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में इस सीट से राष्ट्रीय लोक दल के चंदन चौहान निर्वाचित हुए थे। वह 2024 में बिजनौर से सांसद चुने गए, जिसके बाद मीरापुर सीट रिक्त हुई और उपचुनाव में मिथलेश पाल ने जीत दर्ज की। इसलिए 2023-24 और 2024-25 के शुरुआती कार्यों को सीधे मिथलेश पाल की व्यक्तिगत संस्तुतियां मानना तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं होगा।

इनमें अनुशंसित, लंबित, स्वीकृत और निरस्त विकास कार्यों की संख्या दर्ज है। इसलिए इसे मीरापुर विधानसभा की MLALAD कार्य-प्रगति रिपोर्ट के रूप में पढ़ा जाना चाहिए।

Mithlesh Pal MLA Fund Report MLALAD: चार वर्षों के प्रमुख आंकड़े

वित्तीय वर्षअनुशंसित कार्यलंबित कार्यस्वीकृत कार्यनिरस्त कार्यस्वीकृति दर
2023-24660660100%
2024-25910613067.03%
2025-26398417828019.60%
2026-2798स्पष्ट नहीं77578.57%
कुल653कम से कम 4128231543.19%

चार वर्षों में अनुशंसित 653 कार्यों के मुकाबले 282 स्वीकृत कार्यों की संयुक्त दर लगभग 43.19 प्रतिशत बैठती है। हालांकि यह गणना चार अलग-अलग समय पर निर्यात हुई रिपोर्टों पर आधारित है। पुरानी रिपोर्ट में लंबित दिखाया गया कार्य बाद में स्वीकृत या निरस्त हो सकता है।

वर्ष 2025-26 की पंक्ति में 398 अनुशंसित कार्यों के मुकाबले 41 लंबित, 78 स्वीकृत और 280 निरस्त कार्य दर्ज हैं। इसी प्रकार 2026-27 में 98 अनुशंसित, 77 स्वीकृत और पांच निरस्त कार्य स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं।

वर्ष 2023-24 में सभी 66 प्रस्तावों को मिली स्वीकृति

वित्तीय वर्ष 2023-24 की आधिकारिक विधायकवार रिपोर्ट में क्रम संख्या 16 पर मीरापुर विधानसभा क्षेत्र के लिए 66 विकास कार्य अनुशंसित दर्ज हैं। सभी 66 प्रस्ताव स्वीकृत हुए। कोई प्रस्ताव लंबित या निरस्त नहीं दिखाया गया।

2023-24 का विवरण

श्रेणीकार्य
अनुशंसित कार्य66
कुल स्वीकृत कार्य66
लंबित कार्य0
निरस्त कार्य0
स्वीकृति प्रतिशत100%

इस वर्ष की रिपोर्ट प्रशासनिक स्वीकृति के लिहाज से सबसे मजबूत स्थिति दिखाती है। मीरापुर विधानसभा क्षेत्र से संबंधित सभी अनुशंसित काम योजना की पात्रता और प्रशासनिक जांच में सफल रहे।

वित्तीय वर्ष 2023-24 में मीरापुर के निर्वाचित विधायक चंदन चौहान थे। मिथलेश पाल नवंबर 2024 के उपचुनाव के बाद विधायक बनीं। इसलिए 2023-24 के 66 कार्यों को मिथलेश पाल द्वारा अनुशंसित बताना सही नहीं होगा।

राज्य स्तर पर 2023-24 के विधायक निधि कार्यों का विस्तृत विश्लेषण UP MLA Fund Report 2023-24 में पढ़ा जा सकता है।

वर्ष 2024-25 में 91 प्रस्ताव, 61 स्वीकृत और 30 निरस्त

वित्तीय वर्ष 2024-25 की रिपोर्ट में क्रम संख्या 16 पर मीरापुर विधानसभा के लिए 91 कार्यों की अनुशंसा दर्ज है। इनमें 61 कार्य स्वीकृत और 30 प्रस्ताव निरस्त दिखाए गए हैं। कोई प्रस्ताव स्वीकृति के लिए लंबित नहीं दिखाई देता।

2024-25 का विवरण

श्रेणीकार्य
अनुशंसित कार्य91
कुल स्वीकृत कार्य61
निरस्त कार्य30
लंबित कार्य0
स्वीकृति प्रतिशत67.03%
निरस्तीकरण प्रतिशत32.97%

स्वीकृत 61 कार्यों में एक काम 45 दिन के भीतर, नौ काम 45 से 60 दिन के बीच और 51 कार्य 60 दिन के बाद स्वीकृत दिखाई देते हैं। इसका अर्थ है कि स्वीकृत कार्यों में लगभग 83.61 प्रतिशत को मंजूरी मिलने में 60 दिन से अधिक समय लगा।

30 प्रस्तावों का निरस्त होना महत्वपूर्ण

वर्ष 2024-25 में हर तीन अनुशंसित कार्यों में लगभग एक प्रस्ताव निरस्त हुआ। निरस्तीकरण दर 32.97 प्रतिशत रही।

विधायक निधि का प्रस्ताव निम्न कारणों से निरस्त हो सकता है—

  • प्रस्तावित भूमि निजी या विवादित होना
  • उसी कार्य का किसी दूसरी सरकारी योजना में स्वीकृत होना
  • प्रस्ताव का योजना के दिशानिर्देशों के अनुरूप न होना
  • तकनीकी आगणन में त्रुटि
  • भूमि स्वामित्व का स्पष्ट न होना
  • उपलब्ध विधायक निधि से अधिक लागत
  • कार्य का स्थायी सार्वजनिक संपत्ति की श्रेणी में न आना

सारांश रिपोर्ट में निरस्त हुए 30 कार्यों के नाम और कारण नहीं दिए गए हैं। यदि इनकी कार्यवार सूची सार्वजनिक की जाए तो यह स्पष्ट हो सकता है कि समस्या प्रस्ताव तैयार करने में थी, भूमि सत्यापन में थी या जिला प्रशासन की तकनीकी प्रक्रिया में।

वर्ष 2024-25 का प्रदेश और जिला स्तर का संदर्भ UP MLA Fund Report 2024-25 में उपलब्ध है।

नवंबर 2024 के उपचुनाव के बाद विधायक बनीं मिथलेश पाल

वर्ष 2024-25 की रिपोर्ट का विश्लेषण करते समय मीरापुर विधानसभा में हुए राजनीतिक बदलाव को समझना जरूरी है।

मीरापुर से 2022 में रालोद के चंदन चौहान विधायक चुने गए थे। वर्ष 2024 में उन्होंने बिजनौर लोकसभा चुनाव जीता और विधानसभा सदस्यता छोड़ दी। इसके बाद मीरापुर सीट पर नवंबर 2024 में उपचुनाव कराया गया।

राष्ट्रीय लोक दल ने मिथलेश पाल को अपना उम्मीदवार बनाया। उन्होंने समाजवादी पार्टी की सुम्बुल राणा को 30,796 मतों के अंतर से हराकर जीत दर्ज की। इसके साथ मिथलेश पाल उत्तर प्रदेश की अठारहवीं विधानसभा की सदस्य बनीं। UttarPradesh.org की मीरापुर चुनाव रिपोर्ट भी 2024 के उपचुनाव में मिथलेश पाल को विजेता और वर्तमान विधायक के रूप में दर्ज करती है।

इस कारण वित्तीय वर्ष 2024-25 के सभी 91 कार्यों को मिथलेश पाल की संस्तुति मानना संभव नहीं है। वित्तीय वर्ष अप्रैल 2024 से शुरू हुआ था, जबकि वह नवंबर 2024 के अंतिम सप्ताह में निर्वाचित हुईं। इस अवधि के कुछ प्रस्ताव पूर्व विधायक चंदन चौहान के कार्यकाल से भी संबंधित हो सकते हैं।

वर्ष 2025-26 में 398 प्रस्तावों की बड़ी संख्या

वित्तीय वर्ष 2025-26 की रिपोर्ट में मीरापुर विधानसभा के सामने 398 अनुशंसित कार्य दर्ज हैं। चारों वर्षों में यह सर्वाधिक संख्या है। इनमें 41 कार्य लंबित, 78 स्वीकृत और 280 निरस्त दिखाई देते हैं।

2025-26 का विवरण

श्रेणीकार्य
अनुशंसित कार्य398
60 दिन से अधिक लंबित41
कुल स्वीकृत कार्य78
निरस्त कार्य280
स्वीकृति प्रतिशत19.60%
निरस्तीकरण प्रतिशत70.35%

स्वीकृत 78 कार्यों में पांच को 45 दिन के भीतर, सात को 45 से 60 दिन के बीच और 66 को 60 दिन के बाद स्वीकृति मिली।

इसका अर्थ है कि स्वीकृत कार्यों में लगभग 84.62 प्रतिशत को मंजूरी मिलने में 60 दिन से अधिक समय लगा। केवल 6.41 प्रतिशत स्वीकृत प्रस्ताव ही 45 दिन के भीतर मंजूर हुए।

280 प्रस्ताव निरस्त, चार वर्षों में सबसे बड़ा आंकड़ा

वर्ष 2025-26 में 280 प्रस्तावों का निरस्त होना इस रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। यह कुल अनुशंसित संख्या का करीब 70 प्रतिशत है।

इतने बड़े पैमाने पर प्रस्ताव निरस्त होने के पीछे सामान्य तकनीकी कारणों से आगे की स्थिति भी हो सकती है। यह संभव है कि बड़ी संख्या में छोटे कार्य एक साथ पोर्टल पर अपलोड किए गए हों और बाद में उनकी पात्रता, बजट उपलब्धता या दोहराव की जांच में कई प्रस्ताव हटाए गए हों।

लेकिन आधिकारिक सारांश इसके कारण नहीं बताता। इसलिए यह कहना उचित नहीं होगा कि सभी प्रस्ताव गलत थे या प्रशासन ने मनमाने तरीके से उन्हें निरस्त किया।

सटीक आकलन के लिए निम्न जानकारी आवश्यक होगी—

  1. निरस्त कार्य का नाम
  2. संबंधित ग्राम या वार्ड
  3. अनुमानित लागत
  4. संस्तुति की तारीख
  5. निरस्तीकरण की तारीख
  6. निरस्तीकरण का कारण
  7. क्या संशोधित प्रस्ताव दोबारा भेजा गया
  8. क्या वही काम दूसरी योजना में स्वीकृत था

आधिकारिक डेटा में एक अंक का अंतर

रिपोर्ट में 398 अनुशंसित कार्य दर्ज हैं। इसके मुकाबले 41 लंबित, 78 स्वीकृत और 280 निरस्त कार्यों का योग 399 बनता है।

2025-26 की व्यापक राज्यस्तरीय रिपोर्ट UP MLA Fund Report 2025-26 पर उपलब्ध है।

वर्ष 2026-27 में 98 प्रस्ताव और 77 स्वीकृत कार्य

वित्तीय वर्ष 2026-27 की रिपोर्ट में मीरापुर विधानसभा क्षेत्र के लिए 98 कार्य अनुशंसित दिखाई देते हैं। इनमें 77 कार्य स्वीकृत और पांच निरस्त दर्ज हैं। रिपोर्ट जुलाई 2026 में निर्यात की गई थी, इसलिए इसे पूरे वित्तीय वर्ष का अंतिम प्रदर्शन नहीं माना जाना चाहिए।

2026-27 का उपलब्ध विवरण

श्रेणीकार्य
अनुशंसित कार्य98
कुल स्वीकृत कार्य77
निरस्त कार्य5
शेष अस्पष्ट स्थिति16
स्वीकृति प्रतिशत78.57%

स्वीकृत 77 कार्यों में 75 काम 45 दिन के भीतर, एक काम 45 से 60 दिन में और एक काम 60 दिन के बाद स्वीकृत दिखाई देता है।

यदि यही कॉलम संरचना सही है तो वर्ष 2026-27 में स्वीकृति की गति पिछले दो वर्षों के मुकाबले काफी बेहतर रही। लगभग 97.40 प्रतिशत स्वीकृत कार्य 45 दिन के भीतर मंजूर हुए।

हालांकि 98 अनुशंसित कार्यों में 77 स्वीकृत और पांच निरस्त कार्यों को घटाने के बाद 16 काम बचते हैं।

वर्ष 2026-27 का राज्यस्तरीय संदर्भ UP MLA Fund Report 2026-27 में पढ़ा जा सकता है।

चार वर्षों में प्रस्ताव और स्वीकृति का उतार-चढ़ाव

मीरापुर विधानसभा के चार वर्षों के आंकड़ों में एक समान प्रवृत्ति नहीं दिखाई देती।

  • 2023-24 में 66 में 66 कार्य स्वीकृत हुए।
  • 2024-25 में 91 में 61 कार्य स्वीकृत हुए।
  • 2025-26 में प्रस्तावों की संख्या 398 तक पहुंची, लेकिन केवल 78 कार्य स्वीकृत दिखे।
  • 2026-27 की जुलाई तक 98 में 77 कार्यों को स्वीकृति मिली।

वर्षवार स्वीकृति दर

वित्तीय वर्षस्वीकृति दर
2023-24100%
2024-2567.03%
2025-2619.60%
2026-2778.57%

वर्ष 2025-26 में प्रस्तावों की संख्या अचानक बढ़ी, लेकिन स्वीकृति दर सबसे कम रही। इसके विपरीत 2026-27 में जुलाई तक प्रस्ताव कम रहे लेकिन स्वीकृति दर में सुधार दिखाई दिया।

यह तुलना बताती है कि अधिक प्रस्ताव देना ही बेहतर प्रदर्शन का प्रमाण नहीं है। प्रस्तावों की गुणवत्ता, योजना के नियमों के अनुरूपता, भूमि की उपलब्धता और जिला प्रशासन द्वारा समय पर जांच भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

क्या 282 स्वीकृत कार्य पूरे हो गए?

नहीं। स्वीकृत कार्य और पूर्ण कार्य अलग-अलग श्रेणियां हैं।

किसी प्रस्ताव को स्वीकृति मिलने के बाद भी उसे निम्न चरणों से गुजरना होता है—

विधायक निधि के सभी लेख और विश्लेषण उत्तर प्रदेश विधायक निधि रिपोर्ट सेक्शन में देखे जा सकते हैं।

कितनी विधायक निधि खर्च हुई?

इस रिपोर्ट से रुपये में वास्तविक खर्च नहीं निकाला जा सकता। चारों PDF में निम्न वित्तीय जानकारी नहीं दी गई है—

किसी जिले या विधायक के कार्यों की संख्या को सीधे खर्च नहीं माना जा सकता। एक छोटी इंटरलॉकिंग गली और बड़े सामुदायिक भवन को रिपोर्ट में एक-एक कार्य गिना जाता है, जबकि दोनों की लागत में बड़ा अंतर हो सकता है।

रुपये में वास्तविक स्थिति जानने के लिए उत्तर प्रदेश के आधिकारिक MLA LADS पोर्टल की विधायकवार व्यय, बजट आवंटन और कार्यवार रिपोर्ट का मिलान आवश्यक है।

मिथलेश पाल का MLA Profile और राजनीतिक सफर

विधायक प्रोफाइल सूची में मिथलेश पाल को राष्ट्रीय लोक दल की विधायक, मीरापुर विधानसभा क्षेत्र संख्या 16 और मुजफ्फरनगर जिले की प्रतिनिधि के रूप में दर्ज किया गया है।

उनका प्रोफाइल यहां देखा जा सकता है—

मिथलेश पाल MLA Profile

मीरापुर विधानसभा क्षेत्र का वर्तमान विधायक पेज यहां उपलब्ध है—

मीरापुर की वर्तमान विधायक मिथलेश पाल

राज्य के सभी विधायकों की राजनीतिक यात्रा के लिए—

यूपी विधायकों का राजनीतिक सफर

2012 में रालोद उम्मीदवार के रूप में चुनाव

मीरापुर विधानसभा चुनाव के उपलब्ध इतिहास के अनुसार मिथलेश पाल ने 2012 में राष्ट्रीय लोक दल के टिकट पर चुनाव लड़ा था। उस चुनाव में बसपा के जमील अहमद कासमी ने उन्हें 12,733 वोटों से हराया था। मिथलेश पाल उपविजेता रही थीं।

इससे स्पष्ट है कि मीरापुर की राजनीति से उनका रिश्ता नया नहीं है। वह 2024 के उपचुनाव से पहले भी इस क्षेत्र में चुनाव लड़ चुकी थीं।

2022 में मिथलेश पाल नहीं, चंदन चौहान जीते थे

वर्ष 2022 के मीरापुर विधानसभा चुनाव में रालोद के चंदन चौहान विजयी हुए थे। उन्होंने 1,07,421 वोट हासिल किए। भाजपा के प्रशांत चौधरी को 80,041 वोट मिले। जीत का अंतर 27,380 मत रहा।

मीरापुर विधानसभा चुनाव 2022

उम्मीदवारपार्टीवोट
चंदन चौहानराष्ट्रीय लोक दल1,07,421
प्रशांत चौधरीभारतीय जनता पार्टी80,041
जीत का अंतर27,380

पूरा चुनावी विश्लेषण यहां पढ़ा जा सकता है—

मीरापुर विधानसभा चुनाव 2012 से 2022 का विश्लेषण

मुजफ्फरनगर जिले की सभी सीटों के 2022 परिणाम यहां उपलब्ध हैं—

Muzaffarnagar Assembly Election Results 2022

2024 के उपचुनाव में मिथलेश पाल की जीत

चंदन चौहान के बिजनौर से लोकसभा सदस्य चुने जाने के बाद मीरापुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव हुआ। राष्ट्रीय लोक दल ने मिथलेश पाल को उम्मीदवार बनाया।

नवंबर 2024 के उपचुनाव में मिथलेश पाल ने समाजवादी पार्टी की सुम्बुल राणा को 30,796 मतों से हराया। इसके बाद वह मीरापुर विधानसभा क्षेत्र की वर्तमान विधायक बनीं।

मीरापुर सीट का हालिया राजनीतिक क्रम

वर्षविजेतापार्टीस्थिति
2012जमील अहमद कासमीबसपामिथलेश पाल उपविजेता
2017अवतार सिंह भड़ानाभाजपा193 वोट से जीत
2022चंदन चौहानरालोद27,380 वोट से जीत
2024 उपचुनावमिथलेश पालरालोद30,796 वोट से जीत

यह क्रम दिखाता है कि मीरापुर सीट पर मतदाता अलग-अलग चुनावों में बदलता जनादेश देते रहे हैं। 2012 में बसपा, 2017 में भाजपा और 2022 तथा 2024 में रालोद ने जीत हासिल की।

मीरापुर की विधायक निधि रिपोर्ट से उठते सवाल

चार वर्षों की संयुक्त रिपोर्ट पांच बड़े सवाल सामने रखती है।

1. पुराने वर्षों में वर्तमान विधायक का नाम क्यों?

मिथलेश पाल नवंबर 2024 में विधायक बनीं, लेकिन 2023-24 और पूरे 2024-25 के डेटा में भी क्रम संख्या 16 पर उनका नाम प्रदर्शित है। इससे पोर्टल की रिपोर्टिंग संरचना को समझना जरूरी है।

संभव है कि पोर्टल वर्तमान विधायक का नाम सीट के सभी पुराने वित्तीय रिकॉर्ड के सामने दिखाता हो। ऐसी स्थिति में पुराने कामों का श्रेय या जिम्मेदारी वर्तमान विधायक से सीधे नहीं जोड़ी जानी चाहिए।

2. वर्ष 2025-26 में 280 प्रस्ताव क्यों निरस्त हुए?

यह चार वर्षों का सबसे बड़ा निरस्तीकरण आंकड़ा है। प्रस्ताववार कारण सार्वजनिक होने चाहिए।

3. 41 प्रस्ताव 60 दिन से अधिक क्यों लंबित रहे?

समयबद्ध प्रशासनिक प्रक्रिया विधायक निधि की प्रभावशीलता के लिए आवश्यक है।

4. स्वीकृत 282 कार्यों में कितने पूर्ण हुए?

स्वीकृति के बाद निर्माण और भुगतान की स्थिति अलग रिपोर्ट में देखनी होगी।

5. वास्तविक खर्च कितना हुआ?

कार्य संख्या से वित्तीय खर्च का अनुमान नहीं लगाया जा सकता। इसके लिए विधायकवार व्यय रिपोर्ट जरूरी है।

पारदर्शिता के लिए कार्यवार जानकारी जरूरी

प्रत्येक स्वीकृत या निरस्त काम के साथ पोर्टल पर निम्न जानकारी उपलब्ध होनी चाहिए—

  1. कार्य का पूरा नाम
  2. ग्राम, वार्ड और विधानसभा क्षेत्र
  3. संस्तुति की तारीख
  4. स्वीकृति या निरस्तीकरण की तारीख
  5. स्वीकृत लागत
  6. कार्यदायी संस्था
  7. निर्माण शुरू होने की तारीख
  8. निर्धारित पूर्णता अवधि
  9. जारी भुगतान
  10. वर्तमान भौतिक प्रगति
  11. जीपीएस लोकेशन
  12. निर्माण से पहले और बाद की तस्वीर

इससे नागरिक यह जांच सकेंगे कि उनके क्षेत्र में प्रस्तावित काम वास्तव में जमीन पर हुआ या केवल पोर्टल की संख्या बनकर रह गया।

चार वर्षों की रिपोर्ट से क्या तस्वीर सामने आती है?

मीरापुर विधानसभा क्षेत्र में कुल 653 अनुशंसित और 282 स्वीकृत कार्य दिखाई देते हैं। 2023-24 में सभी 66 प्रस्ताव स्वीकृत हुए। 2024-25 में स्वीकृति घटकर 61 रही और 30 काम निरस्त हुए। वर्ष 2025-26 में प्रस्तावों की संख्या 398 तक पहुंची, लेकिन केवल 78 कार्य स्वीकृत और 280 निरस्त दिखे। वर्ष 2026-27 की जुलाई तक 98 में 77 काम स्वीकृत दर्ज हैं।

इन आंकड़ों को मिथलेश पाल के व्यक्तिगत चार वर्षीय प्रदर्शन के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं होगा, क्योंकि वह नवंबर 2024 के उपचुनाव के बाद विधायक बनीं। 2023-24 और 2024 के अधिकांश समय में चंदन चौहान मीरापुर के निर्वाचित प्रतिनिधि थे।

मीरापुर विधानसभा सीट से जुड़े 653 विकास कार्य प्रस्तावित तथा 282 स्वीकृत दिखाए गए हैं। मिथलेश पाल के वास्तविक कार्यकाल का निष्पक्ष आकलन नवंबर 2024 के बाद की कार्यवार संस्तुतियों, वित्तीय व्यय और पूर्ण परियोजनाओं के आधार पर किया जाना चाहिए।

विधायक निधि की सफलता अधिक प्रस्ताव भेजने या स्वीकृति प्राप्त करने से ही तय नहीं होती। असली पैमाना यह है कि कितने काम समय पर शुरू हुए, कितने गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरे हुए, कितना पैसा वास्तव में खर्च हुआ और स्थानीय जनता को उनसे कितना लाभ मिला।

  • समाचार संपादन, ब्रेकिंग अलर्ट और फैक्ट-चेक पर फ़ोकस। ज़मीनी रिपोर्टों को डेटा के साथ जोड़ना पसंद। कॉफ़ी, डेडलाइन और सत्य , तीनों से समझौता नहीं।

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