Asian Games 2026: दूध बेचने से एशियन गेम्स के मेडल तक... नितेश सिवाच ने रचा इतिहास, 64 साल का सूखा किया खत्म

Published on 1 अक्टू॰ 2026

Asian Games 2026: दूध बेचने से एशियन गेम्स के मेडल तक… नितेश सिवाच ने रचा इतिहास, 64 साल का सूखा किया खत्म

नितेश सिवाच ने जीता ऐतिहासिक मेडल. (फोटो- INSTAGRAM)

Nitesh Siwach, Asian Games 2026: एशियन गेम्स 2026 में भारतीय पहलवान नितेश सिवाच ने कुश्ती की मैट पर वो कारनामा कर दिखाया है जिसका इंतजार देश पिछले 64 सालों से कर रहा था. ग्रीको-रोमन इवेंट के 97+ किलो कैटेगरी के खिताबी मुकाबले में नितेश को भले ही जापान के यूरी नकाजातो के खिलाफ कड़े संघर्ष के बाद हार का सामना करना पड़ा और गोल्ड से चूक गए, लेकिन सिल्वर मेडल जीतकर उन्होंने इतिहास के पन्नों में अपना नाम हमेशा के लिए दर्ज करा लिया.

नितेश सिवाच ने 64 साल का सूखा किया खत्म

नितेश साल 1962 के जकार्ता एशियन गेम्स के बाद ग्रीको-रोमन कुश्ती के फाइनल में पहुंचने और मेडल जीतने वाले पहले भारतीय पहलवान बन गए हैं. 1962 के एशियाड में भारत के महान पहलवान गणपत अंदलकर ने 97+ किलो भारवर्ग में ब्रॉन्ज मेडल जीता था. उसके बाद से छह दशकों से ज्यादा समय तक कोई भी भारतीय पहलवान इस कैटेगरी में न तो फाइनल का टिकट कटा सका था और न ही कोई मेडल जीत पाया था.

नितेश ने फाइनल तक का सफर काफी आक्रामक और एकतरफा अंदाज में तय किया. क्वार्टर फाइनल में उन्होंने तुर्कमेनिस्तान के अमानबर्दी अगामम्मेदोव को 7-1 के अंतर से मात देकर सेमीफाइनल में एंट्री की. फिर सेमीफाइनल में उन्होंने मंगोलिया के गंखुयांग गनबातर को मुकाबले के पहले तीन मिनट के अंदर ही 9-0 से धूल चटा दी और 1962 के बाद फाइनल में पहुंचने वाले पहले भारतीय बने.

दूध बांटने से लेकर पोडियम तक

नितेश हरियाणा के सोनीपत जिले के जगसी गांव के रहने वाले हैं. उनके पिता आनंद सिवाच दूध का छोटा सा कारोबार चलाते हैं. शुरुआत में क्रिकेट खेलने वाले नितेश ने बाद में प्रताप स्पोर्ट्स स्कूल में कोच ओम प्रकाश दहिया के मार्गदर्शन में पहलवानी के दांव-पेंच सीखे. लेकिन करियर के शुरुआती दौर में घुटने की गंभीर चोट के कारण उन्हें कुश्ती तक छोड़नी पड़ गई थी. इस मुश्किल दौर में उन्होंने अपने परिवार और पिता का हाथ बंटाने के लिए घर-घर जाकर दूध डिलीवरी बॉय के रूप में काम किया. हालांकि, चोट से उबरने के बाद मैट पर उनकी वापसी और फिर एशियन गेम्स के पोडियम तक का सफर उनके हौसले की मिसाल बन गया है.

लगातार इंटरनेशनल मेडल से सजा करियर

  • 2019: कैडेट एशियन चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल
  • 2022: अंडर-23 वर्ल्ड चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल
  • 2025: सीनियर एशियन चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल
  • 2026: एशियन चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल
  • 2026: एशियन गेम्स में ऐतिहासिक सिल्वर मेडल

मोहिद खान

मोहिद खान

मोहिद खान TV9 Hindi में बतौर सीनियर सब-एडिटर स्पोर्ट्स डेस्क पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. वह जर्नलिज्म में 4 साल का अनुभव रखते हैं. वह मूल रूप से राजस्थान के ब्यावर शहर के रहने वाले हैं. मोहिद ने जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की डिग्री चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से हासिल की है. वह पढ़ने, लिखने और खेलने का शौक रखते हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत इंडिया न्यूज के साथ की थी. इसके बाद उन्होंने वनइंडिया हिंदी, ज़ी न्यूज और इंडिया टीवी जैसी संस्थानों में काम किया. वह किसी भी क्रिकेट मैच का बारीकी से विश्‍लेषण करने में माहिर हैं और उन्हें अन्य खेलों से जुड़ी खबरें बनाने में भी रुचि है.

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