यूनिकॉर्न कंपनियों में भारतीय मूल के संस्थापकों के पास 909 अरब डॉलर की हिस्सेदारी: रिपोर्ट

Published on 21 सित॰ 2026

नयी दिल्ली, 21 सितंबर (भाषा) भारतीय मूल के और देश में पले-बढ़े संस्थापकों की यूनिकॉर्न कंपनियों में हिस्सेदारी का अनुमानित मूल्य करीब 909 अरब डॉलर है। प्रोसस और डीलरूम के नए ‘इंडियन डायस्पोरा सूचकांक’ में यह जानकारी दी गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के बाहर स्थित यूनिकॉर्न कंपनियों में भारतीय संस्थापकों की हिस्सेदारी का अनुमानित मूल्य 560 अरब डॉलर है। वहीं, भारत में स्थित 102 यूनिकॉर्न कंपनियों में संस्थापकों की हिस्सेदारी का मूल्य करीब 349 अरब डॉलर है।

एक अरब डॉलर से अधिक मूल्यांकन वाली स्टार्टअप कंपनियों को यूनिकॉर्न कहा जाता है।

इस सूचकांक में विदेशों में स्थित ऐसी 205 यूनिकॉर्न कंपनियों को शामिल किया गया है, जिनमें कम-से-कम एक संस्थापक ऐसा है जो भारत में पला-बढ़ा है।

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रिपोर्ट के मुताबिक, कुल 243 अरब डॉलर मूल्यांकन वाली 70 यूनिकॉर्न कंपनियां पूरी तरह भारतीय संस्थापकों ने खड़ी की हैं। इनमें जेडस्केलर के जय चौधरी, रुब्रिक के अरविंद जैन, अरविंद निथ्रकश्यप, बिपुल सिन्हा और सोहम मजूमदार, न्यूटैनिक्स के अजीत सिंह, धीरज पांडेय और मोहित एरन तथा स्किल्ड के दीपक पाठक और अभिनव गुप्ता शामिल हैं।

इसके अलावा, 135 यूनिकॉर्न कंपनियों में भारतीय मूल के संस्थापक प्रमुख टीम का हिस्सा हैं। इनमें पालो ऑल्टो, ब्लूम एनर्जी, एस्टेरा लैब्स और पर्प्लेक्सिटी शामिल हैं। इन कंपनियों में संस्थापकों की हिस्सेदारी का अनुमानित मूल्य 317 अरब डॉलर है।

रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘इन कंपनियों का कुल मूल्य संस्थापकों की हिस्सेदारी के आधार पर करीब 560 अरब डॉलर है।’’

सूचकांक के मुताबिक, भारतीय प्रवासी संस्थापकों वाली 91 प्रतिशत यूनिकॉर्न कंपनियां अमेरिका में स्थित हैं।

रिपोर्ट में कहा गया कि भारत में स्थित 102 यूनिकॉर्न में संस्थापकों की हिस्सेदारी का अनुमानित मूल्य करीब 349 अरब डॉलर है। इनमें फ्लिपकार्ट 36 अरब डॉलर, जोमैटो 30 अरब डॉलर और ग्रो 16 अरब डॉलर के साथ प्रमुख हैं।

प्रोसस इंडिया के प्रमुख निवेशक सौरव जैन ने कहा कि भारतीय संस्थापकों में प्रौद्योगिकी, प्रतिभा और स्थानीय समझ को ऐसे कारोबार में बदलने की क्षमता है, जो लोगों के रहने और काम करने के तरीके को बदल सकते हैं।

जैन ने कहा, “इंडियन डायस्पोरा सूचकांक उस चीज को मापता है, जिसे हमने भारत में खुद देखा और महसूस किया है। यहां असाधारण प्रतिभाओं की बड़ी संख्या है और बड़े पैमाने पर कारोबार खड़ा करने की महत्वाकांक्षा भी है। इनमें से कई प्रतिभाएं देश की कुछ सबसे जटिल और महत्वपूर्ण समस्याओं का समाधान करने पर काम कर रही हैं। यही वजह है कि हम करीब दो दशक से भारत में निवेश कर रहे हैं।”

रिपोर्ट के मुताबिक, जन्मस्थान के आधार पर किए गए एक अलग विश्लेषण में शामिल कंपनियों में 62 प्रतिशत अमेरिका में स्थित हैं। इस विश्लेषण में 323 कंपनियों को शामिल किया गया है। इनमें से 178 कंपनियां अमेरिका में शुरू हुईं जबकि 22 कंपनियां बाद में अमेरिका स्थानांतरित हो गईं। इसमें बचपन में भारत से बाहर चले गए संस्थापकों के साथ भारत में स्थित कंपनियों को भी शामिल किया गया है।

भाषा प्रेम प्रेम अजय

अजय