Sep 11, 2026 10:55 am ISTलाइव हिन्दुस्तान

मुख्य बातें
- Why Market Crash Today: शुक्रवार की बिकवाली के पीछे कई वजहें हैं, लेकिन इस समय बाजार को मुख्य रूप से कच्चे तेल की तेजी, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव परेशान कर रहे हैं
- अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर चिंता, IPO में पैसा जाने और रुपये में कमजोरी ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया है

सेंसेक्स सुबह के कारोबार में 740 अंक से ज्यादा टूटकर 74,160 के आसपास आ गया
घरेलू शेयर बाजार की शुरुआत आज भारी गिरावट के साथ हुई। सेंसेक्स सुबह के कारोबार में 740 अंक से ज्यादा टूटकर 74,160 के आसपास आ गया, जबकि NSE निफ्टी 50 करीब 250 अंक गिरकर 23,231 के स्तर तक पहुंच गया। केवल पांच मिनट में ही निवेशकों के करीब 6 लाख करोड़ डूब गए।
बाजार खुलने के शुरुआती पांच मिनट में ही BSE पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण करीब 484 लाख करोड़ से घटकर 478 लाख करोड़ रुपये रह गया। यानी बाजार की कुल वैल्यू में लगभग 6 लाख करोड़ रुपये की कमी आई।
बाजार में चौतरफा गिरावट: यह गिरावट सिर्फ बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी जोरदार बिकवाली देखने को मिली। BSE के मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स करीब 1.5 फीसदी तक टूट गए।
बाजार में इतनी बड़ी गिरावट क्यों आई?
1. कच्चा तेल 108 डॉलर के पार
भारतीय शेयर बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंता इस समय ब्रेंट क्रूड का 108 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंचना है। यमन स्थित हूती विद्रोहियों और सऊदी समर्थित बलों के बीच लड़ाई तेज होने से मिडिल ईस्ट से तेल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
अगर कच्चा तेल लंबे समय तक 100 डॉलर से ऊपर रहता है तो भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए मुश्किल बढ़ सकती है। इससे आयात बिल बढ़ने के साथ महंगाई और कंपनियों की लागत पर भी दबाव आ सकता है।
जियोजीत के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार के मुताबिक, मिडिल ईस्ट का संघर्ष बढ़ने के साथ बाजार के लिए मुश्किलें बढ़ रही हैं। उनके अनुसार अगर ब्रेंट की कीमत ऊंचे स्तर पर बनी रहती है या और बढ़ती है तो भारत की GDP ग्रोथ और कंपनियों की कमाई पर इसका असर पड़ सकता है।
2. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड 5% के करीब
दूसरी बड़ी चिंता अमेरिका की 10 साल की बॉन्ड यील्ड है। शुक्रवार को यह 4.98 फीसदी तक पहुंच गई। यील्ड बढ़ने का असर दुनियाभर के शेयर बाजारों पर पड़ता है। इसकी वजह यह है कि अमेरिकी बॉन्ड पर ज्यादा रिटर्न मिलने पर विदेशी निवेशकों के लिए शेयरों के मुकाबले बॉन्ड ज्यादा आकर्षक हो सकते हैं।
ऐसे में उभरते बाजारों से विदेशी पूंजी निकलने का खतरा बढ़ जाता है। विजयकुमार ने कहा कि 10 साल की अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का 5 फीसदी के करीब पहुंचना वैश्विक शेयर बाजारों के लिए महत्वपूर्ण स्तर है।
3. अमेरिका-ईरान संघर्ष से बढ़ी चिंता
मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष ने भी बाजार की धारणा खराब की है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने तथा हूती विद्रोहियों की गतिविधियां लाल सागर और उसके आसपास बढ़ने से बाजार को डर है कि तेल की सप्लाई पर असर सिर्फ एक समुद्री रास्ते तक सीमित नहीं रहेगा। अगर संघर्ष लंबा खिंचता है तो तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है। यही चिंता भारतीय शेयर बाजार के लिए भी बड़ी समस्या है।
4. IPO में जा रहा है बाजार का पैसा
भारतीय IPO बाजार में इस समय जबरदस्त गतिविधियां देखने को मिल रही हैं। कई इश्यू में भारी सब्सक्रिप्शन और लिस्टिंग गेन की उम्मीद ने निवेशकों को आकर्षित किया है।
विजयकुमार के मुताबिक, IPO बाजार में जा रहा पैसा सेकेंडरी मार्केट से भी निकल रहा है। इसका मतलब है कि कुछ निवेशक पहले से मौजूद शेयर बेचकर नए IPO में पैसा लगा रहे हैं। ऐसे समय में जब बाजार पहले से दबाव में हो, यह बिकवाली को और बढ़ा सकता है।
5. फेड की ब्याज दर और महंगाई का डर
अमेरिका में महंगाई से जुड़े आंकड़ों ने भी बाजार की चिंता बढ़ाई है। अगले सप्ताह अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक है और ब्याज दरों को लेकर बाजार की नजर उस पर बनी हुई है। अगस्त का PPI 0.4 फीसदी बढ़ा, जबकि जुलाई के आंकड़े को संशोधित कर 0.1 फीसदी की बढ़ोतरी दिखाई गई। महंगाई के दबाव के कारण अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बढ़ती है। इसका असर दुनिया के दूसरे शेयर बाजारों पर भी पड़ता है।
अन्य कारण
रुपये की कमजोरी ने भी बढ़ाई चिंता: शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 27 पैसे कमजोर होकर 95.79 रुपये प्रति डॉलर पर आ गया। रुपये में कमजोरी और कच्चे तेल की तेजी भारत के लिए दोहरा दबाव पैदा कर सकती है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है।
सिर्फ भारत नहीं, दुनिया भर के बाजार दबाव में: भारतीय बाजार की गिरावट अकेली नहीं है। गुरुवार को अमेरिकी बाजार भी कमजोर रहे।डॉऊ जोंस और एसएंडपी 500 करीब 0.6 फीसदी, जबकि नैस्डैक कंपोजिट करीब 0.65 फीसदी गिरा। MSCI का ग्लोबल इंडेक्स भी 0.66 फीसदी नीचे रहा। एशियाई बाजारों में गिरावट और ज्यादा रही। जापान का निक्केई, दक्षिण कोरिया का कोस्पी भी करीब 3 फीसदी तक टूटे।
लेखक के बारे में
Drigraj Madheshia
दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें