
भाई तेरा स्टार है फिल्म का रिव्यू
Bhai Tera Star Hai Film Review: जब किसी फिल्म का नाम ‘भाई तेरा स्टार है’ रखा जाता है, तो दिमाग में तुरंत ख्याल आता है कि पर्दे पर ताली-सीटी वाले डायलॉग और हंसा-हंसाकर लोटपोट करने वाली बंपर कॉमेडी देखने को मिलेगी. ऊपर से अगर लीड रोल में राघव जुयाल हों, जिन्होंने ‘किल’ में खूंखार विलेन बनकर और ‘बैड्स ऑफ बॉलीवुड’ में अपनी एक्टिंग का लोहा मनवाया था, तब उम्मीद थोड़ी ज्यादा होना लाजमी है. लेकिन जैसे ही आप थिएटर्स में या स्क्रीन के सामने बैठते हैं, ये फिल्म आपकी सारी उम्मीदों का ऐसा रायता फैलाती है कि आप सोचने पर मजबूर हो जाएंगे कि आखिर किस जुर्म की सजा मिल रही है!
आजकल के दौर में जब हर कोई चिल्ला-चिल्लाकर कहता है कि ‘कंटेंट ही असली राजा है’, ऐसे समय में ये फिल्म उस राजा के मुंह पर करारा तमाचा मारती दिखती है. न कहानी का कोई ठिकाना, न कॉमेडी में कोई तर्क और न ही किरदारों का कोई सिर-पैर! अगर आप भी इस वीकेंड ‘भाई तेरा स्टार है’ की टिकट बुक करने का प्लान बना रहे हैं, तो रुकिए और पहले ये रिव्यू पूरा पढ़ लीजिए.
कहानी
कहानी की बात करें तो पूरा कलेश लंदन के बैकड्रॉप में रचा गया है. हमारा हीरो अजय (राघव जुयाल) एक स्ट्रगलिंग एक्टर है, जिसने बार मालिक और पार्ट-टाइम सट्टेबाज फैटी (संजय कपूर) से 10,000 पौंड उधार ले रखे हैं. अब अजय ने ये पैसा क्यों लिया, उसने इसे कहां उड़ाया—इसका जवाब तो शायद फिल्म के राइटर के पास भी नहीं है! खैर, फैटी भाई अपने 10 हजार पौंड वापस पाने के लिए अजय के पीछे अपना गुर्गा जेडी (विकल्प मेहता) और कुछ लफंगे लगा देते हैं. अजय इस कर्ज को चुकाने के लिए अपनी गर्लफ्रेंड रोशनी (निहारिका एनएम) और बहन नताशा (पार्वती ओमानाकुट्टन) से झूठ बोलकर पैसे ठगने की कोशिश करता है.
दूसरी तरफ रोशनी का भाई सिड (विवान भटेना) अलग ही दुनिया में मस्त है. इसी बीच पैसों की छीना-झपटी में गलतफहमियां, बिना सिर-पैर की हरकतें और बेतुके हादसे होने लगते हैं, जिसमें लंदन पुलिस से लेकर पैरामेडिक्स तक इस बवंडर में कूद पड़ते हैं. लेकिन मकसद किसी का साफ नहीं होता! आगे क्या होता है ये जानने के लिए आपको थिएटर में जाकर भाई तेरा स्टार है देखनी होगी.
कैसी है फिल्म?
सीधी भाषा में कहें तो ‘भाई तेरा स्टार है’ एक बेहद सुस्त, लॉजिक-लेस और फूहड़ ड्रामे से भरी फिल्म है. ये फिल्म उस बिन पेंदी के लोटे की तरह है जो पूरे दो घंटे तक लंदन की सड़कों पर बिना किसी दिशा के लुढ़कता रहता है. शुरुआत में लगता है कि शायद यह ‘हेरा फेरी’ या ‘भागमभाग’ मार्का कोई मजेदार कॉमेडी थ्रिलर बनेगी, लेकिन मेकर्स का पेट्रोल पहली ही 15 मिनट की राइड में खत्म हो जाता है. फिल्म में कॉमेडी के नाम पर सिर्फ ओवरएक्टिंग परोसी गई है. हर किरदार पर्दे पर चीख-चिल्ला रहा है, लेकिन दर्शकों के चेहरे पर हंसी का एक छोटा सा ठहाका तक नहीं आता. स्क्रीन पर बार-बार किरदारों के नाम और उनके अजीबो-गरीब रिश्ते लिखकर आते हैं, मानो मेकर्स को खुद भरोसा नहीं था कि दर्शक उनकी खिचड़ी समझ पाएंगे. ये फिल्म टाइम-पास तो दूर, आपके सब्र का कड़ा इम्तिहान लेती है.
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डायरेक्शन, मेकिंग और राइटिंग
फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी थकाऊ राइटिंग और बचकाना डायरेक्शन है. जब पटकथा ही बासी और बेदम हो, तो कोई भी डायरेक्टर चमत्कार नहीं कर सकता. उदाहरण के तौर पर बात की जाए तो एक सीन में जेडी को कंधे पर असली गोली लगती है, लेकिन न तो उसकी शर्ट फटती है, न एक बूंद खून निकलता है और न ही वो दर्द से कराहता है! ऐसा लगता है जैसे किसी नुक्कड़ नाटक की शूटिंग चल रही हो. लंदन पुलिस का चित्रण इतना बचकाना है कि हंसी आने के बजाय मेकर्स की अकल पर तरस आता है. फिल्म की रफ्तार इतनी थकाऊ है कि एक रात की यह कहानी दर्शकों को एक पूरी सदी जितनी लंबी लगने लगती है. बेवजह के सीन्स को खींचकर जबरदस्ती लंबा किया गया है.
म्यूजिक
फिल्म के आखिर में राघव जुयाल के डांस का जलवा दिखाने के लिए कुछ प्रमोशनल गाने ठूंसे गए हैं, लेकिन जब पूरी नाव ही डूब चुकी हो, तो तिनके का सहारा भी काम नहीं आता.
जानें कैसी है एक्टिंग?
राघव जुयाल (अजय) के लिए ये पहली बार था जब वो अकेले पूरी फिल्म का बोझ कंधे पर उठाए हीरो बने थे. लेकिन अफसोस! कमजोर स्क्रिप्ट ने उनके सारे किए-कराए पर पानी फेर दिया. वो हर फ्रेम में इतनी लाउड और लाचार ओवरएक्टिंग करते दिखे हैं कि ‘किल’ वाले उनके खौफनाक स्वैग की याद आकर दिल दुखने लगता है. उनके लिए बेहतर होता कि वो ऐसी बेसिर-पैर फिल्मों के बजाय किसी अच्छी स्क्रिप्ट में साइड रोल ही चुन लेते.
संजय कपूर बार मालिक फैटी के ढीले-ढाले रोल में जैसे-तैसे खिसकते नजर आते हैं. वहीं विकल्प मेहता (जेडी) के पास चीखने-चिल्लाने के अलावा करने को कुछ खास नहीं था. की अनेजा वालिया ने एक गुस्सैल पंजाबी बीवी के रोल में ठीक-ठाक काम किया है, जबकि चंदन राय सान्याल जैसे धाकड़ एक्टर (जो ‘एक्टर्स से नफरत करने वाले पुलिसवाले’ बने हैं) को फिल्म में इतनी देर से लाया जाता है कि तब तक पानी सिर से ऊपर जा चुका होता है. इन मंझे हुए कलाकारों की प्रतिभा को मेकर्स ने बिलकुल भी इस्तेमाल किया है.
बाकी स्टारकास्ट की बात करें तो ग्लैमर का तड़का लगाने के लिए ढेर सारी हसीनाओं को स्क्रीन पर उतार तो दिया गया, लेकिन उनके किरदारों में इतनी भी जान नहीं थी कि वो दर्शकों के जेहन में टिक सकें. सब एक-दूसरे की फोटोकॉपी जैसी महसूस होती हैं.
देखें या नहीं?
सच कहें तो इस फिल्म में तारीफ के काबिल ढूंढना भूसे के ढेर में सुई तलाशने जैसा है. अगर कुछ थोड़ा-बहुत बर्दाश्त करने लायक है, तो वो है लंदन की कुछ खूबसूरत लोकेशंस और फिल्म के अंत में राघव जुयाल के कुछ सेकंड के सिग्नेचर डांस मूव्स. इसके अलावा संजय कपूर और चंदन राय सान्याल की स्क्रीन पर मौजूदगी पल भर के लिए थोड़ा ठहराव लाती है. लेकिन फिल्म का पूरा ढांचा ही कमियों की बुनियाद पर खड़ा है. सबसे पहली गड़बड़ है इसका लाउड मेलोड्रामा और बिना लॉजिक वाला फूहड़ ह्यूमर. इसके अलावा घटिया वीएफएक्स, लॉजिकहीन एक्शन (जैसे बिना खून वाली गोली) और राघव जुयाल की हद से ज्यादा लाउड एक्टिंग इस फिल्म को पूरी तरह झेलने लायक नहीं छोड़ती.
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कुल मिलाकर कहें, तो ‘भाई तेरा स्टार है’ एक ऐसी फिल्म है जिसके एक कैरेक्टर का डायलॉग ही इस पर सबसे सटीक बैठता है,”तुम बिल्कुल फनी नहीं हो, इसलिए अब बस बंद करो!” अगर आप राघव जुयाल के कट्टर वाले फैन भी हैं, तब भी ये फिल्म आपका मूड खराब करने का पूरा दम रखती है. समय, पैसा और दिमाग तीनों की बचत करना चाहते हैं, तो इस बेवजह के सिरदर्द से दूर रहने में ही भलाई है.

सोनाली नाईक
सोनाली करीब 15 सालों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद प्रहार न्यूज पेपर से उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की थी. इस न्यूज पेपर में बतौर रिपोर्टर काम करते हुए सोनाली ने एंटरटेनमेंट बीट के साथ-साथ सीसीडी (कॉलेज कैंपस और ड्रीम्स) जैसे नए पेज पर काम किया. उन्होंने वहां 'फैशनेरिया' नाम का कॉलम भी लिखा. इस दौरान एलएलबी की पढ़ाई भी पूरी की, लेकिन पत्रकारिता के जुनून की वजह से इसी क्षेत्र में आगे बढ़ने के इरादे से 2017 में टीवी9 से सीनियर कोरेस्पोंडेंट के तौर पर अपनी नई पारी शुरू की. टीवी9 गुजराती चैनल में 3 साल तक एंटरटेनमेंट शो की जिम्मेदारी संभालने के बाद सोनाली 2020 में टीवी9 हिंदी डिजिटल की एंटरटेनमेंट टीम में शामिल हुईं. सोनाली ने टीवी9 के इस सफर में कई ब्रेकिंग, एक्सक्लूसिव न्यूज और ऑन ग्राउंड कवरेज पर काम किया है. हिंदी के साथ-साथ गुजराती, मराठी, इंग्लिश भाषा की जानकारी होने के कारण डिजिटल के साथ-साथ तीनों चैनल के लिए भी उनका योगदान रहा है. रियलिटी शोज और ग्लोबल कंटेंट देखना सोनाली को पसंद है. नई भाषाएं सीखना पसंद है. संस्कृत भाषा के प्रति खास प्यार है. नुक्कड़ नाटक के लिए स्क्रिप्ट लिखना पसंद है. सोनाली के लिखे हुए स्ट्रीट प्लेज 'पानी', 'मेड इन चाइना' की रीडिंग 'आल इंडिया रेडियो' पर सोशल अवेयरनेस के तौर पर की जा चुकी है.
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