रांची में छात्रों के विधानसभा घेराव से भी नहीं बनी बात... लाठीचार्ज के खिलाफ आज बीजेपी का झारखंड बंद

Published on 10 अग॰ 2026

झारखंड के रांची में JPSC-JSSC परीक्षा विवाद को लेकर छात्रों का आंदोलन 17वें दिन भी नहीं थमा. सोमवार को विधानसभा घेराव के दौरान हुए लाठीचार्ज के बाद मामला और गरमा गया. अब इस मुद्दे पर सियासत भी तेज हो गई है. बीजेपी ने छात्रों पर हुई कार्रवाई के विरोध में 11 अगस्त को झारखंड बंद का ऐलान कर दिया है.

दिनभर चले घटनाक्रम के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों से शांति बनाए रखने की अपील की. उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से काम करेगी. दूसरी तरफ बीजेपी ने सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया. पार्टी ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बंद का ऐलान किया और कहा कि लाठीचार्ज का जवाब जनता देगी.

छात्र आंदोलन के बीच कई बड़े घटनाक्रम भी सामने आए. JPSC के पूर्व चेयरमैन एल खियांग्ते को CID ने गिरफ्तार कर लिया. सरकार पहले ही तीन परीक्षाएं रद्द कर चुकी है और ED जांच के लिए भी सहमति दे चुकी है. इसके बावजूद छात्र CBI जांच की मांग पर अड़े हैं. ऐसे में सवाल सिर्फ एक प्रदर्शन का नहीं, बल्कि पूरे भर्ती सिस्टम पर उठ रहे भरोसे का भी है. अअब जानते हैं कि आंदोलन के 17वें दिन क्या-क्या हुआ, कौन-कौन से बड़े फैसले हुए और आखिर किस बात पर सबसे ज्यादा टकराव देखने को मिला.

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विधानसभा घेराव के दौरान बढ़ा तनाव

JPSC-JSSC परीक्षा में कथित धांधली के विरोध में सोमवार को बड़ी संख्या में छात्र विधानसभा घेराव के लिए पहुंचे. पुलिस ने उन्हें बैरिकेड पर रोकने की कोशिश की, लेकिन कई प्रदर्शनकारी विधानसभा के गेट तक पहुंच गए. इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े. हालात कुछ देर के लिए इतने तनावपूर्ण हो गए कि विधानसभा की कार्यवाही भी प्रभावित हुई.

बाद में सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को वहां से हटा दिया. इस दौरान कई छात्र और पुलिसकर्मी घायल हुए. देर शाम अनशन पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो की तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया.

Ranchi Student Protest
रांची में जारी छात्र आंदोलन के दौरान बीमार हुए छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो (Photo: PTI)

छात्र नेता रविंद्र पासवान का आरोप है कि छात्र पूरे दिन शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे. शाम होते ही पूरे इलाके को पुलिस छावनी में बदल दिया गया. उनका दावा है कि कई छात्रों को हिरासत में लिया गया और कुछ के साथ मारपीट भी हुई. पासवान ने कहा कि अब यह सिर्फ छात्रों का आंदोलन नहीं, बल्कि जन आंदोलन बन चुका है.

हेमंत सोरेन ने क्या कहा?

दिनभर के घटनाक्रम के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों से शांति बनाए रखने की अपील की. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में छात्रों को अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है और सरकार उनकी मांगों को गंभीरता से सुन रही है.

सोरेन ने पुलिस और प्रशासन का भी धन्यवाद किया. उनका कहना था कि हालात को संयम से संभाला गया. उन्होंने भरोसा दिलाया कि वरिष्ठ मंत्री लगातार छात्रों से बातचीत कर रहे हैं. परीक्षा व्यवस्था को ज्यादा पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह बनाने के लिए सरकार जरूरी कदम उठाएगी. हालाकि, मुख्यमंत्री ने कुछ विपक्षी नेताओं पर आंदोलन का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया. साथ ही छात्रों से अपील की कि वे किसी के बहकावे में न आएं.

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बीजेपी ने झारखंड बंद का ऐलान किया

10 अगस्त को छात्रों के प्रदर्शन के दौरान बाबूलाल मरांडी को पुलिस ने हिरासत में लिया था. इसके बाद छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में बीजेपी ने मंगलवार, 11 अगस्त को झारखंड बंद का ऐलान किया है. रांची में बीजेपी अध्यक्ष आदित्य साहू और बाबूलाल मरांडी ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया. उनका कहना था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बल प्रयोग नहीं होना चाहिए था. पार्टी ने लोगों से झारखंड बंद का समर्थन करने की अपील भी की.

राहुल गांधी ने भी उठाए सवाल

छात्र आंदोलन अब राष्ट्रीय राजनीति का मुद्दा भी बन गया है. राहुल गांधी ने छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग पर आपत्ति जताई. उन्होंने झामुमो सरकार से मामले का जल्द समाधान निकालने की अपील की. उनके बयान के बाद बीजेपी ने उन पर पलटवार किया. भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी विपक्ष वाले राज्यों में छात्रों के मुद्दे उठाते हैं, लेकिन सहयोगी दलों की सरकार वाले राज्यों में अलग रुख अपनाते हैं.

वहीं, कांग्रेस के पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने कहा कि झारखंड सरकार में कांग्रेस की भागीदारी है, लेकिन JPSC-JSSC घोटाले में पार्टी किसी भी तरह से शामिल नहीं है. उनका कहना है कि कांग्रेस मानती है कि इन परीक्षाओं में गड़बड़ी हुई है और वह छात्रों के आंदोलन का समर्थन करती है. उन्होंने छात्रों पर हुए लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल को दुखद बताते हुए कहा कि इसका समर्थन नहीं किया जा सकता.

अंबा प्रसाद ने मामले की CBI जांच की मांग भी उठाई. उनका कहना था कि शिक्षा, गृह और पुलिस विभाग मुख्यमंत्री के अधीन हैं, जबकि JPSC का गठन भी सरकार की सिफारिश पर होता है. ऐसे में उसी सरकार के अधीन काम करने वाली CID से निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती. उनके मुताबिक, पूरे मामले की पारदर्शी जांच CBI से कराई जानी चाहिए.

सरकार ने क्या कदम उठाए?

सरकार पहले ही तीन भर्ती परीक्षाएं रद्द करने का फैसला ले चुकी है. इनमें 14वीं JPSC संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा भी शामिल है. सरकार ने 14वीं JPSC परीक्षा से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच ED से कराने की मांग भी मान ली है. हालांकि छात्र संगठन अब भी CBI जांच की मांग पर अड़े हुए हैं.

पूर्व चेयरमैन एल खियांग्ते गिरफ्तार

झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन (JPSC) के विवादित पूर्व चेयरमैन एल खियांग्ते को CID ने गिरफ्तार कर लिया है. इससे पहले 3 अगस्त को CID ने उनसे करीब 7 घंटे पूछताछ की थी. यह पूछताछ JPSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच के सिलसिले में हुई थी. इसी दौरान राज्यभर में 18 जगहों पर छापेमारी भी की गई थी. 

22 जुलाई 2026 को CID की छापेमारी के बाद खियांग्ते ने इस्तीफा दिया था. उन्होंने कहा था कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए वे पद छोड़ रहे हैं. खियांग्ते पर JPSC की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा के लिए पहले से ब्लैकलिस्टेड कंपनी TDPL को चुनने का आरोप है. प्रदर्शनकारी छात्र TDPL द्वारा आयोजित सभी परीक्षाएं रद्द करने की मांग कर रहे हैं. रविवार को JPSC के तीन सदस्यों ने भी इस्तीफा दिया था. 

रिटायरमेंट के बाद बनाए गए JPSC चेयरमैन

एल खियांग्ते राज्य के मुख्य सचिव पद से रिटायर होने के बाद पिछले साल फरवरी में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के चेयरमैन नियुक्त किए गए थे. खियांग्ते पर झारखंड की कई परीक्षाओं के संचालन का ठेका TSR Data Processing Limited (TDPL) को देने का आरोप है. TDPL को झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) ने अनियमितताओं के कारण ब्लैकलिस्ट किया था. इसके बावजूद एजेंसी का चयन किया गया.

TDPL के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी ने दावा किया कि खियांग्ते ने ठेका देने के बदले 2 करोड़ रुपये और सभी भुगतानों पर 20 फीसदी कमीशन मांगा था. हालांकि, ये आरोप मात्र हैं और झारखंड CID ने इस संबंध में अब तक कुछ नहीं कहा है.

अभय तिवारी का नाम क्यों चर्चा में है?

प्रदर्शन के दौरान छात्रों के हाथों में अभय तिवारी के पोस्टर भी दिखाई दिए. छात्र उसके खिलाफ नारे लगा रहे थे. CID के मुताबिक, अभय तिवारी पहले TDPL में मार्केटिंग मैनेजर था. बाद में वह गोड्डा जिले में ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर बना. जांच एजेंसी का दावा है कि परीक्षा अनियमितताओं के मामले में उसका नाम सामने आया है.

अभय तिवारी पर आरोप है कि वह प्रतियोगी परीक्षाओं में 'गारंटीड सिलेक्शन' का भरोसा देकर 25 से 40 लाख रुपये तक मांगता था. हालांकि, इन आरोपों की जांच जारी है और इस मामले में अंतिम निष्कर्ष आना बाकी है. छात्रों के पोस्टरों में उसके कई रिश्तेदारों के अलग-अलग भर्ती परीक्षाओं में चयन और रैंक का भी दावा किया गया. इन्हीं दावों को लेकर प्रदर्शन के दौरान उसके खिलाफ नारेबाजी हुई.

फिलहाल, छात्र अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं. सरकार बातचीत और कार्रवाई का भरोसा दे रही है. दूसरी तरफ बीजेपी ने झारखंड बंद का ऐलान कर सियासी लड़ाई को भी तेज कर दिया है. ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार और छात्र संगठनों के बीच बातचीत से कोई रास्ता निकलता है या आंदोलन आगे और तेज होता है.

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