अमेरिका से 91% तक सस्ता इलाज, बाहर से 5 लाख मरीज आए... आखिर मेडिकल टूरिज्म का हब कैसे बन रहा है भारत?

Published on 27 जुल॰ 2026

अमेरिका से 91% तक सस्ता इलाज, बाहर से 5 लाख मरीज आए... आखिर मेडिकल टूरिज्म का हब कैसे बन रहा है भारत?

विदेश से इलाज कराने भारत आ रहे हैं लोग

भारत आज दुनिया के सबसे तेजी से उभरते मेडिकल टूरिज्म डेस्टिनेशन के तौर पर अपनी पहचान बना चुका है. वजह सीधी है अमेरिका और ब्रिटेन जैसे विकसित देशों के मुकाबले यहां इलाज 80 से 90 फीसदी तक सस्ता है, जबकि इलाज की क्वालिटी और डॉक्टरों की एक्सपर्टीज किसी से कम नहीं. यही वजह है कि 2025 में करीब 5 लाख विदेशी मरीज इलाज कराने भारत पहुंचे और 2030 तक यह आंकड़ा बाजार के लिहाज से ₹1.56 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है. आंकड़े इस बदलाव की कहानी खुद बयां करते हैं. 2009 में जहां सिर्फ 1.12 लाख विदेशी मरीज भारत आए थे, वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 5.07 लाख होने का अनुमान है. यानी 16 साल में विदेशी मरीजों की तादाद करीब 4.5 गुना बढ़ चुकी है. कार्डियक सर्जरी, ऑर्थोपेडिक ट्रीटमेंट, ऑन्कोलॉजी यानी कैंसर का इलाज, न्यूरोलॉजी और ऑर्गन ट्रांसप्लांट जैसी जटिल और महंगी मानी जाने वाली मेडिकल सर्विसेज के लिए भारत अब दुनिया के प्रमुख केंद्रों में गिना जाने लगा है.

इस बढ़ते भरोसे का असर बाजार के आकार पर भी साफ दिख रहा है. 2025 में भारत का मेडिकल टूरिज्म बाजार करीब 84 हजार करोड़ रुपये का आंका गया है, जिसके 2030 तक बढ़कर 1.56 लाख करोड़ रुपये होने की उम्मीद है. ग्लोबल स्तर पर देखें तो दुनिया भर का मेडिकल टूरिज्म बाजार 2022 में जहां करीब 11.16 लाख करोड़ रुपये का था. वहीं, 2030 तक यह 27.62 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है. यानी इस पूरे ग्लोबल एक्सपैंशन में भारत की हिस्सेदारी भी लगातार मजबूत हो रही है.

Medical Tourism

अमेरिका के मुकाबले इतना सस्ता है इलाज

भारत में इलाज सस्ता होने का दावा सिर्फ बातों में नहीं, आंकड़ों में भी साबित होता है. ग्रैंड व्यू रिसर्च की 2026 की मेडिकल टूरिज्म मार्केट रिपोर्ट के मुताबिक, घुटना रिप्लेसमेंट सर्जरी भारत में जहां औसतन 6.76 लाख रुपये में हो जाती है. वहीं अमेरिका में इसी इलाज पर 77.3 लाख रुपये तक खर्च आता है यानी करीब 91 फीसदी की बचत. हार्ट बाईपास सर्जरी भारत में 7.7 लाख रुपये में संभव है, जबकि अमेरिका में यह 38.6 लाख रुपये तक पड़ती है, यानी 88 फीसदी सस्ता. हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी में तो बचत का आंकड़ा 95 फीसदी तक जाता है. भारत में यह महज 48 हजार रुपये में हो जाती है, जबकि अमेरिका में इसकी कीमत 5.8 लाख रुपये तक होती है. स्पाइन सर्जरी के मामले में भी भारत में 2.9 लाख रुपये और अमेरिका में 14.5 लाख रुपये खर्च होते हैं, यानी भारत में इसका इलाज कराने पर 87 फीसदी की बचत विदेशियों को होगी.

172 देशों के लिए ई-मेडिकल वीजा

सिर्फ सस्ता इलाज ही नहीं, भारत ने विदेशी मरीजों के लिए वीजा प्रोसेस को भी बेहद आसान बना दिया है. सरकार ने 172 देशों के नागरिकों के लिए ई-मेडिकल वीजा की सुविधा शुरू की है, जिसकी फीस महज 1,000 से 2,000 रुपये के बीच है. यह वीजा 16 से 60 दिन तक वैलिड रहता है और जरूरत पड़ने पर महज 3,000 रुपये का अतिरिक्त शुल्क देकर इसे एक्सटेंड भी कराया जा सकता है. इसके अलावा पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धतियों आयुर्वेद, योग, यूनानी और होम्योपैथी से इलाज कराने आने वाले विदेशी नागरिकों के लिए सरकार ने अलग से आयुष वीजा कैटेगरी भी शुरू की है. इस पहल के चलते हर महीने भारत आने वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है और भारत खुद को सिर्फ आधुनिक चिकित्सा ही नहीं, बल्कि ट्रेडिशनल हेल्थ टूरिज्म के केंद्र के रूप में भी स्थापित कर रहा है.

Cost Of Medical In India

69 हजार अस्पताल, निजी सेक्टर के पास 66% बेड

भारत के मजबूत हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर ने भी इस बदलाव में बड़ी भूमिका निभाई है. देश में इस वक्त कुल 69,364 अस्पताल हैं, जिनमें से 25,778 अस्पताल निजी क्षेत्र के हैं. कुल मिलाकर देश में करीब 12 लाख अस्पताल बेड मौजूद हैं, जिनमें से 1.299 लाख बेड सिर्फ निजी अस्पतालों में हैं. निजी अस्पताल बेहतर सुविधाएं, एडवांस टेक्नोलॉजी और कम वेटिंग टाइम में मरीजों को इलाज मुहैया कराते हैं, जिसकी वजह से विदेशी मरीजों के बीच यह पहली पसंद बनते जा रहे हैं.

लंबी वेटिंग से बचने वाले मरीजों की नई पसंद

ब्रिटेन जैसे देशों में सरकारी स्वास्थ्य सेवा के तहत मरीजों को कई बार जटिल सर्जरी के लिए महीनों इंतजार करना पड़ता है. ऐसे में भारत में मौजूद स्पेशलिस्ट डॉक्टर, आधुनिक अस्पताल और बिना ज्यादा वेटिंग के मिलने वाला इलाज मरीजों को तेजी से आकर्षित कर रहा है. कम लागत और तुरंत इलाज का यह मेल भारत को दुनिया भर के मरीजों के लिए एक भरोसेमंद ऑप्शन बना रहा है.

लॉन्जेविटी मेडिसिन का भी नया अड्डा बनता भारत

इलाज के परंपरागत क्षेत्रों के अलावा भारत अब उम्र बढ़ाने और स्वस्थ बुढ़ापे से जुड़े उपचार यानी लॉन्जेविटी मेडिसिन का भी नया केंद्र बनता जा रहा है. इसमें जेनेटिक टेस्टिंग, एंटी-एजिंग थेरेपी और स्टेम सेल ट्रीटमेंट जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल होता है. विदेशी मरीजों को यहां अपेक्षाकृत कम लागत में एडवांस ट्रीटमेंट मिल पाने की वजह से इस क्षेत्र की डिमांड भी लगातार बढ़ रही है. कुल मिलाकर, सस्ती चिकित्सा सेवाएं, आसान वीजा नीति, मजबूत हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर और स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की उपलब्धता इन सभी कारकों ने मिलकर भारत को दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते मेडिकल टूरिज्म हब में बदल दिया है. आने वाले सालों में यह सेक्टर न सिर्फ भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा, बल्कि देश की ग्लोबल हेल्थकेयर इमेज को भी और मजबूत करेगा.

देवेश कुमार पांडेय

देवेश कुमार पांडेय

देवेश कुमार पांडेय TV9 Hindi में बतौर सब-एडिटर काम कर रहे हैं. उत्तर प्रदेश के अमेठी के रहने वाले देवेश को राजनीति के अलावा इतिहास, साहित्य में दिलचस्पी है.  साल 2024 में भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) के अमरावती कैंपस से पत्रकारिता की पढ़ाई की है. देवेश को घूमना, लिखना, पढ़ना और पॉडकास्ट सुनना पसंद है.

Read More

google button