अगर आप हर साल सामान्य तरीके से ITR-1, ITR-2, ITR-3 या अन्य नियमित इनकम टैक्स रिटर्न भरते हैं, तो आपके लिए राहत की खबर है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने नया ITR-BN फॉर्म जारी किया है, लेकिन यह आम टैक्सपेयर्स के लिए नहीं है। यह फॉर्म सिर्फ उन लोगों या संस्थाओं के लिए बनाया गया है, जिनके यहां इनकम टैक्स विभाग की सर्च (Search), जब्ती (Seizure) या रिक्विजिशन (Requisition) की कार्रवाई होती है और जिन पर ब्लॉक असेसमेंट (Block Assessment) लागू होता है। यह नया फॉर्म आयकर अधिनियम, 2025 के तहत अधिसूचित किया गया है और 1 अप्रैल 2026 से लागू माना जाएगा। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।
दरअसल, ब्लॉक असेसमेंट एक विशेष प्रक्रिया है, जिसका इस्तेमाल आयकर विभाग तब करता है जब किसी छापेमारी के दौरान अघोषित आय या संपत्ति का पता चलता है। इस प्रक्रिया में विभाग एक-एक साल का अलग-अलग आकलन करने के बजाय कई सालों की आय की एक साथ जांच करता है। इसमें बिना हिसाब का कैश, सोना-चांदी, आभूषण, अन्य कीमती संपत्तियां, छिपे हुए कारोबारी लेनदेन या फर्जी खर्चों जैसी जानकारियां शामिल हो सकती हैं, जो छापे के दौरान सामने आती हैं।
CBDT के अनुसार, ITR-BN केवल उन्हीं लोगों को भरना होगा, जिन्हें आयकर विभाग की ओर से ब्लॉक असेसमेंट का नोटिस मिलेगा। अगर आपने कोई टैक्स नियम नहीं तोड़ा है और हर साल सामान्य ITR फाइल करते हैं, तो आपको इस नए फॉर्म से कोई लेना-देना नहीं है, यानी नौकरीपेशा, पेंशनभोगी, छोटे कारोबारी और सामान्य टैक्सपेयर्स पहले की तरह अपने नियमित ITR फॉर्म ही भरेंगे।
इस नए फॉर्म में टैक्सपेयर को PAN, आधार, पता, संपर्क जानकारी, रेजिडेंशियल स्टेटस जैसी सामान्य जानकारियां देनी होंगी। इसके अलावा ब्लॉक पीरियड के दौरान दाखिल किए गए पुराने ITR, उनकी एकनॉलेजमेंट संख्या, पहले घोषित आय, लंबित असेसमेंट या री-असेसमेंट की जानकारी भी देनी होगी। यह फॉर्म सर्च शुरू होने से पहले के अधिकतम 6 टैक्स सालों की जानकारी को कवर करेगा।
ITR-BN में अघोषित आय पर लगने वाले टैक्स, सरचार्ज, हेल्थ एंड एजुकेशन सेस और ब्याज की अलग से गणना करने का प्रावधान भी रखा गया है। हालांकि, ब्लॉक असेसमेंट की व्यवस्था नई नहीं है। इसे पहली बार 1995 में लागू किया गया था और बाद में 2001 में इसमें बदलाव कर ब्लॉक पीरियड को 10 साल से घटाकर 6 साल कर दिया गया। अब आयकर अधिनियम, 2025 के तहत ITR-BN को लाकर सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने की कोशिश की है। सबसे अहम बात यह है कि अगर आप एक सामान्य और नियमों का पालन करने वाले टैक्सपेयर हैं, तो आपको ITR-BN भरने की कोई जरूरत नहीं है।