इंद्रधनुष क्यों बनता है? इंद्रधनुष में सिर्फ 7 रंग ही क्यों दिखते हैं? ये है प्रकृति का सबसे खूबसूरत रहस्य

Published on 20 जुल॰ 2026

Rainbow Formation: बारिश के बाद आसमान में दिखने वाला इंद्रधनुष कोई जादू नहीं, बल्कि विज्ञान का अद्भुत करिश्मा है। जानिए सूर्य की रोशनी और पानी की बूंदों से इंद्रधनुष कैसे बनता है और इसमें सिर्फ 7 रंग ही क्यों दिखाई देते हैं।

Rainbow Formation: बारिश के बाद जब बादलों के बीच से सूर्य का प्रकाश निकलता है, तो कई बार आसमान में 7 रंगों का खूबसूरत इंद्रधनुष दिखता है। इसे देखकर बच्चों से लेकर बड़े तक हर कोई खुश हो जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं इंद्रधनुष क्यों बनता है? इसका जवाब साइंस में छिपा है। इंद्रधनुष किसी जादू या चमत्कार से नहीं, बल्कि सूर्य के प्रकाश, पानी की बूंदों और प्रकाश के रूल्स से बनता है।

इंद्रधनुष बनने के लिए किन चीजों की जरूरत होती है?

इंद्रधनुष बनने के लिए मुख्य रूप से 3 चीजें जरूरी होती हैं-

- सूर्य का प्रकाश

- हवा में मौजूद पानी की छोटी-छोटी बूंदें

- देखने वाले इंसान का सही डायरेक्शन

यही वजह है इंद्रधनुष ज्यादातर बारिश के बाद या झरने और फव्वारे के पास दिखता है।

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इंद्रधनुष आखिर बनता कैसे है?

सूर्य का प्रकाश हमें सफेद दिखाई देती है, लेकिन असलियत में इसमें कई रंग छिपे होते हैं। जब यह सफेद प्रकाश बारिश की एक छोटी-सी बूंद में प्रवेश करती है, तो 3 प्रोसेस होता है-

1. प्रकाश का टर्न होना (Refraction)- जैसे ही सूर्य की किरणें पानी की बूंद में प्रवेश करती हैं, उसकी स्पीड चेंज हो जाती है और वह टर्न हो जाती है।

2. रंगों में बंटना (Dispersion) : टर्न होने या मुड़ने के दौरान सफेद प्रकाश अपने अलग-अलग रंगों में बंट जाती है। हर रंग अलग डायरेक्शन पर टर्न होता है।

3. परावर्तन (Reflection): इसके बाद प्रकाश बूंद के अंदर से टकराकर रिटर्न होती है और बाहर निकलते समय फिर से टर्न होती है। इसी प्रोसेस की वजह से हमें आसमान में रंगों का सुंदर इंद्र धनुष दिखता है।

इंद्रधनुष में 7 रंग ही क्यों दिखाई देते हैं?

इंद्रधनुष में आमतौर पर ये 7 रंग दिखाई देते हैं-

- लाल

- नारंगी

- पीला

- हरा

- नीला

- जामुनी (इंडिगो)

- बैंगनी (वायलेट)

अंग्रेजी में इसे VIBGYOR भी कहते हैं। साइंस के मुताबिक, प्रकाश में रंगों का एक लगातार फैलाव (Spectrum) होता है। हमें 7 रंग इसलिए दिखाई देते हैं क्योंकि इंसानी आंख उन्हें आसानी से अलग-अलग पहचान लेती है।

क्या हर इंसान एक जैसा इंद्रधनुष देखता है?

नहीं, हर इंसान अपने देखने के डारेक्शन (कोण) के मुताबिक इंद्रधनुष देखता है। मतलब जो इंद्रधनुष आपको दिखाई देता है, ठीक वैसा किसी दूसरे शख्स को दिखे यह जरूरी नहीं है। जैसे- अगर 2 लोग कुछ दूरी पर खड़े हों, तो दोनों तक पहुंचने वाली रोशनी अलग-अलग पानी की बूंदों से आती है।

क्या डबल इंद्रधनुष भी बन सकता है?

हां, कभी-कभी पानी की बूंद के अंदर प्रकाश 2 बार परावर्तित (रिफ्लेक्ट) होती है। ऐसी स्थिति में Double Rainbow (दोहरा इंद्रधनुष) दिखाई देता है। इसमें दूसरा इंद्रधनुष हल्का होता है और उसके रंग उल्टे क्रम में दिखाई देते हैं।

क्या रात में भी इंद्रधनुष बन सकता है?

हां, लेकिन यह बहुत दुर्लभ होता है। अगर रात में चांद का प्रकाश बहुत तेज हो, हवा में पानी की बूंदें हों, तो Moonbow (चंद्र इंद्रधनुष) बन सकता है। यह नॉर्मल इंद्रधनुष की तुलना में काफी हल्का दिखता है।

इंद्रधनुष से जुड़े कुछ आंकड़े

- इंद्रधनुष में लाल रंग लगभग 42° और बैंगनी रंग लगभग 40° के डायरेक्शन (कोण) पर दिखाई देता है।

- इंद्रधनुष के 7 प्रमुख रंग- लाल, नारंगी, पीला, हरा, नीला, इंडिगो और बैंगनी है। आमतौर पर इंद्रधनुष को VIBGYOR भी कहते हैं।

- डबल रेनबो में दूसरा वाला इंद्रधनुष पहले वाले इंद्रधनुष से बाहर दिखाई देता है और उसके रंग उल्टे क्रम में होते हैं।

- एक सामान्य बारिश की बूंद का साइज लगभग 0.5 से 4 मिमी तक हो सकता है, और यही बूंदें इंद्रधनुष बनने में मदद करती हैं।

- चंद्र इंद्रधनुष बहुत दुर्लभ होता है क्योंकि चांद की रोशनी सूरज की रोशनी की तुलना में काफी कम होती है।

कॉन्टेन्ट सोर्सः NASA, National Weather Service (NOAA), Encyclopaedia Britannica, American Meteorological Society (AMS), National Geographic.

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