भोपाल के 154 करोड़ रुपए के जीजी फ्लाईओवर की ड्रेनेज व्यवस्था महज 21 महीने में सवालों के घेरे में आ गई है। करीब 3 किलोमीटर लंबे फ्लाईओवर के टूटे और जर्जर पाइप अब बदले जाएंगे। 4 इंच की जगह 6 इंच के पाइप लगाने पर करीब 60 लाख रुपए खर्च होंगे, लेकिन काम की जिम्मेदारी फिर उसी मूल ठेकेदार को दी गई है।
154 करोड़ का फ्लाईओवर, 21 महीने में ड्रेनेज फेल
- Published: 21 Sep 2026, 09:32 PM IST
- Last Updated: 21 Sep 2026, 10:15 PM IST
हरिभूमि, न्यूज भोपाल। 154 करोड़ रुपए की लागत से बना डॉ. भीमराव अंबेडकर सेतु यानी जीजी फ्लाईओवर बारिश में अपनी ड्रेनेज व्यवस्था की पोल खोल रहा है। करीब 3 किलोमीटर लंबे फ्लाईओवर पर बारिश का पानी निकालने के लिए लगाए गए पाइप कई जगह टूट चुके हैं। पाइपों के जॉइंट खुल गए हैं और कुछ हिस्सों में पाइप जर्जर होकर हो चुके हैं। नतीजा यह है कि बारिश के दौरान फ्लाईओवर पर पानी जमा होता है और नीचे सड़क पर भी जलभराव की स्थिति बनती है।
21 महीने बाद भी सुधार नहीं, अब फिर बदले जाएंगे पाइप
फ्लाईओवर के नीचे लगाए गए करीब 4 इंच के ड्रेनेज पाइप अब बदले जा रहे हैं। इसके लिए करीब 60 लाख रुपए खर्च किए जाएंगे। इस बार 4 इंच की जगह 6 इंच के पाइप लगाए जाने की बात कही जा रही है। यानी जिस ड्रेनेज सिस्टम को फ्लाईओवर बनने के बाद लंबे समय तक चलना था, उसमें महज 21 महीने बाद ही बड़े स्तर पर बदलाव की जरूरत पड़ गई।
जिस ठेकेदार के काम पर उठे सवाल, उसी को फिर जिम्मेदारी
सबसे बड़ा सवाल इस बात पर है कि ड्रेनेज सिस्टम में खामियों की शिकायतों के बावजूद इसकी मरम्मत की जिम्मेदारी फिर मूल ठेकेदार मानवेंद्र सिंह को ही दी गई है। ठेकेदार का कहना है कि पूरे करीब 3 किलोमीटर हिस्से के पाइप बदले जाने हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अगर पुरानी व्यवस्था में खामी थी तो उसकी जिम्मेदारी तय होने के बाद भी उसी एजेंसी से दोबारा काम क्यों कराया जा रहा है।
4.69 करोड़ की मरम्मत भी सवालों में
फ्लाईओवर की सड़क और ड्रेनेज से जुड़ी खामियों के बाद करीब 4.69 करोड़ रुपए की मरम्मत का मामला भी सामने आया था। यह मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा। कोर्ट ने डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड के तहत मूल ठेकेदार को ही खामियां अपने खर्च पर दूर करने के निर्देश दिए हैं। इसके बावजूद अब ड्रेनेज के लिए अलग से करीब 60 लाख रुपए की लागत से पाइप बदलने की नौबत आ गई है। इससे निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
कार्रवाई हुई, लेकिन बारिश में फिर वही कहानी
फ्लाईओवर की ड्रेनेज और सड़क से जुड़ी कमियों को लेकर परियोजना से जुड़े कुछ इंजीनियरों और प्रभारियों पर निलंबन की कार्रवाई भी हो चुकी है। इसके बावजूद बारिश में फिर वही समस्या सामने आना बताता है कि निर्माण के बाद निगरानी और गुणवत्ता जांच कितनी प्रभावी रही।
वहीं पीडब्ल्यूडी के कार्यपालन यंत्री ए.आर मोरे का कहना है कि ड्रेनेज व्यवस्था सुधारने का काम दोबारा मूल ठेकेदार को दिया गया है। इस बार पाइप की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।