हेलिकॉप्टर अब बनेंगे ड्रोन हंटर, AI रडार और माइक्रो-मिसाइल से होंगे लैस; ये है वायुसेना का प्लान

Published on 31 जुल॰ 2026

हेलिकॉप्टर अब बनेंगे ड्रोन हंटर, AI रडार और माइक्रो-मिसाइल से होंगे लैस; ये है वायुसेना का प्लान

एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह

ड्रोन और लोइटरिंग म्यूनिशन से बढ़ते खतरे के बीच भारतीय वायुसेना ने अपने हेलिकॉप्टरों को भी एयरबोर्न काउंटर-ड्रोन प्लेटफॉर्म के तौर पर इस्तेमाल करने की तैयारी शुरू कर दी है. सूत्रों के मुताबिक, इसके तहत हेलिकॉप्टरों पर AI आधारित रडार, माइक्रो-मिसाइल, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और जैमिंग पॉड्स लगाने की योजना पर काम किया जा रहा है. IAF का मकसद ऐसे हेलिकॉप्टर तैयार करना है जो बेहद कम ऊंचाई पर उड़ने वाले छोटे ड्रोन और लोइटरिंग म्यूनिशन को हवा में ही detect और destroy कर सकें.

इसके लिए हेलिकॉप्टरों पर AI-powered रडार लगाए जाने की योजना है. ये रडार छोटे और कम रडार क्रॉस सेक्शन वाले ड्रोन को पहचानने और ट्रैक करने में मदद करेंगे. इसके साथ ही हेलिकॉप्टरों को माइक्रो-मिसाइल और 20mm फ्रंट गन से लैस करने की जरूरत बताई गई है. इन हथियारों का इस्तेमाल धीमी गति से उड़ने वाले ड्रोन और दूसरे छोटे हवाई खतरों को मार गिराने के लिए किया जा सकेगा.

जैमर से ड्रोन का कनेक्शन होगा ब्लॉक

सिर्फ मिसाइल और गन ही नहीं, बल्कि हेलिकॉप्टरों पर इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम भी लगाए जाएंगे. इनमें हल्के RF और GPS जैमर शामिल होंगे, जो दुश्मन के ड्रोन के कम्युनिकेशन और नेविगेशन को बाधित कर सकेंगे.

इन सिस्टम को Electro-Optical और Infrared सेंसर पॉड्स के साथ जोड़ने की योजना है. इससे दिन और रात दोनों समय छोटे ड्रोन की पहचान और निगरानी की क्षमता बढ़ेगी.

25 मीटर तक के एयर-बर्स्ट की क्षमता

माइक्रो-मिसाइलों के लिए ऐसे वॉरहेड की जरूरत बताई गई है, जिनमें प्रॉक्सिमिटी फ्यूज या टाइम-डिले फ्यूज का इस्तेमाल हो. इनका मकसद लक्ष्य के बेहद करीब हवा में विस्फोट कर ड्रोन को नष्ट करना है. करीब 25 मीटर के मिड-एयर बर्स्ट रेडियस में फ्रैगमेंटेशन प्रभाव पैदा करने वाले वॉरहेड की जरूरत पर जोर दिया गया है.

ऑपरेशन सिंदूर से मिली सीख

ड्रोन के खिलाफ इस नई रणनीति के पीछे हाल के युद्धों से मिले अनुभव अहम हैं. ऑपरेशन सिंदूर के साथ-साथ पश्चिम एशिया और यूक्रेन के युद्ध ने दिखाया है कि छोटे ड्रोन, कामिकाजे ड्रोन और लोइटरिंग म्यूनिशन पारंपरिक एयर डिफेंस के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं.

खास तौर पर पहाड़ी इलाकों में Terrain Masking और Line-of-Sight की समस्या के कारण जमीन से तैनात एयर डिफेंस सिस्टम हर खतरे को आसानी से detect नहीं कर पाते. ऐसे में हवा में मौजूद हेलिकॉप्टर ज्यादा तेजी से उस इलाके तक पहुंचकर ड्रोन को intercept कर सकते हैं.

Apache और Prachand को मिल सकती है नई भूमिका

भारतीय वायुसेना के पास AH-64 Apache जैसे अटैक हेलिकॉप्टर और स्वदेशी LCH Prachand मौजूद हैं. अब भविष्य में ऐसे प्लेटफॉर्म को पारंपरिक मिशन के साथ-साथ Counter-UAS यानी ड्रोन रोधी ऑपरेशन में इस्तेमाल करने की दिशा में देखा जा रहा है.

इसका मतलब ये कि हेलिकॉप्टर सिर्फ जमीन पर दुश्मन के ठिकानों को निशाना बनाने वाले प्लेटफॉर्म नहीं होंगे, बल्कि जरूरत पड़ने पर आसमान में उड़ रहे ड्रोन के खिलाफ भी कार्रवाई कर सकेंगे.

जमीन और हवा से बनेगा मल्टी-लेयर काउंटर-ड्रोन नेटवर्क

IAF पहले से ही एयरबेस और संवेदनशील ठिकानों की सुरक्षा के लिए मल्टी-लेयर काउंटर-ड्रोन सिस्टम पर जोर दे रही है. इसमें रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, डायरेक्टेड-एनर्जी वेपन और मिसाइल आधारित सिस्टम शामिल हैं.

हेलिकॉप्टर आधारित काउंटर-UAS सिस्टम इस नेटवर्क की एक अतिरिक्त मोबाइल लेयर बन सकता है. खासकर उन इलाकों में जहां जमीन से तैनात सिस्टम के लिए ड्रोन को detect या engage करना मुश्किल हो.

स्वदेशी कंपनियों के लिए बड़ा मौका

इस पूरी योजना का एक बड़ा लक्ष्य आत्मनिर्भरता भी है. वायुसेना घरेलू डिफेंस कंपनियों से AI आधारित एवियोनिक्स, छोटे मिसाइल सिस्टम, रडार और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर तकनीक विकसित करने की दिशा में समाधान चाहती है. यानी आने वाले समय में भारत में ऐसे स्वदेशी सिस्टम विकसित करने पर जोर होगा, जो छोटे ड्रोन से लेकर लोइटरिंग म्यूनिशन और ड्रोन स्वॉर्म तक से निपटने में सक्षम हों.

साफ है कि बदलते युद्ध के मैदान में ड्रोन का खतरा तेजी से बढ़ रहा है और भारतीय वायुसेना अब इसका जवाब सिर्फ जमीन से नहीं, बल्कि आसमान से भी देने की तैयारी कर रही है.

अंजू निर्वाण

अंजू निर्वाण

अंजू निर्वाण भारत की लीडिंग डिफेंस पत्रकारों में से एक हैं, जो राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक मामलों पर अपनी सटीक रिपोर्टिंग और गहन विश्लेषण के लिए जानी जाती हैं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में दो दशकों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्होंने इंडिया टीवी, न्यूज़ 24, ज़ी न्यूज़, इंडिया न्यूज़, ईटीवी और रिपब्लिक भारत जैसे प्रमुख समाचार चैनलों में रिपोर्टर, एंकर, प्रोड्यूसर और खोजी पत्रकार के रूप में काम किया है. सितंबर 2022 से अंजू निर्वाण टीवी9 भारतवर्ष में एसोसिएट एडिटर के रूप में कार्यरत हैं, जहां वह रक्षा मामलों की कवरेज का नेतृत्व करती हैं, भारत के सैन्य आधुनिकीकरण, नौसेना की प्रगति, मिसाइल प्रणालियों और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर कवरेज करती हैं. अंजू निर्वाण ने युद्ध क्षेत्रों से रिपोर्टिंग की है, अग्रिम पंक्ति के सैन्य अभ्यासों को कवर किया है और शीर्ष रक्षा अधिकारियों के इंटरव्यू किए हैं.

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