पूर्व मेयर समीर कुमार हत्याकांड: सभी आरोपी बरी, AK-47 से ड्राइवर की भी हुई थी हत्या - Haribhoomi

Published on 6 अग॰ 2026

मुजफ्फरपुर के पूर्व मेयर समीर कुमार हत्याकांड में कोर्ट ने पहले सेशन-ट्रायल के सभी छह आरोपियों को बरी किया, अभियोजन पक्ष कोर्ट में साबित नहीं कर सका आरोप।

Muzaffarpur ex-mayor Samir Kumar murder case

मुजफ्फरपुर के पूर्व मेयर समीर कुमार हत्याकांड में कोर्ट ने पहले सेशन-ट्रायल के सभी छह आरोपियों को बरी किया।

  • Published: 06 Aug 2026, 06:05 PM IST
  • Last Updated: 06 Aug 2026, 06:05 PM IST

Muzaffarpur ex-mayor murder case: मुजफ्फरपुर के बहुचर्चित पूर्व मेयर समीर कुमार हत्याकांड में अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। समीर कुमार और उनके कार चालक रोहित कुमार की एके-47 से गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस चर्चित मामले के पहले सेशन-ट्रायल में शामिल सभी आरोपियों को गुरुवार को प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्वेता कुमारी सिंह की अदालत ने बरी कर दिया।

बरी किए गए आरोपियों में कुमार रणंजय ओंकार, मृत्युंजय कुमार उर्फ पिंटू सिंह, श्यामनंदन मिश्र, सुशील छापड़िया, सुजीत कुमार और नवीन कुमार शामिल हैं। अदालत ने इस मामले में अभियोजन पक्ष को पूरी तरह नाकाम बताते हुए सभी आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया।

इस हत्याकांड से जुड़े और भी कई मर्डर
इस मामले में आरोपी बनाए गए प्रॉपर्टी डीलर आशुतोष शाही, जो समीर कुमार के करीबी थे, की भी बाद में हत्या कर दी गई थी। आशुतोष को उनके तीन बॉडीगार्ड्स के साथ विदेशी हथियार से भून दिया गया था। वहीं समीर कुमार पर एके-47 से फायरिंग करने के आरोपी गोविंद कुमार की भी हत्या हो चुकी है। बदमाशों ने 31 मई 2026 की रात उसके घर में घुसकर उसे गोलियों से भून दिया था।

मुजफ्फरपुर नगर थाना क्षेत्र के कल्याणी इलाके की मछली मंडी की जमीन से जुड़े इस पूरे विवाद में अब तक कुल सात लोगों की हत्या हो चुकी है।

2018 में हुई थी पूर्व मेयर की हत्या
यह हत्याकांड 23 सितंबर 2018 का है, जब नगर थाना क्षेत्र के नवाब रोड चंदवारा में पूर्व मेयर समीर कुमार और उनके कार चालक रोहित कुमार को एके-47 से भून दिया गया था। इस मामले में पहले सेशन-ट्रायल का सामना छह आरोपियों ने किया था, लेकिन अभियोजन पक्ष कोर्ट में इसके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य पेश नहीं कर सका। वहीं दूसरे सेशन-ट्रायल में तीन आरोपी अभी मुकदमे का सामना कर रहे हैं, जिसमें अभियोजन पक्ष की ओर से गवाहों को पेश किया जा रहा है।

पुलिस जांच में मिलीं कई खामियां
मामले के लोक अभियोजक अजय कुमार ने बताया कि पुलिस जांच में कई गंभीर खामियां सामने आई हैं। उन्होंने बताया कि मृतक के जब्त किए गए मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच ही नहीं कराई गई और पुलिस ने उसे एफएसएल तक नहीं भेजा। इसके अलावा समीर कुमार के मोबाइल की कॉल डिटेल की भी गहनता से जांच नहीं हो सकी।

अभियोजक के अनुसार, अगर कॉल डिटेल और मोबाइल डेटा की सही तरीके से जांच होती, तो आरोपियों के खिलाफ अहम सबूत मिल सकते थे। उन्होंने यह भी बताया कि घटना के चश्मदीद गवाहों ने भी अदालत में खुलकर गवाही नहीं दी। मृतक समीर कुमार के परिवार से भी कोई प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं था, और परिवार के सदस्य भी अदालत को पर्याप्त जानकारी नहीं दे सके। नतीजतन इसका सीधा फायदा आरोपियों को मिला।

जमीन विवाद बना हत्या की वजह
जांच के मुताबिक, समीर कुमार की हत्या मुजफ्फरपुर शहर की एक कीमती जमीन की डीलिंग को लेकर हुए विवाद के चलते की गई थी। गोविंद और सुजीत, जिन पर समीर कुमार पर गोली चलाने का आरोप लगा था, वे भी पहले समीर कुमार के करीबी सहयोगी रह चुके थे। मोतीझील स्थित कल्याणी मछली मंडी की जमीन की डीलिंग में हिस्सेदारी को लेकर पहले से ही विवाद चला आ रहा था। इसी विवाद के चलते 23 सितंबर 2018 को सुनियोजित तरीके से रेकी कर समीर कुमार को गोली मार दी गई थी।