Adani Airline: अब आसमान में भी होगी अडानी की उड़ान? अपनी एयरलाइन कंपनी लाने की तैयारी में ग्रुप

Published on 23 जुल॰ 2026

अडानी ग्रुप अपनी एयरलाइन शुरू कर सकता है। इसके लिए ग्रुप ने सरकार से एक नियम बदलने की मांग की है, जो एयरपोर्ट ऑपरेटरों को किसी एयरलाइन में 10% से ज़्यादा हिस्सेदारी रखने से रोकता है। सरकार बाज़ार में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए इस पर विचार कर रही है।

अडानी ग्रुप अब एविएशन सेक्टर में एक और बड़ा दांव खेलने की तैयारी में है। ग्रुप अपनी खुद की एयरलाइन कंपनी लॉन्च कर सकता है। अंतरराष्ट्रीय न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, इस प्लान को हकीकत में बदलने के लिए अडानी ग्रुप ने केंद्र सरकार से एक नियम बदलने की मांग की है। यह नियम दिल्ली और मुंबई जैसे एयरपोर्ट्स चलाने वाली कंपनियों को किसी भी एयरलाइन में 10% से ज़्यादा हिस्सेदारी रखने से रोकता है।

दरअसल, देश के घरेलू हवाई सफर में 90% हिस्सा इंडिगो और एयर इंडिया जैसी कंपनियों का है। सरकार इस एकाधिकार को तोड़कर बाज़ार में कॉम्पिटिशन बढ़ाना चाहती है। कुछ दिन पहले ऐसी खबरें आई थीं कि सरकार, अडानी ग्रुप और GMR जैसे एयरपोर्ट ऑपरेटर्स को अपनी एयरलाइन शुरू करने की इजाज़त देने पर विचार कर रही है। अब अडानी के इस नए कदम से इन अटकलों को और हवा मिल गई है।

अडानी जिस नियम में ढील चाहते हैं, वो 2006 में दिल्ली और मुंबई एयरपोर्ट के निजीकरण के वक्त बनाया गया था। इसके तहत, देश के इन दो सबसे व्यस्त एयरपोर्ट्स को चलाने वाली कंपनियां किसी भी एयरलाइन में 10% से ज़्यादा निवेश नहीं कर सकतीं। खबर है कि सिविल एविएशन मिनिस्ट्री ने इस मामले पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कानूनी सलाह मांगी है कि क्या इस नियम को पिछली तारीख से बदला जा सकता है। नियम बदलने के लिए आखिर में केंद्रीय कैबिनेट की मंज़ूरी ज़रूरी होगी।

अडानी की दिलचस्पी क्यों?

पिछले कुछ सालों में अडानी ग्रुप एविएशन सेक्टर में एक बड़ा प्लेयर बनकर उभरा है। ग्रुप के पास अभी 8 एयरपोर्ट्स का मैनेजमेंट है। मुंबई एयरपोर्ट में तो उनकी 74% हिस्सेदारी है। इसके अलावा, ग्रुप पायलट ट्रेनिंग, प्लेन की मरम्मत और ग्राउंड हैंडलिंग जैसे बिजनेस में भी एक्टिव है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस नए कदम के पीछे ब्राज़ील की एयरक्राफ्ट बनाने वाली कंपनी 'एम्ब्रेयर' (Embraer) के साथ अडानी का एक प्लान भी है। असल में, मौजूदा एयरलाइंस एम्ब्रेयर के प्लेन खरीदने में ज़्यादा दिलचस्पी नहीं दिखा रहीं। ऐसे में अडानी को लगता है कि अगर उनकी अपनी एयरलाइन होगी, तो यह मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट भी कारोबारी तौर पर कामयाब हो सकता है।

क्या केंद्र देगा हरी झंडी?

इंडिगो और एयर इंडिया के दबदबे वाले घरेलू एविएशन मार्केट में केंद्र सरकार भी ज़्यादा कॉम्पिटिशन चाहती है। सरकारी सूत्रों का मानना है कि एक आर्थिक रूप से मज़बूत नई एयरलाइन के आने से बाज़ार में बेहतर मुकाबला होगा, जिसका फायदा यात्रियों को मिल सकता है।

कंपनियों ने जताया विरोध

हालांकि, इस प्रस्ताव के खिलाफ मौजूदा एयरलाइन कंपनियां खड़ी हो सकती हैं। उन्हें डर है कि अगर एयरपोर्ट चलाने वाली कंपनी ही अपनी एयरलाइन ले आएगी, तो पक्षपात हो सकता है। उनकी चिंता यह है कि एयरपोर्ट ऑपरेटर अपनी कंपनी को प्लेन उड़ाने और लैंड करने के लिए प्राइम टाइम स्लॉट दे सकता है। किसी भी एयरलाइन के लिए व्यस्त एयरपोर्ट्स पर ये स्लॉट बहुत कीमती होते हैं।