Punjab Assembly Elections 2027: पंजाब का गुरदासपुर जिला सिर्फ सीमावर्ती क्षेत्र होने की वजह से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि राज्य की राजनीति में भी इसकी खास जगह है. पाकिस्तान की सीमा से सटा यह इलाका ऐतिहासिक, धार्मिक और राजनीतिक दृष्टि से काफी अहम माना जाता है. रावी और ब्यास नदियों के बीच स्थित गुरदासपुर पंजाब के उत्तरी हिस्से में आता है और यहां की राजनीति पर ग्रामीण मतदाता, किसान, धार्मिक-सामाजिक समीकरण तथा कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (AAP), बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के बीच मुकाबले का असर दिखाई देता है.
2011 की जनगणना के मुताबिक गुरदासपुर जिले की आबादी करीब 22.99 लाख थी. इनमें 12,12,995 पुरुष और 10,86,031 महिलाएं थीं. जिले का लिंगानुपात 895 महिलाएं प्रति 1000 पुरुष है.
/filters:format(webp)/newsnation/media/media_files/2026/09/09/gurdaspur-result-2026-09-09-15-06-59.jpg)
गुरदासपुर का इतिहास क्या है?
गुरदासपुर शहर की स्थापना 17वीं सदी की शुरुआत में गुरिया दास जी से जुड़ी मानी जाती है. कहा जाता है कि उन्होंने सांगली गोत्र के जाटों से जमीन लेकर यहां बस्ती बसाई, जिसके बाद इसका नाम गुरदासपुर पड़ा.
गुरदासपुर के आसपास का क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से काफी महत्वपूर्ण रहा है. यहां से कुछ ही दूरी पर स्थित कलानौर का मुगल इतिहास में विशेष स्थान है. यहीं 1556 में अकबर का राज्याभिषेक हुआ था. वहीं दीनानगर का संबंध महाराजा रणजीत सिंह के दौर से जुड़ा है. इस क्षेत्र में बहरामपुर स्थित बैरम खान का मकबरा भी ऐतिहासिक महत्व रखता है.
आजादी के बाद गुरदासपुर ने पंजाब की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई. सीमावर्ती जिला होने के कारण सुरक्षा, खेती, व्यापार, रोजगार और सीमा से जुड़े मुद्दे यहां चुनावी राजनीति में महत्वपूर्ण रहते हैं.
गुरदासपुर की आबादी: पुरुष-महिला का आंकड़ा
2011 Census के अनुसार जिले की कुल आबादी 22,99,026 थी. इनमें 12,12,995 पुरुष और 10,86,031 महिलाएं थीं. यानी महिलाओं की संख्या पुरुषों से कम है और लिंगानुपात 895 है.
/filters:format(webp)/newsnation/media/media_files/2026/09/09/gurdaspur-population-2026-09-09-14-49-56.jpg)
गुरदासपुर की साक्षरता दर में पुरुष आगे
गुरदासपुर की 2011 में औसत साक्षरता दर 81.10% थी. पुरुषों की साक्षरता दर 85.90% और महिलाओं की 75.70% दर्ज की गई. यानी पुरुष और महिला साक्षरता के बीच करीब 10.2 प्रतिशत अंक का अंतर था. जिले में कुल 16,68,339 लोग साक्षर थे, जिनमें 9,28,264 पुरुष और 7,40,075 महिलाएं थीं.
/filters:format(webp)/newsnation/media/media_files/2026/09/09/literacy-rate-gurdaspur-2026-09-09-14-51-10.jpg)
इस लिहाज से शिक्षा के क्षेत्र में गुरदासपुर पंजाब के कई जिलों की तुलना में बेहतर स्थिति में है, लेकिन महिला शिक्षा और रोजगार के बीच का अंतर अब भी राजनीतिक और सामाजिक विमर्श का हिस्सा है.
गुरदासपुर की धार्मिक आबादी कैसी है?
2011 के Census-based धर्म संबंधी आंकड़ों के मुताबिक गुरदासपुर में हिंदू सबसे बड़ा धार्मिक समुदाय है. करीब 10,74,332 लोग हिंदू समुदाय से हैं, जो लगभग 46.74% आबादी है. इसके बाद सिख आबादी करीब 10,02,874 यानी 43.64% है. ईसाई आबादी करीब 1,76,587 यानी 7.68% है, जबकि मुस्लिम आबादी 27,667 यानी करीब 1.20% है.
/filters:format(webp)/newsnation/media/media_files/2026/09/09/relegious-data-gurdaspur-2026-09-09-14-52-27.jpg)
धार्मिक आंकड़ों में एक दिलचस्प पहलू यह है कि पंजाब के सामान्य सिख-बहुल राजनीतिक परिदृश्य के बीच गुरदासपुर में हिंदू और सिख आबादी का अनुपात काफी करीबी है. यही वजह है कि यहां के चुनावी समीकरण राज्य के दूसरे हिस्सों से कुछ अलग दिखाई दे सकते हैं.
गुरदासपुर जिले में कितनी विधानसभा सीटें हैं?
मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था के मुताबिक गुरदासपुर जिले के तहत 7 विधानसभा क्षेत्र आते हैं. ये हैं—गुरदासपुर, दीनानगर, कादियां, बटाला, श्री हरगोबिंदपुर, फतेहगढ़ चूड़ियां और डेरा बाबा नानक. जिले की आधिकारिक वेबसाइट भी 7 विधानसभा क्षेत्रों का उल्लेख करती है.
/filters:format(webp)/newsnation/media/media_files/2026/09/09/gurdaspur-seats-data-2026-09-09-14-53-22.jpg)
2022 में कांग्रेस का रहा दबदबा
2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में गुरदासपुर जिले की सात सीटों में से कांग्रेस ने चार सीटें जीती थीं. गुरदासपुर, दीनानगर, कादियां और फतेहगढ़ चूड़ियां कांग्रेस के खाते में गईं. वहीं आम आदमी पार्टी ने बटाला और श्री हरगोबिंदपुर में जीत दर्ज की.
यह परिणाम दिखाता है कि 2022 में जिले में कांग्रेस की पकड़ पूरी तरह खत्म नहीं हुई थी, जबकि AAP ने ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में अपनी मौजूदगी मजबूत की.
डेरा बाबा नानक उपचुनाव ने बदला समीकरण
2024 में डेरा बाबा नानक सीट पर हुए उपचुनाव ने जिले की राजनीतिक तस्वीर में बदलाव किया. कांग्रेस के सांसद बने सुखजिंदर सिंह रंधावा के इस्तीफे के बाद इस सीट पर उपचुनाव हुआ. AAP के गुरदीप सिंह रंधावा ने जीत दर्ज की. पंजाब विधानसभा के आधिकारिक प्रोफाइल के अनुसार वह 2024 के उपचुनाव से पहली बार विधानसभा पहुंचे.
इस जीत से गुरदासपुर जिले में AAP की विधानसभा सीटों की संख्या बढ़कर तीन हो गई, जबकि कांग्रेस के पास चार सीटें रहीं.
गुरदासपुर का सियासी समीकरण क्या कहता है?
गुरदासपुर की राजनीति में फिलहाल कांग्रेस बनाम AAP मुकाबला सबसे महत्वपूर्ण दिखाई देता है, लेकिन बीजेपी और अकाली दल को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. 2022 में सात सीटों पर कांग्रेस और AAP के बीच सीधी टक्कर कई जगह देखने को मिली. वहीं 2024 लोकसभा चुनाव ने भी यहां के राजनीतिक समीकरण को दिलचस्प बना दिया.
गुरदासपुर लोकसभा सीट पर 2024 में कांग्रेस के सुखजिंदर सिंह रंधावा विजयी रहे. उन्हें 3,64,043 वोट मिले, जबकि बीजेपी के दिनेश सिंह बाबू को 2,81,182 और AAP के अमनशेर सिंह को 2,77,252 वोट मिले.
इससे पता चलता है कि लोकसभा स्तर पर कांग्रेस को बढ़त मिली, लेकिन विधानसभा स्तर पर AAP भी मजबूत चुनौती पेश कर रही है.
बीजेपी की चुनौती भी महत्वपूर्ण
गुरदासपुर की राजनीति में बीजेपी का प्रभाव भी ऐतिहासिक रूप से रहा है, खासकर शहरी मतदाताओं और कुछ हिंदू बहुल इलाकों में. हालांकि 2022 में जिले की सात सीटों में बीजेपी कोई सीट नहीं जीत सकी, लेकिन लोकसभा चुनाव में पार्टी का वोट आधार मजबूत रहा. 2024 में बीजेपी के दिनेश सिंह बाबू लोकसभा चुनाव में दूसरे स्थान पर रहे.
इसलिए आने वाले चुनाव में कांग्रेस और AAP के बीच मुकाबले के साथ बीजेपी की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है. अगर बीजेपी अपना शहरी और गैर-कांग्रेस वोट आधार बढ़ाती है, तो मुकाबले का गणित कई सीटों पर बदल सकता है.
गुरदासपुर में किन मुद्दों पर होता है चुनाव?
सीमावर्ती जिले के कारण यहां सीमा सुरक्षा, खेती, बेरोजगारी, नशे की समस्या, उद्योग, व्यापार, सड़क और बुनियादी सुविधाएं महत्वपूर्ण चुनावी मुद्दे रहते हैं. इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में किसान और कृषि से जुड़े सवाल निर्णायक हो सकते हैं.
बटाला जैसे औद्योगिक क्षेत्र में रोजगार और उद्योग से जुड़े मुद्दे अहम हैं, जबकि डेरा बाबा नानक में सीमा और धार्मिक पर्यटन का महत्व है. गुरदासपुर और दीनानगर में शहरी सुविधाओं के साथ ग्रामीण मतदाताओं के मुद्दे भी चुनावी परिणामों को प्रभावित करते हैं.
गुरदासपुर: आने वाले चुनाव के लिए क्यों अहम?
गुरदासपुर की सबसे बड़ी राजनीतिक विशेषता इसका मिश्रित वोटिंग पैटर्न है. 2022 में कांग्रेस को चार, AAP को दो सीटें मिलीं और बाद में डेरा बाबा नानक उपचुनाव AAP के खाते में गया. दूसरी ओर 2024 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने गुरदासपुर सीट जीत ली.
इसलिए आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव के लिहाज से गुरदासपुर एक ऐसा क्षेत्र है जहां कांग्रेस अपना गढ़ बचाने की कोशिश करेगी, AAP सत्ता में रहते हुए अपना विस्तार चाहती है और बीजेपी अपने वोट आधार को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर सकती है.
यह भी पढ़ें - अमेठी क्यों है उत्तर प्रदेश की अहम राजनीतिक जमीन? जानें इसका इतिहास