सिस्टम देख रहा, ठग आंखों के सामने पैसा निकाल रहे: रात 8 बजे बाद इनसे निपटना बड़ी चुनौती, बैंककर्मी नहीं होने के कारण परेशानी - Rajasthan News

Published on 17 सित॰ 2026

राजस्थान में शाम 8 बजे के बाद साइबर ठगी का पैसा होल्ड करवा पाना पुलिस के लिए चुनौती बन गया है। वजह है पुलिस मुख्यालय में संचालित हाइटेक 'राजस्थान साइबर क्राइम कंट्रोल सेंटर' (R4C) में रात के समय बैंक प्रतिनिधि का नहीं होना।

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हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत होते ही पुलिस यह तो तुरंत पता लगा लेती है कि पीड़ित का पैसा कब कहां- कौनसे अकाउंट में ट्रांसफर हो रहा है।

लेकिन रात 8 बजे के बाद बैंक प्रतिनिधि उपलब्ध नहीं होने के चलते पैसा होल्ड कर पाना चुनौती बना हुआ है। आखिर कैसे साइबर ठग चकमा देने में कामयाब हो रहे हैं? पढ़िए इस स्टोरी में...

30 लोगों की टीम, रात में बैंककर्मी नहीं

साइबर ठगी रोकने के लिए हेल्पलाइन नंबर 1930 का सेंट्रलाइज्ड आर 4 सी सेंटर पुलिस मुख्यालय में 6 महीने पहले शुरू हुआ था।

सेंटर में पुलिस के साइबर एक्सपर्ट और बैंक के करीब 30 लोगों की ड्यूटी है करीब 8-10 नेशनल और बड़े बैंकों के प्रतिनिधि अपने बैंकिंग आवर्स में ड्यूटी देते हैं।

जयपुर स्थित पुलिस मुख्यालय में संचालित यह राजस्थान साइबर क्राइम कंट्रोल सेंटर है।

जयपुर स्थित पुलिस मुख्यालय में संचालित यह राजस्थान साइबर क्राइम कंट्रोल सेंटर है।

एडीजी साइबर क्राइम वीके सिंह ने बताया कि 1930 पर ठगी की शिकायत आने के बाद उसकी जानकारी बैंक के सेंट्रल सिस्टम को भेजी जाती है।

इसके बाद बैंक रकम को फ्रीज करता है। इसके लिए 2 तरीके हैं। एक तो सिस्टम ऑटोमैटिक ही उन खातों को ट्रेस करता है रकम होल्ड कर देता है। इसे ऑटोमेटिक लियन कहते हैं।

लेकिन कई बार ऑटोमैटिक लियन नहीं लग पाता यानी ऑटोमेटिक तरीका काम नहीं करता, उस कंडीशन में पुलिस बैंक प्रतिनिधि की मदद से मैनुअली पैसा होल्ड करवाती है। इसे मैनुअल लियन कहते हैं।

दिन में तो बैंकों के प्रतिनिधि उपलब्ध रहते हैं, इसलिए काम में आसानी रहती है। लेकिन रात 8 बजे से सुबह 9 बजे तक और छुट्टी के दिनों में बैंक प्रतिनिधि उपलब्ध नहीं होने पर परेशानी आती है। हाल ही में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें पुलिस कुछ ही रकम होल्ड करवा पाई।

इन 2 मामलों से समझिए कैसे रात में पुलिस हो जाती है बेबस…

केस-1 : 2.5 करोड़ की डिजिटल अरेस्ट, 14 लाख ही होल्ड

जयपुर में 90 वर्षीय रिटायर्ड जिला जज को कथित तौर पर 15 दिन तक डिजिटल अरेस्ट में रखकर करीब 2.5 करोड़ रुपए की ठगी की गई। आरोपी खुद को CBI और RBI अधिकारी बताते रहे।

शिकायत होने के बाद पुलिस ने तुरंत पैसा होल्ड करना शुरू किया। करीब 14 लाख रुपए होल्ड कराने में सफल भी रही। लेकिन बाकी रकम करीब 2 करोड़ 35 लाख रुपए ठग USDT में कन्वर्ट कर चुके थे।

केस-2 : अजमेर की 82 वर्षीय महिला, 80 लाख 150 खातों में

अजमेर की 82 वर्षीय महिला से डिजिटल अरेस्ट के नाम पर करीब 80 लाख रुपए ठगे गए। जांच में सामने आया कि रकम एक खाते में पहुंचने के बाद तेजी से 150 से ज्यादा बैंक खातों में ट्रांसफर हुई।

कुछ पैसा USDT में कन्वर्ट हो चुका था। घटना के 6 घंटे बाद इसकी शिकायत 1930 हेल्पलाइन पर मिली। रकम फ्रीज कराने का प्रयास किया गया।

लेकिन तब तक रात हो चुकी थी। बैंक की ओर से समय पर लियन नहीं लगने के कारण रकम होल्ड नहीं हो सकी। ऐसे में महज कुछ लाख रुपए ही रिकवर हो पाए थे।

राजस्थान साइबर क्राइम कंट्रोल सेंटर में साइबर ठगी के हर मामले पर नजर रखी जाती है।

राजस्थान साइबर क्राइम कंट्रोल सेंटर में साइबर ठगी के हर मामले पर नजर रखी जाती है।

‘सिस्टम में पैसा जाते दिखता है’

एडीजी वीके सिंह ने बताया- साइबर ठगी होने के बाद ठग उस पैसों को एक के बाद एक 3 से 4 खातों में ट्रांसफर करते हैं। कई मामलों में पूरा पैसा क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर विदेश बैठे ठगों तक पहुंचा दिया जाता है।

सिस्टम यह पता लगा सकता है कि पैसा किस खाते में पहुंचा, वहां से किस खाते में गया और कहां से निकाला गया। लेकिन बैंकिंग स्तर पर रकम को तत्काल रोकने में परेशानी आती है।

एडीजी के मुताबिक, अगर बैंक की ओर से 24x7 कर्मचारी उपलब्ध करा दिए जाएं तो करीब 30% अतिरिक्त रकम को ठगों तक पहुंचने से रोका जा सकता है।

पुलिस चाहती है 24x7 बैंकिंग रिस्पॉन्स सिस्टम

एडीजी वीके सिंह ने बतयाा कि पुलिस चाहती है कि बैंक केवल कामकाजी घंटों में नहीं, बल्कि 24 घंटे सेंट्रलाइज्ड साइबर फ्रॉड रिस्पॉन्स सिस्टम (CFCFRMS) उपलब्ध कराएं। इससे आर4सी से बैंक को सूचना मिलते ही किसी शाखा के खुलने या स्थानीय बैंक कर्मचारी के ड्यूटी पर आने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। राजस्थान में पुलिस पहले भी बैंकों से साइबर मामलों में तेज कार्रवाई और छुट्टी के दिनों में सहायता की मांग कर चुकी है।