Bihar Heliport : बिहार में अब सड़क-ट्रेन के बाद हेलीकॉप्टर से सफर! 13 जिलों में बनेंगे हेलीपोर्ट, देखें पूरी लिस्ट

Published on 17 सित॰ 2026

Bihar Heliport : बिहार में आने वाले दिनों में एक जिले से दूसरे जिले तक पहुंचने के लिए लोगों के पास परिवहन का एक नया विकल्प हो सकता है। सड़क और रेल के बाद अब हवाई कनेक्टिविटी को छोटे शहरों और जिलों तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। राज्य के 13 जिलों में हेलीपोर्ट विकसित करने की योजना पर काम शुरू होने की जानकारी सामने आई है। योजना लागू होने के बाद इन जिलों से हेलीकॉप्टर सेवा शुरू होने का रास्ता खुल सकता है।

इस पहल से न सिर्फ यात्रियों के लिए आवागमन आसान होने की उम्मीद है, बल्कि बाढ़, सड़क दुर्घटना, प्राकृतिक आपदा और दूसरी आपात परिस्थितियों में राहत एवं बचाव अभियान को भी तेजी मिल सकती है। इसके अलावा पर्यटन और स्थानीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिहाज से भी इस योजना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

13 जिलों में हेलीपोर्ट की तैयारी

जानकारी के मुताबिक, शुरुआती चरण में बिहार के 13 जिलों को हेलीपोर्ट विकसित करने की योजना में शामिल किया गया है। इनमें कटिहार, पूर्णिया, अररिया, गयाजी, शेखपुरा, बांका, बेगूसराय, जमुई, खगड़िया, नवादा, सीतामढ़ी, औरंगाबाद और मुजफ्फरपुर शामिल हैं।

इन जिलों में हेलीपोर्ट तैयार होने के बाद भविष्य में हेलीकॉप्टर संचालन की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। खासकर ऐसे इलाकों में जहां सड़क या रेल मार्ग से किसी स्थान तक पहुंचने में काफी समय लगता है, वहां हवाई संपर्क एक वैकल्पिक साधन के रूप में काम कर सकता है। हालांकि, हेलीपोर्ट विकसित होने का मतलब यह नहीं है कि सभी जिलों से तत्काल नियमित यात्री हेलीकॉप्टर सेवा शुरू हो जाएगी। इसके लिए आगे संचालन, रूट, एयर ऑपरेटर और अन्य जरूरी प्रक्रियाएं तय की जानी होंगी।

सिर्फ यात्रियों के लिए नहीं होगा इस्तेमाल

इस योजना की सबसे अहम बात इसका बहुउद्देश्यीय इस्तेमाल है। हेलीपोर्ट का उपयोग केवल यात्रियों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए नहीं, बल्कि आपदा प्रबंधन और आपातकालीन सेवाओं में भी किया जा सकेगा। बिहार जैसे बाढ़ प्रभावित राज्य में इसका महत्व और बढ़ जाता है। बाढ़ के दौरान जब कई इलाकों का सड़क संपर्क टूट जाता है, तब हेलीकॉप्टर के जरिए राहत सामग्री पहुंचाने, लोगों को सुरक्षित स्थानों तक निकालने और गंभीर मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा वाले स्थानों तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है। इसी तरह किसी बड़े सड़क हादसे, प्राकृतिक आपदा या अन्य आपात स्थिति में हेलीपोर्ट राहत एवं बचाव टीमों के लिए महत्वपूर्ण आधार बन सकते हैं।

केंद्र की ‘मोडिफाइड उड़ान’ योजना से जुड़ा है प्लान

बिहार में हेलीपोर्ट विकसित करने की यह पहल केंद्र सरकार की क्षेत्रीय संपर्क योजना ‘परिवर्तित उड़ान’ यानी Modified UDAN के तहत आगे बढ़ाई जा रही है। इस योजना का उद्देश्य छोटे और कम कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों को हवाई नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में काम करना है। राज्य मंत्रिमंडल की ओर से इससे संबंधित समझौता प्रारूप को मंजूरी दिए जाने की जानकारी भी सामने आई है। इस समझौते के बाद केंद्र और राज्य के बीच हवाई संपर्क से जुड़ी परियोजनाओं में जिम्मेदारियां तय की जा सकती हैं।

तीन बड़े संस्थानों की होगी भूमिका

योजना को जमीन पर उतारने के लिए नागर विमानन मंत्रालय, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) और बिहार सरकार के बीच समन्वय होगा। इन संस्थाओं के बीच समझौता होने के बाद हेलीपोर्ट और हवाई संपर्क से जुड़ी परियोजनाओं की आगे की प्रक्रिया बढ़ेगी। यानी हेलीपोर्ट तैयार करने से लेकर उससे जुड़ी आधारभूत संरचना और संचालन की दिशा में अलग-अलग स्तर पर काम किया जाएगा।

कम यात्रियों वाले रूट पर भी उड़ान की उम्मीद

मोडिफाइड उड़ान योजना की एक खासियत यह है कि शुरुआती दौर में ऐसे रूटों पर भी हवाई सेवा को बढ़ावा देने के लिए आर्थिक सहायता का प्रावधान किया जा सकता है, जहां यात्रियों की संख्या कम रहने की संभावना हो। आमतौर पर कम यात्री वाले रूट पर एयरलाइन कंपनियों के लिए नियमित सेवा चलाना चुनौतीपूर्ण होता है। आर्थिक सहायता मिलने से नए रूट पर विमान या हेलीकॉप्टर सेवा शुरू करने की संभावना बढ़ सकती है।

पर्यटन और कारोबार को भी मिलेगा फायदा

अगर योजना निर्धारित तरीके से आगे बढ़ती है तो इसका असर केवल परिवहन तक सीमित नहीं रहने की उम्मीद है। बिहार के कई जिले ऐतिहासिक, धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों के लिए जाने जाते हैं। गयाजी, मुजफ्फरपुर, बांका, जमुई, सीतामढ़ी और औरंगाबाद जैसे जिलों में बेहतर हवाई कनेक्टिविटी से पर्यटकों की आवाजाही आसान हो सकती है। इसके साथ ही कारोबार, निवेश और स्थानीय सेवाओं को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है। हवाई संपर्क बेहतर होने पर किसी जिले तक बाहर से आने वाले लोगों का समय कम हो सकता है। इससे होटल, परिवहन, पर्यटन, स्थानीय बाजार और अन्य सेवा क्षेत्रों में गतिविधियां बढ़ सकती हैं।

अब आगे क्या होगा?

फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण चरण हेलीपोर्ट से जुड़े प्रस्ताव और केंद्र-राज्य के बीच समझौते को आगे बढ़ाना है। इसके बाद संबंधित जिलों में जगह, आधारभूत सुविधाओं और संचालन से जुड़ी तैयारियों पर काम हो सकता है। अगर यह योजना जमीन पर उतरती है तो बिहार के इन 13 जिलों के लिए कनेक्टिविटी का एक नया अध्याय खुल सकता है। सड़क और रेल के साथ हेलीकॉप्टर सेवा का विकल्प खासकर आपदा प्रबंधन, पर्यटन और तेज आवागमन के लिहाज से महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।फिलहाल लोगों की नजर इस बात पर रहेगी कि इन हेलीपोर्ट का निर्माण कब शुरू होता है, किन रूटों पर सेवा प्रस्तावित होती है और नियमित हेलीकॉप्टर संचालन के लिए क्या व्यवस्था तैयार की जाती है।