Bihar CAG Report: कैमूर में ई-चालान की रकम पर सवाल, कैग रिपोर्ट के बाद जांच के घेरे में परिवहन विभाग

Published on 28 जुल॰ 2026

Bihar CAG Report: बिहार के कैमूर जिले में परिवहन विभाग की बडी गडबडी सामने आई है. कैग की ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार हैंड हेल्ड ई चालान मशीनों से वसूले गए करीब 16 करोड रुपये सरकारी खाते में जमा ही नहीं किए गए.

Bihar CAG Report: बिहार के कैमूर जिले में परिवहन विभाग की बडी गडबडी सामने आई है. कैग की ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार हैंड हेल्ड ई चालान मशीनों से वसूले गए करीब 16 करोड रुपये सरकारी खाते में जमा ही नहीं किए गए.

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Bihar CAG Report

Bihar CAG Report Photograph: (NN)

Bihar CAG Report: बिहार के कैमूर जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था और सुशासन के दावों पर गंभीर सवाल खडे कर दिए हैं. भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी कैग की ऑडिट रिपोर्ट में परिवहन विभाग के भीतर करोडों रुपये की वित्तीय अनियमितता का खुलासा हुआ है. इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होते ही राज्य की राजनीति में हलचल मच गई है और विपक्ष सरकार को घेरने में जुट गया है.

ई चालान की वसूली में करोडों की गडबडी

कैग की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कैमूर जिले में हैंड हेल्ड ई चालान मशीनों के जरिए वाहन चालकों से वसूला गया भारी जुर्माना सरकारी खजाने तक पहुंचा ही नहीं. मई 2019 से दिसंबर 2023 के बीच चालान के रूप में करीब 26 करोड 91 लाख रुपये का नकद जुर्माना वसूला गया था. हालांकि आश्चर्यजनक रूप से इसमें से केवल 1 करोड 96 लाख रुपये ही सरकारी खाते में जमा कराए गए. इस तरह लगभग 15 करोड 96 लाख रुपये की राशि का कोई हिसाब नहीं मिल रहा है.

अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल

इस बडे वित्तीय अंतर के सामने आने के बाद स्थानीय परिवहन कार्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका संदेह के घेरे में आ गई है. कैग की रिपोर्ट में तत्कालीन जिला परिवहन अधिकारी, मोटर वाहन निरीक्षक, प्रवर्तन उप निरीक्षक और अन्य कार्यालय कर्मियों की जांच की सिफारिश की गई है. ऑडिट में यह भी पाया गया कि कैश बुक और जमा रजिस्टर का रख रखाव ठीक से नहीं किया गया था, जिससे बडी गडबडी की आशंका को बल मिलता है.

सरकार का रुख और प्रक्रियात्मक देरी की बात

मामला गरमाने के बाद बिहार सरकार के परिवहन विभाग में हडकंप मच गया है. विभागीय स्तर पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से जवाब तलब किया जा रहा है. सरकार का कहना है कि यह मामला प्रक्रियात्मक देरी या कागजी कार्रवाई से जुडा हो सकता है. कई बार कागजात और खर्च की पर्ची समय पर जमा न होने के कारण पूरा आंकडा सामने नहीं आ पाता है. विभागीय बैठकों में अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई है और जांच के बाद दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है.

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विपक्ष का हमला और उच्च स्तरीय जांच की मांग

दूसरी ओर विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है. विपक्ष का आरोप है कि जुर्माने की रकम सरकारी खजाने में जाने के बजाय अधिकारियों और कर्मचारियों की जेब में जाती रही. विपक्ष ने इसे सीधे तौर पर बडा भ्रष्टाचार बताते हुए उच्च स्तरीय जांच कमेटी से जांच कराने की मांग की है. उनका दावा है कि अगर पूरे राज्य के परिवहन कार्यालयों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो ऐसे कई और मामले सामने आ सकते हैं.

आगे की राह और विभागीय जवाबदेही

फिलहाल यह मामला कैग की ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर जांच के दायरे में है. विभाग का कहना है कि वे इस आपत्ति को दूर करने का प्रयास कर रहे हैं और जल्द ही पूरा हिसाब स्पष्ट कर दिया जाएगा. हालांकि इस खुलासे ने बिहार में प्रशासनिक पारदर्शिता और राजस्व वसूली की निगरानी व्यवस्था पर बडे सवाल पैदा कर दिए हैं.

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