भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने की सरकार की कोशिशों को सोमवार 17 अगस्त को बड़ी कामयाबी मिली। केंद्र सरकार ने ECMS (Electronics Component Manufacturing Scheme) के तहत 31 नए निवेश प्रस्तावों को मंजूरी दी है। इन प्रस्तावों में कुल ₹7,877 करोड़ का निवेश किया जाएगा और सरकार के मुताबिक इन परियोजनाओं से करीब ₹82,243 करोड़ का उत्पादन होने की उम्मीद है। इस घोषणा के बाद मंगलवार, 18 अगस्त के कारोबारी सत्र में Wipro, PCBL केमिकल, सेंट्रम इलेक्ट्रॉनिक्स (Centum Electronics) और Syrma SGS जैसे शेयर निवेशकों के रडार पर रह सकते हैं। सरकार की ताजा मंजूरियों के साथ ECMS के तहत अब तक स्वीकृत कुल निवेश बढ़कर ₹69,548 करोड़ हो गया है।
यह रकम योजना के शुरुआती निवेश लक्ष्य ₹59,350 करोड़ से भी ज्यादा है। इतना ही नहीं, इन स्वीकृत निवेशों से अनुमानित उत्पादन करीब ₹5.34 लाख करोड़ तक पहुंच गया है, जबकि योजना के लिए शुरुआती उत्पादन लक्ष्य ₹4.56 लाख करोड़ रखा गया था। इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि अब तक इस योजना के तहत 106 कंपनियों को मंजूरी मिल चुकी है।
इनमें से 38 परियोजनाओं में उत्पादन शुरू हो चुका है, जबकि 16 परियोजनाएं निर्माण के चरण में हैं। सरकार का अनुमान है कि स्वीकृत परियोजनाओं से करीब 75,000 प्रत्यक्ष नौकरियां और 2.5 लाख से ज्यादा अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा हो सकते हैं। खास बात यह है कि ECMS के तहत नए आवेदन की प्रक्रिया अभी भी खुली हुई है, यानी आने वाले समय में निवेश का आंकड़ा और बढ़ सकता है।
ताजा मंजूरियों में कई बड़ी कंपनियों के नाम शामिल हैं। विप्रो ग्लोबल इंजीनयरिंग (Wipro Global Engineering) को ₹1,401 करोड़ के निवेश की मंजूरी मिली है, जो इस लिस्ट में सबसे बड़े निवेशों में से एक है। इसके अलावा माइक्रोमैक्स प्रिसिजन मॉल्डिंग (Micromax Precision Moulding) को ₹565 करोड़, PCBL केमिकल को ₹329 करोड़ और मिंडा इंस्ट्रूमेंट (Minda Instrument) को ₹270 करोड़ के निवेश की मंजूरी मिली है। VVDN टेक्नोलॉजीज को ₹100 करोड़ और मित्सुबिशी इलेक्ट्रिक (Mitsubishi Electric) को ₹99 करोड़ के निवेश की मंजूरी मिली है। वहीं, सेंट्रम इलेक्ट्रॉनिक्स (Centum Electronics) को दो अलग-अलग प्रस्तावों के लिए ₹52 करोड़ और ₹54 करोड़ की मंजूरी मिली है। Syrma SGS को भी ₹60 करोड़ के निवेश की मंजूरी मिली है।
इन घोषणाओं के कारण संबंधित कंपनियों के शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ सकती है, हालांकि केवल सरकारी मंजूरी मिलने का मतलब यह नहीं है कि शेयर की कीमत निश्चित रूप से बढ़ेगी। कंपनी के मौजूदा कारोबार, ऑर्डर बुक, मुनाफे, वैल्यूएशन और परियोजना को लागू करने की क्षमता को भी देखना जरूरी होगा।
ECMS की सफलता पर सरकार उत्साहित जरूर है, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में अभी कई चुनौतियां बाकी हैं। अश्विनी वैष्णव ने कहा कि वह देश में स्थानीय डिजाइन क्षमता को लेकर पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने भारत में एक मजबूत ‘स्वदेशी सप्लाई चेन’ विकसित करने पर जोर दिया। उनका कहना है कि भारत को सिर्फ असेंबली तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि डिजाइन, कंपोनेंट और तकनीक के स्तर पर भी अपनी क्षमता बढ़ानी होगी। उन्होंने मैन्युफैक्चरिंग की गुणवत्ता को लेकर भी जोर देते हुए कहा कि 6 सिग्मा मैन्युफैक्चरिंग जरूरी है। इसके साथ ही कुशल कर्मचारियों की कमी को भी एक बड़ी चुनौती बताया गया है। सरकार के अनुसार टैलेंट डेवलपमेंट के लिए प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन आने वाले समय में इन प्रयासों को कई गुना बढ़ाने की जरूरत होगी।
सरकार ने बजट में भी उठाया बड़ा कदम
ECMS के लिए सरकार ने बजट में भी बड़ा कदम उठाया है। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में योजना का कुल वित्तीय आवंटन ₹22,919 करोड़ से बढ़ाकर ₹40,000 करोड़ करने का प्रस्ताव रखा गया था। सरकार ने मार्च 2025 में इस योजना को मंजूरी दी थी। इसका उद्देश्य भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट, सब-असेंबली और कैपिटल इक्विपमेंट का घरेलू उत्पादन बढ़ाना, आयात पर निर्भरता कम करना और भारतीय कंपनियों को ग्लोबल सप्लाई चेन से जोड़ना है।