CGPSC-DMF Scam: उत्कर्ष चंद्राकर और सतपाल छाबड़ा को जेल, पेपर के नाम पर 70 लाख लेने का दावा, महिला कैंडिडेट ने किया बड़ा खुलासा

Published on 6 सित॰ 2026

CGPSC-DMF Scam Update: छत्तीसगढ़ के DMF घोटाले के आरोपी सतपाल सिंह छाबड़ा (Satpal Singh Chhabra)  और CGPSC स्कैम के आरोपी उत्कर्ष चंद्राकर को कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। दोनों की 5 दिन की कस्टोडियल रिमांड (Custodial remand) खत्म होने के बाद शनिवार को ED ने उन्हें स्पेशल कोर्ट में पेश किया था।

कोर्ट में ED ने रिमांड बढ़ाने के लिए आवेदन नहीं दिया। सुनवाई के बाद कोर्ट ने दोनों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। इधर, CGPSC घोटाले की जांच में कैंडिडेट्स को परीक्षा के पेपर मुहैया कराने के नाम पर लाखों रुपए लेने की बात सामने आई है।

ED के वकील सौरभ पांडेय के मुताबिक, आरोपी उत्कर्ष चंद्राकर की मामले में भूमिका कैंडिडेट्स तक प्रीलिम्स और मेन्स के पेपर पहुंचाने की थी।

महिला कैंडिडेट बोली- प्रीलिम्स का पेपर 100% मैच हुआ

CGPSC मामले की जांच को लेकर एडवोकेट सौरभ पांडेय ने बताया कि जांच के दौरान एक महिला कैंडिडेट का बयान दर्ज किया गया है। उसके अनुसार, उसे प्रीलिम्स परीक्षा का पेपर पहले मुहैया कराया गया था। एग्जाम में पूछे गए 100 प्रतिशत सवाल उस पेपर से मैच हुए थे।

मेन्स का पेपर नहीं हुआ मैच

इसके बाद पीएससी मेन्स परीक्षा का पेपर मुहैया कराने के नाम पर उससे करीब 70 लाख रुपए लिए गए। महिला को कथित तौर पर मेन्स का पेपर दिखाकर मुहैया कराया गया, लेकिन जब वास्तविक परीक्षा हुई तो वह पेपर परीक्षा से मैच नहीं हुआ। एडवोकेट सौरभ पांडेय के मुताबिक, जांच में ऐसे और कैंडिडेट्स से पैसे लिए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

कई लोगों को भेजे गए समन

जांच के दौरान ऐसे लोगों को भी ED ने समन जारी किए गए हैं, जिनका मामले से सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ाव सामने आया है। हालांकि, जांच जारी होने के कारण अभी उनके नाम ओपन नहीं किए जा रहे हैं।

एडवोकेट सौरभ पांडेय ने बताया कि समन किए गए लोगों के बयान दर्ज किए जाएंगे। जांच के दौरान अगर किसी के खिलाफ ऐसा साक्ष्य मिलता है, जिससे हिरासत में लेकर पूछताछ की जरूरत लगे, तो उसकी कस्टडी मांगी जाएगी।

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60 दिन में जांच पूरी करने का टारगेट

जांच एजेंसी का टारगेट करीब 60 दिन में जांच पूरी कर प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दाखिल करने का है। जांच में सामने आने वाले बयानों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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