नौकरी-कमीशन का लालच देकर खुलवाए जा रहे थे खाते: 7 महीने में 1242 म्यूल अकाउंट पकड़े, 122 गिरफ्तार; 3 करोड़ रुपए फ्रीज - durg-bhilai News

Published on 30 जुल॰ 2026
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दुर्ग-भिलाई3 घंटे पहले

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छत्तीसगढ़ की दुर्ग पुलिस ने नौकरी और कमीशन का लालच देकर खुलवाए गए म्यूल बैंक खातों के जरिए चल रहे साइबर ठगी नेटवर्क का खुलासा किया है। पिछले 7 महीनों में 1242 म्यूल बैंक खातों की पहचान कर 122 लोगों (117 खाताधारक और 5 एजेंट) को गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस ने ठगी से जुड़े करीब 3 करोड़ रुपए फ्रीज किए हैं, जबकि 2000 से ज्यादा संदिग्ध खातों की जांच जारी है। जांच में सामने आया कि डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश, शेयर ट्रेडिंग फ्रॉड, ऑनलाइन गेमिंग, ऑनलाइन सट्टा और कस्टमर केयर फ्रॉड जैसे मामलों में ठगी की रकम पहले म्यूल खातों में जमा की जाती थी।

इसके बाद कुछ ही मिनटों में पैसे अलग-अलग खातों में छोटे हिस्सों में ट्रांसफर कर दिए जाते थे, जिससे असली आरोपियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता था। आखिर में रकम एटीएम, यूपीआई, इंटरनेट बैंकिंग, ई-वॉलेट या नकद निकासी के जरिए मुख्य आरोपियों तक पहुंचाई जाती थी।

पुलिस ने बुधवार को 26 आरोपियों को गिरफ्तार किया।

पुलिस ने बुधवार को 26 आरोपियों को गिरफ्तार किया।

ऐसे फंसाए जाते थे लोग

पुलिस के मुताबिक गिरोह बेरोजगार और जरूरतमंद लोगों को नौकरी, आसान कमाई और कमीशन का लालच देकर उनके बैंक खाते इस्तेमाल करता था। कई मामलों में नए खाते खुलवाकर एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक, सिम कार्ड, मोबाइल नंबर और इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी तक अपराधियों को सौंप दी जाती थी।

कुछ खाताधारक कमीशन लेकर लेन-देन में शामिल रहते थे, जबकि कई खातों का पूरा संचालन गिरोह ही करता था।

मोहन नगर थाना क्षेत्र में भी म्यूल खाता के मामले में हो चुकी है कार्रवाई।

मोहन नगर थाना क्षेत्र में भी म्यूल खाता के मामले में हो चुकी है कार्रवाई।

देशभर से जुटाए गए डिजिटल सबूत

1 जनवरी से 29 जुलाई 2026 के बीच चलाए गए विशेष अभियान में 18 मामले दर्ज किए गए। पुलिस मुख्यालय की साइबर तकनीकी टीम, भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C), राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP), विभिन्न राज्यों से मिली शिकायतों और बैंकों की जानकारी के आधार पर खातों की पहचान की गई।

बैंक ट्रांजेक्शन, केवाईसी दस्तावेज, मोबाइल नंबर, इंटरनेट बैंकिंग लॉग और यूपीआई रिकॉर्ड की जांच के बाद कार्रवाई की गई।

पुलिस ने 7 महीनों में कई मामलों का किया है खुलासा।

पुलिस ने 7 महीनों में कई मामलों का किया है खुलासा।

बैंक अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में

जांच अब खाताधारकों और एजेंटों तक सीमित नहीं है। पुलिस यह भी जांच रही है कि खाते खोलने, केवाईसी प्रक्रिया और संदिग्ध लेन-देन की निगरानी में किसी बैंक अधिकारी या प्रबंधक की लापरवाही या मिलीभगत तो नहीं रही। संलिप्तता मिलने पर उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

आरोपियों से एटीएम कार्ड समेत सभी दस्तावेज और मोबाइल भी हुए हैं जब्त।

आरोपियों से एटीएम कार्ड समेत सभी दस्तावेज और मोबाइल भी हुए हैं जब्त।

2000 और संदिग्ध खातों पर नजर

पुलिस ने बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज, एटीएम कार्ड, चेकबुक, पासबुक, मोबाइल फोन, सिम कार्ड, केवाईसी रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्य जब्त किए हैं। अधिकारियों का कहना है कि पूरे मनी ट्रेल की जांच जारी है और 2000 से अधिक संदिग्ध खातों के खिलाफ भी चरणबद्ध तरीके से कार्रवाई की जाएगी।

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