चुनाव हारने के बाद स्मृति ईरानी को BJP ने राज्यसभा सांसद क्यों नहीं बनाया? अब खुद नेता ने बताई पूरी सच्चाई

Published on 6 सित॰ 2026

Time Published: Sunday, September 6, 2026, 15:40 [IST]

Smriti Irani News: लोकसभा चुनाव 2024 स्मृति ईरानी के राजनीतिक सफर का बड़ा मोड़ था। अमेठी में उन्हें कांग्रेस के किशोरी लाल शर्मा से हार मिली। इसके बाद सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की रही थी कि क्या बीजेपी उन्हें राज्यसभा के रास्ते फिर संसद भेजेगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। भाजपा ने उन्हें राज्यसभा क्यों नहीं भेजा? अब खुद स्मृति ईरानी ने इसपर प्रतिक्रिया दी है।

टाइम्स नाऊ को दिए हालिया इंटरव्यू में स्मृति ईरानी ने कहा कि बीजेपी में किसी पद को अपनी पहचान मानना सही नहीं है। उनके लिए संगठन में पद एक जिम्मेदारी और काम करने का मौका है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर उनके लिए सिर्फ राजनीतिक ताकत और पद मायने रखते तो वह कभी अमेठी जैसी सीट से चुनाव लड़ने नहीं जातीं।

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राज्यसभा क्यों नहीं मिली? स्मृति ईरानी ने क्या कहा

2024 में अमेठी हारने के बाद स्मृति ईरानी को दोबारा राज्यसभा भेजे जाने की अटकलें थीं। लेकिन पार्टी ने ऐसा फैसला नहीं लिया। स्मृति ईरानी ने इस पर किसी शिकायत या नाराजगी की बात नहीं कही। उन्होंने कहा,

"अगर मेरे लिए सिर्फ राजनीतिक ताकत मायने रखती तो मैं अमेठी नहीं जाती। वह ऐसी सीट थी जहां बीजेपी का इतिहास बहुत मजबूत नहीं रहा था। मेरे लिए वहां जाकर लड़ना और संगठन के लिए काम करना ज्यादा मायने रखता था।"

स्मृति ने कहा कि वह अपने राजनीतिक सफर को सिर्फ संसद की सदस्यता से नहीं जोड़तीं। उनके लिए पार्टी में काम करने का रास्ता लोकसभा या राज्यसभा की सीट से बड़ा है। स्मृति पहले राज्यसभा सांसद रह चुकी हैं। वह अगस्त 2011 में गुजरात से राज्यसभा पहुंची थीं। 2019 में अमेठी से लोकसभा जीतने के बाद उन्होंने राज्यसभा की सदस्यता छोड़ दी।

2019 में राहुल गांधी को हराया, फिर 2024 में हार गईं

स्मृति ईरानी और अमेठी की कहानी बीजेपी की सबसे चर्चित चुनावी कहानियों में रही है। 2014 में उन्होंने अमेठी से राहुल गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ा था। उस चुनाव में उन्हें हार मिली, लेकिन उन्होंने सीट नहीं छोड़ी। 2019 में उन्होंने फिर राहुल गांधी को चुनौती दी और इस बार नतीजा पूरी तरह बदल गया। स्मृति ने राहुल गांधी को हराकर बड़ा उलटफेर किया और मोदी सरकार में अपनी राजनीतिक हैसियत और मजबूत की।

लेकिन 2024 में तस्वीर फिर बदल गई। कांग्रेस ने किशोरी लाल शर्मा को मैदान में उतारा और उन्होंने स्मृति ईरानी को हरा दिया। इसके बाद स्मृति को राज्यसभा के रास्ते संसद में वापस लाने की चर्चा शुरू हुई, लेकिन पार्टी ने उन्हें राज्यसभा नहीं भेजा। अब 2026 में बीजेपी ने उन्हें राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी दी है। यानी संसद की सदस्यता न होने के बावजूद पार्टी संगठन में उन्हें बड़ी भूमिका मिली है।

'पद पहचान नहीं, काम करने का मौका है'

स्मृति ईरानी ने इंटरव्यू में अपने पुराने संगठनात्मक दिनों को भी याद किया। उन्होंने बताया कि बीजेपी युवा मोर्चा के साथ काम करने के दौरान उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वह एक दिन इतनी बड़ी राजनीतिक भूमिका में पहुंचेंगी।

उन्होंने कहा,

"मैंने 2003 में महाराष्ट्र युवा मोर्चा में पदाधिकारी के तौर पर शुरुआत की थी। उस समय मेरे साथ देवेंद्र फडणवीस उपाध्यक्ष थे। हम प्रमोद महाजन और गोपीनाथ मुंडे जैसे नेताओं को सामने से देखते थे। तब हमने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन हम यहां तक पहुंचेंगे। आज जब मैं और देवेंद्र मिलते हैं तो उन दिनों को याद करके हंसते हैं।"

स्मृति ईरानी का कहना है कि संगठन में काम करने वाले कार्यकर्ता के लिए पद से ज्यादा जरूरी यह है कि वह लोगों के साथ खड़ा रहे।

जब संगठन के काम के लिए घर से पेट्रोल के पैसे लेने पड़ते थे

स्मृति ने अपने शुरुआती राजनीतिक दिनों की एक दिलचस्प बात भी बताई। उन्होंने कहा कि उस वक्त पार्टी के कार्यक्रमों और संगठन के काम के लिए उन्हें खुद इधर-उधर जाना पड़ता था। उन्होंने बताया,

"हम उन दिनों ऐसे ही घूमते थे। घर से पेट्रोल और पानी के पैसे लेकर निकलते थे। घर वाले पूछते थे कि युवा मोर्चा में हो तो फिर पैसे क्यों चाहिए। हम कहते थे कि अपने साथियों की मदद के लिए चाहिए।"

उन्होंने अपने तत्कालीन संगठन मंत्री वी सतीश का भी जिक्र किया। स्मृति के मुताबिक, वह कार्यकर्ताओं को समझाते थे कि संगठन में आर्थिक रूप से कमजोर साथी को भी साथ लेकर चलना चाहिए। यही अनुभव बताते हुए स्मृति ने कहा कि जब कोई व्यक्ति ऐसे माहौल से राजनीति में आता है तो उसके लिए पद की अहमियत अपने आप कम हो जाती है।

PM मोदी के 'इग्नोर' वाले वीडियो पर क्या बोलीं स्मृति ईरानी

इंटरव्यू में पश्चिम बंगाल के एक कार्यक्रम का वायरल वीडियो भी चर्चा में आया। वीडियो में स्मृति ईरानी मंच पर भावुक दिखाई देती हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वहां पहुंचते हैं और वीडियो में उनका ध्यान दूसरी तरफ नजर आता है। इसके बाद सोशल मीडिया पर दावा हुआ कि पीएम मोदी ने स्मृति को नजरअंदाज किया।

स्मृति ने इस दावे को अलग नजरिए से देखा। उन्होंने कहा, "उस समय मैं और दादा यानी मिथुन चक्रवर्ती साथ बैठे थे। वीडियो में प्रधानमंत्री की पीठ दिखाई दे रही है। उन्हें कैसे पता होगा कि कौन उन्हें हाथ जोड़कर नमस्कार कर रहा है।"

उन्होंने कहा कि वह पूरा माहौल उनके लिए भावुक था। मंच पर ऐसे पुराने कार्यकर्ता मौजूद थे जिन्होंने पश्चिम बंगाल में बीजेपी के लिए लंबे समय तक काम किया और मुश्किल दौर देखा। स्मृति ने कहा,

"हमने बंगाल में प्रधानमंत्री के लिए बहुत कुछ सुना है। लेकिन उस वक्त ये बातें मायने नहीं रखती थीं। मायने रखती थी तो सिर्फ जीत। और सबसे ज्यादा मायने बंगाल का कार्यकर्ता और उसे मिलने वाला न्याय रखता है।"

तो क्या राज्यसभा न मिलना स्मृति के लिए झटका था?

स्मृति ईरानी के बयान से इतना साफ है कि वह 2024 के बाद राज्यसभा नहीं मिलने को अपने राजनीतिक करियर का अंत नहीं मानतीं। उनके लिए बीजेपी संगठन में नई भूमिका भी उतनी ही बड़ी है। उनका राजनीतिक सफर भी यही दिखाता है।

टीवी की दुनिया से राजनीति में आईं स्मृति पहले युवा मोर्चा में काम करती हैं, फिर राज्यसभा पहुंचती हैं, अमेठी में राहुल गांधी को हराती हैं, केंद्र में मंत्री बनती हैं और 2024 में चुनाव हारने के बाद भी पार्टी संगठन में वापसी करती हैं। हालिया इंटरव्यू में उनका संदेश साफ था। संसद की सीट से ज्यादा जरूरी संगठन में लगातार काम करते रहना है। और बीजेपी ने 2026 में राष्ट्रीय महासचिव बनाकर उन्हें एक बार फिर संगठन की अहम जिम्मेदारी दी है।