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97KM बिलासपुर-पेंड्रा रोड पर कीचड़ और दलदल:बारिश में बदहाल 510 करोड़ की निर्माणाधीन सड़क, पुराना-पुल टूटने के बाद डायवर्सन पाइंट पर लगा 3KM जाम
बिलासपुर15 मिनट पहले
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छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में 97 किलोमीटर लंबा नेशनल हाईवे लोगों के लिए परेशानी बन गया है। रतनपुर से पेंड्रा-केंवची तक करीब 510 करोड़ रुपए की लागत से सड़क बनाई जा रही है। पहली बारिश में ही कई जगह सड़क धंस गई और दरारें आ गईं।
अब तेज बारिश के बाद सड़क की हालत और खराब हो गई है। कई जगह नई बनी सड़क उखड़ गई है। वहीं, निर्माण वाले हिस्सों के डायवर्सन रास्ते कीचड़ और दलदल में बदल गए हैं। इसका असर बिलासपुर-पेंड्रा आने-जाने वाले लोगों पर पड़ रहा है।
सामान्य दिनों में करीब 3 घंटे में पूरा होने वाला सफर अब 6 से 8 घंटे तक लग रहा है। 2-3 किलोमीटर तक वाहन जाम में फंस रहे हैं। PWD का कहना है कि जहां सड़क खराब हुई है, वहां मशीनों से कटिंग कर रास्ता साफ कराया जा रहा है। फंसे वाहनों को तुरंत निकाला जा रहा है।
बता दें कि 2 अगस्त (रविवार) को इसी नेशनल हाईवे पर 35 साल पुराना पुल दो हिस्सों में टूट गया था। इस दौरान पुल से गुजर रही यात्री बस टूटे स्लैब के किनारे अटक गई और नदी में गिरने से बाल-बाल बच गई थी। इस घटना के बाद से हाईवे पर आवागमन बंद कर रूट डायवर्ट किए गए हैं।
देखिए पहले ये तस्वीरें-

निर्माण वाले हिस्सों के डायवर्सन रास्ते कीचड़ और दलदल में बदल गए हैं।

बिलासपुर-पेंड्रा आने-जाने वाले लोगों पर पड़ रहा है।

कई किलोमीटर तक वाहन जाम में फंस रहे हैं।
बांसाझाल में पुल टूटने के बाद बिगड़े हालात
जानकारी के मुताबिक कुछ दिन पहले भारी बारिश के दबाव में बांसाझाल का पुराना पुल बीच से डैमेज होकर टूट गया था। इस दौरान यात्री बस भी पुल पर फंस गई थी। फिलहाल पुल पर राख आदि डालकर आवाजाही जारी रखने की कोशिश की जा रही है, लेकिन लगातार बारिश के कारण स्थिति और खराब हो गई है।
यहां बनाए गए डायवर्सन पाइंट पर बारिश के कारण दलदल हो गया है। इससे वाहन लगातार फंस रहे हैं और सड़क पर लंबा जाम लग रहा है। लोगों को आने-जाने में काफी परेशानी हो रही है।

पहली बारिश में ही लंबी-लंबी दरारें पड़ गई है।
इन जगहों पर फंस रहे वाहन, घंटों लग रहा जाम
केंदा घाट, टिंगीपुर और बांसाझाल के आसपास हालात ज्यादा खराब बताए जा रहे हैं। निर्माणाधीन पुल-पुलियों के कारण बनाए गए वैकल्पिक रास्तों पर बारिश का पानी बहने से कई जगह आवागमन मुश्किल हो गया है।
कहीं सड़क पर घुटनों तक कीचड़ जमा है तो कहीं तेज बहाव के कारण डायवर्सन का हिस्सा बह गया है। सामने आए वीडियो और तस्वीरों में रास्ते की हालत ऐसी दिखाई दे रही है कि वाहनों का निकलना तो दूर, पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। इसके चलते कई जगह वाहन फंस रहे हैं और घंटों लंबा जाम लग रहा है।
एक वाहन फंसा तो घंटों थम जाता है पूरा रास्ता
इस रास्ते से रोजाना 2 हजार से ज्यादा भारी वाहनों के साथ यात्री बसों और छोटे वाहनों की आवाजाही होती है। संकरे और कीचड़युक्त डायवर्सन पर एक भी भारी वाहन फंसने से दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतार लग जाती है। कई बार जाम कई किलोमीटर तक पहुंच जाता है।
बारिश के बीच यात्रियों को घंटों वाहनों में बैठकर इंतजार करना पड़ता है। भारी वाहनों की लगातार आवाजाही से कच्चे हिस्सों पर दबाव बढ़ रहा है। गड्ढों, पत्थरों और कीचड़ के कारण वाहनों के टायर, सस्पेंशन और अन्य हिस्सों के क्षतिग्रस्त होने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।

कहीं सड़क किनारे से बह गई है। कहीं धंस गई है।
मरीजों के लिए सबसे बड़ी चिंता
पेंड्रा-मरवाही क्षेत्र के लोगों के लिए बिलासपुर इलाज का प्रमुख केंद्र है। गंभीर मरीजों और गर्भवती महिलाओं को एंबुलेंस से बिलासपुर लाने के दौरान जाम और खराब सड़क बड़ी परेशानी बन रही है। सामान्य स्थिति में कुछ घंटों में तय होने वाली दूरी बारिश के कारण कई घंटे में पूरी हो रही है। ऐसे में आपातकालीन मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना चुनौती बन गया है।
जाम से बचने के लिए कई एंबुलेंस बेलगहना या कटघोरा मार्ग से आ-जा रही हैं। इन रास्तों से दूरी कई किलोमीटर बढ़ जाती है, जिससे मरीजों को अस्पताल पहुंचने में ज्यादा समय लग रहा है। वहीं, जिन लोगों को वैकल्पिक रास्तों की जानकारी नहीं है, वे इसी मार्ग से गुजरते हुए जाम में फंस रहे हैं।
हर कोई हो रहा प्रभावित
लंबे जाम का असर यात्री बसों पर भी पड़ रहा है। जाम के कारण बसें निर्धारित समय पर नहीं पहुंच पा रही हैं और यात्रियों को बीच रास्ते घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। रोजाना इस मार्ग से आने-जाने वाले नौकरीपेशा लोग, छात्र, व्यापारी और ग्रामीण सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।

रात में इस मार्ग पर सफर करना खतरे से कम नहीं
इसके अलावा केंदा घाट और अन्य संवेदनशील हिस्सों में पहाड़ी कटिंग, संकरी सड़क और कीचड़ के कारण भारी वाहनों के पलटने का खतरा बना रहता है। कई जगह सड़क किनारे सुरक्षा व्यवस्था अधूरी है, जिससे रात में वाहन चालकों की परेशानी बढ़ जाती है।
बारिश, कोहरे और अंधेरे के कारण गड्ढे और सड़क के क्षतिग्रस्त हिस्से साफ दिखाई नहीं देते। ऐसे में दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।

पुलिस और PWD व्यवस्था संभालने में जुटे
बिगड़ती स्थिति को देखते हुए बेलगहना और केंदा पुलिस की टीमें लगातार मौके पर तैनात हैं। पुलिसकर्मी जाम में फंसे वाहनों को सुरक्षित निकालने और यातायात सुचारू कराने में जुटे हैं।
वहीं, पीडब्ल्यूडी के नेशनल हाईवे संभाग के अधिकारी और कर्मचारी मशीनों के साथ मौके पर मौजूद हैं। एनएच विंग के ईई आरके खांबरा भी मौके पर पहुंचकर व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे हैं।
लगातार हो रही तेज बारिश के कारण निर्माणाधीन हिस्सों में पानी भरने और डायवर्शन प्रभावित होने की स्थिति बन रही है। वहीं, भारी वाहनों की लगातार आवाजाही से सड़क पर दबाव बढ़ रहा है।
EE बोले- सड़क चालू रखने लगातार हो रहा काम
पीडब्ल्यूडी एनएच संभाग के EE आरके खांबरा ने बताया कि मार्ग को चालू रखने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। मशीनों की मदद से पहाड़ी कटिंग कर रास्ता साफ कराया जा रहा है। जहां भी वाहन फंस रहे हैं, वहां उन्हें तत्काल निकालने की व्यवस्था की जा रही है।
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छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में रतनपुर से पेंड्रा तक 97 किमी की सड़क बनाई जा रही है। यह नेशनल हाईवे-45 परियोजना का हिस्सा है। 510 करोड़ की लागत से बन रही इस सड़क ने पहली ही बारिश में जवाब देना शुरू कर दिया है। कहीं लंबी-लंबी दरारें हैं, कहीं सड़क धंस रही है, तो कहीं किनारे टूटने लगे हैं। डामर की परत में 5 से 10 फीट लंबी दरारें दिखाई दे रही हैं। पढ़ें पूरी खबर…
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