भारत में ब्रिक्स सम्मेलन 2026 का आज दूसरा दिन है. इसी समिट में शामिल होने के लिए आए ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने शनिवार को कहा कि ईरान अमेरिका और इजराइल के दबाव में नहीं झुकेगा. उन्होंने आरोप लगाया कि वे ईरान की सेना का सामना करने के बजाय आम लोगों के बुनियादी ढांचे, खाने-पीने की चीजों और रोजगार के साधनों को निशाना बना रहे हैं.
पेजेश्कियान ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, “अगर अमेरिकी योद्धा हैं, तो उन्हें हमारी बहादुर सेना का सामना करना चाहिए. आम लोगों के बुनियादी ढांचे, खाने-पीने की चीजों और रोजगार के साधनों पर युद्ध क्यों छेड़ा जा रहा है?” उन्होंने कहा, “अगर वे इंसान हैं, तो लोगों को पानी, खाना और दवा क्यों नहीं मिलने दे रहे? हमारे लोगों को डरा-धमकाकर झुकाया नहीं जा सकता. ईरान घुटने नहीं टेकेगा.”
अमेरिका के आरोपों पर क्या बोले?
पेजेश्कियान अभी ब्रिक्स समिट में शामिल होने के लिए भारत में हैं. उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा अमेरिका के लगाए गए सभी आरोपों को खारिज कर दिया, जिसमें तेहरान परमाणु हथियार बनाने वाली बात भी शामिल है. उन्होंने अमेरिका और इजराइल पर आरोप लगाया कि वे ईरान के परमाणु कार्यक्रम के बारे में दावों का इस्तेमाल सैन्य कार्रवाई के बहाने के तौर पर कर रहे हैं.
‘ईरान का परमाणु कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय नियमों के दायरे में था’
पेजेश्कियान ने कहा कि ईरान की परमाणु गतिविधियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर माने गए नियमों के दायरे में की गई थीं और उन्होंने देश की ‘न्यूक्लियर नॉन-प्रोलिफरेशन ट्रीटी’ (NPT) की सदस्यता का जिक्र किया.
उन्होंने कहा, “अब वे हमारी जमीन पर हमला करने के लिए बहाने और वजहें ढूंढ रहे हैं. ईरान के परमाणु कार्यक्रम की कड़ी अंतरराष्ट्रीय निगरानी की गई है और तेहरान NPT के दायरे में परमाणु मुद्दों पर बातचीत करने के लिए तैयार है. वे रोजाना ईरान में परमाणु गतिविधियों की सबसे ज्यादा निगरानी करते हैं. वे आए और निगरानी की, लेकिन हमने सब कुछ अंतरराष्ट्रीय सिद्धांतों के दायरे में रहकर किया.”
परमाणु दावे पर क्या बोले?
ईरान के राष्ट्रपति ने ये भी सवाल उठाया कि ईरान के परमाणु इरादों के बारे में अपने दावों को साबित करने के लिए वाशिंगटन और तेल अवीव के पास क्या ठोस सबूत हैं. उन्होंने इन दावों को जानबूझकर फैलाया गया प्रोपेगैंडा बताया.
पेजेश्कियान ने कहा कि तेहरान परमाणु मुद्दे पर बातचीत फिर से शुरू करने के लिए तैयार है, लेकिन उन्होंने अमेरिका के साथ सीधी बातचीत में तुरंत लौटने की संभावना को खारिज कर दिया. उन्होंने दोनों देशों के बीच भरोसे की भारी कमी का हवाला दिया.
उन्होंने कहा, “28 फरवरी को शुरू हुए युद्ध के पहले दिन ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ सीधी बातचीत करना बहुत मुश्किल होगा. उन्होंने किस आधार पर हमारे नेता को शहीद किया? यह हमारे समाज के लिए बहुत मुश्किल है.” जब उनसे पूछा गया कि क्या तेहरान बिना किसी शर्त के ट्रंप के साथ सीधी बातचीत के लिए तैयार होगा, तो पेजेशकियान ने कहा कि ईरान ऐसा फैसला तुरंत नहीं ले सकता.
ईरान का रुख क्या?
पेजेश्कियान ने दावा किया कि बाद में तेहरान और अमेरिका के बीच एक समझौता हुआ था और एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MOU) पर हस्ताक्षर किए गए थे, लेकिन आरोप लगाया कि बाद में वाशिंगटन ने उस समझौते को छोड़ दिया. पेजेशकियान ने कहा कि ईरान का रुख यही है कि प्रतिबंध हटाए जाने चाहिए और अमेरिका को देश पर हमले बंद करने चाहिए.
‘इजराइल के परमाणु कार्यक्रम की जांच क्यों नहीं होती?’
पेजेशकियान ने इजराइल की परमाणु क्षमताओं को लेकर होने वाली अंतरराष्ट्रीय जांच के स्तर पर भी सवाल उठाए और इस बात की ओर इशारा किया कि इजराइल NPT का सदस्य नहीं है. उन्होंने अमेरिका और इजराइल पर आरोप लगाया कि वे तेहरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के बहाने के तौर पर ईरान के इजराइली नीतियों के विरोध और फिलिस्तीनियों के समर्थन का इस्तेमाल करते हैं.
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