पन्ना में केन-बेतवा लिंक परियोजना, मझगांव और रुंझ बांध समेत ललितपुर-सिंगरौली रेल मार्ग से प्रभावित ग्रामीणों का चिता आंदोलन शुक्रवार को सातवें दिन भी जारी रहा।
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आंदोलनकारियों ने पूर्ण मुआवजा, पारदर्शी पुनर्वास और सामाजिक आकलन की मांग की। सागर संभाग के कमिश्नर दिलीप कुमार के बयान के बाद ग्रामीणों ने विरोध तेज करने और रात में मशाल जुलूस निकालने की तैयारी की।
कमिश्नर के बयान पर जताई नाराजगी
शुक्रवार को पन्ना दौरे के दौरान कमिश्नर ने धरने पर बैठे ग्रामीणों को ‘गैर-विस्थापित’ बताया। आंदोलनकारियों ने इस बयान पर आपत्ति जताई।
जय किसान संगठन के नेता अमित भटनागर ने कहा कि प्रशासनिक टीम ने मौके पर 150 से ज्यादा प्रभावित लोगों के नाम दर्ज किए थे।

आंदोलन में बढ़ी भीड़
आंदोलनकारियों के अनुसार शुरुआत में रोजाना 400 से 500 लोग धरने में शामिल हो रहे थे। कमिश्नर के बयान के बाद शुक्रवार को यह संख्या करीब 1200 से 1300 तक पहुंच गई।
ग्रामीणों ने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।
मुआवजे और पुनर्वास को लेकर सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि बांध का जलस्तर बढ़ने से कुछ परिवारों के घरों में पानी पहुंचने की स्थिति बन रही है। उनका आरोप है कि मुआवजा और पुनर्वास की पूरी व्यवस्था किए बिना जलस्तर बढ़ाया जा रहा है।

आंदोलनकारियों ने मुख्यमंत्री की ओर से घोषित अतिरिक्त सहायता राशि के भुगतान में देरी का भी मुद्दा उठाया। उनका कहना है कि दो महीने बाद भी कई परिवारों को पूरी राशि नहीं मिली है। कुछ परिवारों को पहले घोषित 5 लाख रुपए की सहायता भी अब तक नहीं मिलने का दावा किया गया है।
बिजली-पानी कनेक्शन काटने का आरोप
अमित भटनागर ने आरोप लगाया कि मांगों को लेकर आवाज उठाने वाले ग्रामीणों के बिजली और पानी के कनेक्शन काटे जा रहे हैं। प्रशासन की ओर से इस आरोप पर तत्काल कोई पक्ष सामने नहीं आया है।

रात में मशाल जुलूस निकालेंगे
आंदोलनकारियों ने अब धरना रात में भी जारी रखने का निर्णय लिया है। शुक्रवार देर रात बांध स्थल पर मशाल जुलूस निकालने की तैयारी की गई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पूर्ण मुआवजा, पारदर्शी सर्वे और पुनर्वास की व्यवस्था होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
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केन-बेतवा लिंक परियोजना के प्रभावित आदिवासियों का पन्ना में जल-सत्याग्रह बुधवार को पांचवें दिन भी जारी रहा। इसी दौरान एक बुजुर्ग महिला रमिया आदिवासी की मौत हो गई। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर का कहना है कि घर टूटने, मुआवजा नहीं मिलने और गांव डूबने के डर से रमिया तनाव में थीं। वे 12 सितंबर को प्रदर्शन में शामिल थीं।
आंदोलन में करीब 400 लोग पानी के बीच लकड़ियों के ढांचे पर लेटकर प्रदर्शन कर रहे हैं। इनमें महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल हैं। कई आंदोलनकारियों ने गले में सांकेतिक फंदा डाल रखा है। उनका कहना है- 'न्याय दो या मार दो।' पढ़ें पूरी खबर