
अपराजिता पौधाImage Credit source: pexels
Vastu for Aparajita Plant: वास्तु शास्त्र में कई ऐसे पौधों के बारे में बताया गया है, जिन्हें घर में लगाना शुभ माना जाता है. इन्हीं में से एक है अपराजिता का पौधा. अपने सुंदर नीले और सफेद फूलों के लिए पहचाना जाने वाला यह पौधा धार्मिक दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. मान्यता है कि सही दिशा में अपराजिता का पौधा लगाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सुख-समृद्धि का वास बना रहता है. हालांकि, इसके लिए सही दिशा और कुछ जरूरी नियमों का ध्यान रखना भी जरूरी माना गया है. आइए जानते हैं कि वास्तु शास्त्र के अनुसार अपराजिता का पौधा किस दिशा में लगाना सबसे शुभ माना जाता है.
अपराजिता के पौधे का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में अपराजिता के फूलों का उपयोग कई देवी-देवताओं की पूजा में किया जाता है. खासतौर पर भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और मां दुर्गा की पूजा में इसके फूल चढ़ाना शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि अपराजिता का पौधा घर में सकारात्मकता और शुभ ऊर्जा का प्रतीक होता है.
किस दिशा में लगाएं अपराजिता का पौधा?
वास्तु शास्त्र के अनुसार, अपराजिता का पौधा उत्तर, उत्तर-पूर्व या पूर्व दिशा में लगाना सबसे शुभ माना जाता है. इन दिशाओं को सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र माना जाता है. मान्यता है कि यहां लगाया गया अपराजिता का पौधा घर में खुशहाली, आर्थिक उन्नति और मानसिक शांति लाने में सहायक होता है.
किन दिशाओं में नहीं लगाना चाहिए?
वास्तु मान्यताओं के अनुसार, अपराजिता का पौधा दक्षिण-पश्चिम दिशा में लगाने से बचना चाहिए. इस दिशा में पौधा लगाने से सकारात्मक प्रभाव कम हो सकता है. साथ ही पौधे को ऐसी जगह न रखें जहां हमेशा अंधेरा या गंदगी रहती हो.
पूजा में क्यों खास माना जाता है अपराजिता?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अपराजिता के फूल भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को प्रिय माने जाते हैं. कई लोग शुक्रवार, गुरुवार और नवरात्रि के दौरान इन फूलों से पूजा करते हैं. माना जाता है कि इससे घर में सुख, शांति और धन-धान्य का आशीर्वाद मिलता है.
अपराजिता का पौधा लगाने के फायदे
वास्तु मान्यताओं के अनुसार, सही दिशा में लगाया गया अपराजिता का पौधा घर का वातावरण सकारात्मक बनाए रखने में सहायक माना जाता है. यह मानसिक शांति, पारिवारिक प्रेम और आर्थिक उन्नति का प्रतीक माना जाता है. इसके साथ ही यह घर की सुंदरता भी बढ़ाता है और हरियाली का अहसास कराता है.हैं.
धार्मिक मान्यता
धार्मिक और वास्तु मान्यताओं के अनुसार, अपराजिता का पौधा शुभता, सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. कहा जाता है कि इसे सही दिशा में लगाने और नियमित देखभाल करने से घर में सुख-शांति का वातावरण बना रहता है.
ये भी पढ़ें: Sawan 2026: सावन में इस तरह करें भोलेनाथ का जलाभिषेक, हर मनोकामना हो जाएगी पूरी!
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

वरुण चौहान
इलेक्ट्रानिक और डिजिटल मीडिया में करीब एक दशक से ज्यादा का अनुभव. 2008 में एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन (AAFT) नोएडा से पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद कुछ अलग और नया करने की सोच के साथ मीडिया में अपने सफर की शुरुआत की. शुरुआत से ही मेरी रुचि उन विषयों को आम लोगों तक पहुंचाने में रही है, जो भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं से जुड़े हैं. अपने करियर के दौरान Channel One News, Sahara Samay, A2Z News, News Express, National Voice और पंजाब केसरी डिजिटल जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला. इन संस्थानों में काम करते हुए समाचार लेखन, फील्ड रिपोर्टिंग,और डिजिटल कंटेंट को सीखने का अनुभव मिला. फिलहाल देश के सबसे बड़े न्यूज नेटवर्क TV9 भारतवर्ष में धर्म और आस्था से जुड़ी खबरों, धार्मिक आयोजनों, ज्योतिष, वास्तु, पौराणिक कथाओं, मंदिरों की परंपराओं और व्रत-त्योहारों से जुड़े विषयों को सरल, सहज और तथ्यपूर्ण भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभा रहा हूं. महाकुंभ 2025 की कवरेज मेरे करियर के महत्वपूर्ण अनुभवों में शामिल है, जहां करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, अखाड़ों की परंपराओं, संत समाज की गतिविधियों और कुंभ से जुड़े धार्मिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर विस्तार से लिखने का अवसर मिला. इसके अलावा चारधाम यात्रा, सावन, नवरात्रि, दीपावली, होली, छठ पूजा, अमरनाथ यात्रा, रमज़ान और अन्य प्रमुख धार्मिक आयोजनों पर भी लगातार लेखन किया है. भारतीय संस्कृति, धर्म-दर्शन, ज्योतिष, अंक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र, पुराणों और लोक आस्थाओं के अध्ययन में विशेष रुचि रखता हूं. मेरा प्रयास हमेशा यही रहता है कि धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाया जाए, ताकि वे अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को बेहतर ढंग से समझ सकें.
Read More