पुणे के भोर में सोलर प्रोजेक्ट और टॉवर लाइन के खिलाफ किसानों का हल्लाबोल, 71 गांवों ने आंदोलन का ऐलान| Navbharat Live

Published on 31 जुल॰ 2026

Updated On: Jul 31, 2026 | 03:02 PM IST

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सार

Pune Bhor Farmers Protest: भोर में 3,000 KV सोलर सबस्टेशन और टॉवर लाइन के खिलाफ 71 गांवों के किसानों ने खोला मोर्चा। प्रोजेक्ट रद्द कराने की मांग को लेकर आंदोलन का ऐलान।

Farmers in Bhor, Pune unite against 3,000 KV solar substation and high-tension tower line affecting 71 villages; threaten intense agitation.

सोलर प्रोजेक्ट (फोटो- सोशल मीडिया)

विस्तार

Bhor Solar Substation High Tension Tower Line Farmer Protest: पुणे के भोर तहसील के भोंगवली में 3,000 केवी क्षमता के सोलर सबस्टेशन और 71 गांवों से गुजरने वाली हाई टेंशन टॉवर लाइन के खिलाफ ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है। महावितरण के इस प्रोजेक्ट के विरोध में धांगवड़ी में सर्वदलीय किसान सम्मेलन का आयोजन किया गया।

सम्मेलन में सभी राजनीतिक दलों के नेताओं और 71 गांवों के ग्रामीणों ने एकजुट होकर इस प्रोजेक्ट को रद्द कराने का संकल्प लिया। किसानों का कहना है कि इस परियोजना से तहसील का समृद्ध कृषि क्षेत्र पूरी तरह से नष्ट हो जाएगा। धांगवड़ी में आयोजित सम्मेलन में प्रोजेक्ट का विरोध करने के लिए सर्वदलीय कार्य समिति का गठन किया गया है।

किसानों और स्थानीय नेताओं ने अपनी कृषि भूमि की रक्षा के लिए इस प्रोजेक्ट को तहसील से बाहर निकालने का ऐलान किया है। बैठक में रोहन बाठे ने कहा कि भोर तहसील से पहले भी कई सरकारी परियोजनाओं के लिए किसानों की जमीनों का अधिग्रहण किया जा चुका है। हर बार भोर के किसानों को त्याग करना पड़ता है और लाभ दूसरों को मिलता है। प्रोजेक्ट के कारण भोंगवली गांव की ग्रामसभा में प्रोजेक्ट विरोधी प्रस्ताव पारित किया गया था। इसके बावजूद प्रशासनिक अधिकारी निजी कंपनी का सहयोग कर रहे हैं।

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किसानों की भूमिहीन होने की आशंका

जिला परिषद सदस्य विक्रम खुटवड ने कहा कि ग्रामसभा के प्रस्ताव की अनदेखी करके अधिकारी कंपनी के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने सभी ग्रामीणों से एकजुट होकर इस प्रोजेक्ट को तहसील से हटने पर मजबूर करने की अपील की, भोंगवली के प्रभावित किसान कृष्णा लंके ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि उनके गांव की

2.5 एकड़ जमीन से 3 बड़े टॉवर गुजर रहे हैं। इससे वे पूरी तरह से भूमिहीन होने की कगार पर पहुंच गए हैं। गांव की कुल 600 एकड़ जमीन इस प्रोजेक्ट से प्रभावित हो रही है। इससे लगभग 250 से 300 किसानों की जमीन चली जाएगी और आने वाली पीढ़ी के पास खेती के लिए भूमि नहीं बचेगी।

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सम्मेलन में ये उपस्थित

इस सम्मेलन में भोर के पूर्व विधायक संग्राम थोपटे, भालचंद्र जगताप, जिला परिषद सदस्य विक्रम खुटवड, उपसभापति विशाल कोंडे, पंचायत समिति सदस्य रोहन बाठे, चंद्रकांत बाठे, अमोल पांगारे, गणेश निगडे, महेश टापरे, भरत सोनवणे और RPI के विठ्ठल गायकवाड़ उपस्थित थे। आरपीआई नेता विठ्ठल गायकवाड़ ने कार्यक्रम का संचालन किया।

संग्राम थोपटे प्रोजेक्ट ने बाताया की के राजपत्र 66 की प्रसिद्धि आर आपत्तियां मांगने की प्रक्रिया चुपचाप क्यों की गई? इस अन्याय के खिलाफ व्यापक लड़ाई लड़ते हुए सबसे पहले प्रकाशित राजपत्र को अदालत में चुनौती दी जानी चाहिए। प्रभावित 71 गांवों की ग्रामसभाओं से विरोध के प्रस्ताव पारित कराने होंगे। इसके साथ ही सड़को पर उतरकर तीव्र आंदोलन भी करने होंगे। इसी सप्ताह पहला आंदोलन आयोजित किया जाएगा।

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