बरेली में जन्मा 74 KG का अनोखा बछड़ा... सामान्य से तीन गुना ज्यादा वजन, देखने के लिए लगी लोगों की कतार

Published on 13 सित॰ 2026

बरेली में जन्मा 74 KG का अनोखा बछड़ा… सामान्य से तीन गुना ज्यादा वजन, देखने के लिए लगी लोगों की कतार

‘काजल’ गाय ने 74 किलो के बछड़े को दिया जन्म.

Bareilly News: कुदरत कई बार ऐसे करिश्मे दिखाती है जिन्हें देखकर विशेषज्ञ और वैज्ञानिक भी हैरान रह जाते हैं. उत्तर प्रदेश के बरेली जिले से एक ऐसा ही अनोखा मामला सामने आया है. नकटिया के पास सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी वीरेंद्र सिंह यादव की ‘यदु नंदिनी गौशाला’ में एक जन्मांध (नेत्रहीन) गाय ने 74 किलोग्राम वजन के बेहद स्वस्थ बछड़े को जन्म दिया है. सामान्य तौर पर जन्म के समय बछड़ों का वजन करीब 27 से 32 किलो होता है, लेकिन इस बछड़े का वजन सामान्य से लगभग तीन गुना अधिक है. गुरुवार के दिन जन्म होने के कारण इसका नाम ‘गुरु’ रखा गया है. राहत की बात यह है कि जन्म के बाद बछड़ा और उसकी मां दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं.

गौशाला के संचालक व पूर्व सीओ वीरेंद्र सिंह यादव के मुताबिक, यह बछड़ा उनकी गौशाला में ‘काजल’ नाम की गाय से पैदा हुआ है. काजल अमेरिकन प्रजाति की होल्स्टीन फ्रीजियन गाय है और वह जन्म से ही देख नहीं सकती. यह काजल का तीसरा प्रसव था, जो डॉक्टरों की मदद से कराया गया. 74 किलो के इस असामान्य बछड़े के जन्म की खबर मिलते ही आसपास के इलाकों से लोग इसे देखने के लिए गौशाला पहुंचने लगे हैं.

IVRI के वरिष्ठ वैज्ञानिक भी हैरान

भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अभिजीत पावड़े के अनुसार, सामान्य परिस्थितियों में इतने अधिक वजन के बछड़े का जन्म होना अत्यंत दुर्लभ और असंभव माना जाता है. वैज्ञानिकों का कहना है कि ‘मस्कुलर हाइपरट्रॉफी सिंड्रोम’ नाम की स्थिति में बछड़ों का वजन सामान्य से काफी अधिक हो सकता है, हालांकि इतनी अधिक वजन की घटना वैज्ञानिकों के लिए भी अध्ययन और कौतुहल का विषय बनी हुई है.

11 लाख की ‘स्वर्ण कपिला’ को बेचने से किया था इनकार

वीरेंद्र सिंह यादव वर्ष 2018 में बदायूं से सीओ पद से सेवानिवृत्त हुए थे. पुलिस सेवा के दौरान उन्होंने बरेली के कई प्रमुख थानों का प्रभार संभाला था. सेवानिवृत्ति के बाद से ही वे गौसेवा में समर्पित हैं और उनकी गौशाला में साहिवाल, गिर, थारपारकर और अमेरिकन ब्रीड की करीब 60 गायें हैं. उनकी गौशाला में 3 दुर्लभ ‘स्वर्ण कपिला’ गायें और देश की सबसे छोटी नस्ल की ‘पुंगनूर’ गाय भी मौजूद है.

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राजस्थान के एक व्यक्ति ने स्वर्ण कपिला गाय के लिए 11 लाख की पेशकश की थी, लेकिन उन्होंने इसे बेचने से इनकार कर दिया. गौशाला से दुग्ध उत्पादन द्वारा हर महीने होने वाली 1 लाख से अधिक की आय को पूरी तरह से गौवंश की सेवा और रखरखाव पर खर्च किया जाता है. फिलहाल, 74 किलो का ‘गुरु’ पूरे बरेली क्षेत्र में चर्चा का केंद्र बना हुआ है.

मनवीर सिंह

मनवीर सिंह

मैं मनवीर सिंह 6 साल से पत्रकारिता कर रहा हूं. 5 साल से टीवी9 भारतवर्ष न्यूज चैनल में सेवा दे रहा हूं. इससे पहले आजतक न्यूज चैनल के लिए भी काम किया है. क्राइम और राजनीति से जुड़ी खबरें पसंद हैं.

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