Bhopal: भोपाल RIE के डॉ. रजत और मनीष की अनूठी पहल, ‘आठ पहर’ डिजिटल क्लॉक को मिला पेटेंट - Haribhoomi

Published on 21 सित॰ 2026

भोपाल के क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान (RIE) के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रजत कौशिक और मनीष कुशवाहा ने भारतीय समय-परंपरा को आधुनिक तकनीक से जोड़कर अनूठा प्रयोग किया है। ‘आठ पहर’ की अवधारणा पर तैयार उनकी डिजिटल वॉल क्लॉक को भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय से डिजाइन पेटेंट मिल गया है।

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भोपाल RIE के डॉ. रजत और मनीष का पहल।

  • Published: 21 Sep 2026, 10:13 PM IST
  • Last Updated: 21 Sep 2026, 10:13 PM IST

भोपाल। भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक तकनीक के मेल से तैयार की गई ‘आठ पहर’ डिजिटल वॉल क्लॉक को बड़ी उपलब्धि मिली है। क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान (RIE), भोपाल के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रजत कौशिक, मनीष कुशवाहा और उनके सहयोगी विवेक यादव की इस डिजिटल घड़ी को भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय से डिजाइन पेटेंट प्रदान किया गया है।

पेटेंट कार्यालय ने 8 सितंबर को इस डिजाइन के लिए रजिस्टर्ड डिजाइन नंबर 494340-001 और पेटेंट सर्टिफिकेट जारी किया। यह रजिस्ट्रेशन क्लास 10-01 के अंतर्गत ‘DIGITAL WALL CLOCK’ के लिए किया गया है।

 भोपाल RIE के डॉ. रजत और मनीष का कमाल
भोपाल RIE के डॉ. रजत और मनीष की ‘आठ पहर’ डिजिटल वॉल क्लॉक

भारतीय समय-परंपरा को डिजिटल पहचान
‘आठ पहर’ भारतीय पारंपरिक समय-विभाजन की प्राचीन अवधारणा है। इसमें दिन और रात के 24 घंटों को अलग-अलग पहरों में बांटकर समय को समझा जाता है। इसी परंपरा को आधुनिक डिजिटल वॉल क्लॉक के रूप में पेश करना इस डिजाइन की खासियत है।

डिजाइन के आविष्कारक डॉ. रजत कौशिक और मनीष कुशवाहा के मुताबिक, इस नवाचार का उद्देश्य सिर्फ समय बताने वाली घड़ी तैयार करना नहीं है। इसके जरिए भारतीय पारंपरिक समय-ज्ञान को आधुनिक तकनीक और शैक्षिक माध्यमों से लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है।

गणितीय शिक्षा में भी उपयोगी
डिजाइनरों का मानना है कि यह डिजिटल क्लॉक विद्यार्थियों और युवाओं को पारंपरिक समय-विभाजन, गणितीय गणनाओं और आधुनिक समय-प्रणाली के बीच संबंध समझने में मदद कर सकती है। इसका इस्तेमाल एक्टिविटी बेस्ड लर्निंग और गणित की अवधारणाओं को सरल तरीके से समझाने के लिए किया जा सकता है।

यह घड़ी नई पीढ़ी को भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ने का माध्यम भी बन सकती है। डिजाइनरों के अनुसार, यह प्रयोग राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में भारतीय ज्ञान प्रणाली, अनुभवात्मक शिक्षा और नवाचार पर दिए गए जोर के अनुरूप है।

इस डिजाइन को पेटेंट मिलने से भारतीय अवधारणाओं पर आधारित नए शैक्षिक उपकरण विकसित करने वाले शिक्षकों और शोधकर्ताओं को भी प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।