बांकीपुर उपचुनाव से पहले जन सुराज में टूट जारी! रूबी गुप्ता, रूबी सिंह और अविनाश प्रताप रूडी सहित तीन और नेताओं ने थामा बीजेपी का हाथ।
बांकीपुर उपचुनाव के बीच प्रशांत किशोर की पार्टी में मची भगदड़, तीन और नेताओं ने बीजेपी का दामन थामा
- Published: 18 Jul 2026, 06:27 PM IST
- Last Updated: 18 Jul 2026, 06:27 PM IST
Bankipur Bypoll 2026: बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से ठीक पहले प्रशांत किशोर की 'जन सुराज' पार्टी को लगातार झटके लग रहे हैं। शनिवार, 18 जुलाई को एक बार फिर पार्टी को उस समय बड़ा झटका लगा, जब जन सुराज के तीन प्रमुख नेताओं ने पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सदस्यता ले ली।
इन नेताओं ने छोड़ा पीके का साथ
बीजेपी में शामिल होने वाले नए नेताओं में रूबी गुप्ता, रूबी सिंह और अविनाश प्रताप रूडी सिंह शामिल हैं। पटना स्थित बीजेपी प्रदेश कार्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में इन सभी नेताओं को पार्टी में औपचारिक रूप से शामिल कराया गया।
बिहार सरकार के खान एवं भूतत्व मंत्री प्रमोद कुमार चंद्रवंशी और प्रदेश महामंत्री प्रति शेखर ने इन सभी नेताओं को अंगवस्त्र और पार्टी की सदस्यता पर्ची देकर स्वागत किया।
जन सुराज में टूट का सिलसिला जारी
प्रशांत किशोर की पार्टी में टूट का यह सिलसिला पिछले कुछ दिनों से लगातार जारी है। इससे पहले, 15 जुलाई को प्रसिद्ध गणितज्ञ केसी सिन्हा ने जन सुराज को अलविदा कहते हुए बीजेपी का दामन थाम लिया था।
केसी सिन्हा 2025 के विधानसभा चुनाव में कुम्हरार सीट से जन सुराज के प्रत्याशी रहे थे। उनके साथ ही जन सुराज के नेता बिट्टू सिंह ने भी बीजेपी जॉइन कर ली थी।
वहीं, 16 जुलाई को फिल्म डायरेक्टर चेतना झांब सहित कई अन्य नेताओं ने भी बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ली थी।
बांकीपुर उपचुनाव बनी प्रतिष्ठा की लड़ाई
पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर 30 जुलाई को उपचुनाव होने वाला है। इस सीट को जीतने के लिए प्रशांत किशोर खुद चुनावी मैदान में डटे हैं और बीजेपी को कड़ी टक्कर दे रहे हैं।
बांकीपुर सीट को बीजेपी के कद्दावर नेता और राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का अभेद्य किला माना जाता है। ऐसे में प्रशांत किशोर की सक्रियता ने इस मुकाबले को काफी रोमांचक बना दिया है।
बीजेपी की रणनीति और चुनावी दांव-पेच
अपना गढ़ बचाने के लिए बीजेपी पूरी ताकत झोंक रही है। पार्टी ने अपने सभी प्रदेश पदाधिकारियों को चुनाव प्रचार में उतार दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि जन सुराज के नेताओं को अपने पाले में लाकर बीजेपी मनोवैज्ञानिक बढ़त बनाने की कोशिश कर रही है।
बीजेपी किसी भी कीमत पर यह सीट अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहती है, और यही कारण है कि चुनावी लड़ाई के साथ-साथ राजनीतिक जोड़-तोड़ का खेल भी तेज हो गया है।