Published: Sunday, October 11, 2026, 15:42 [IST]
दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के तीन प्रमुख नेताओं अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को रिहाई तो मिल गई, लेकिन उनकी मुश्किलें पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। दिल्ली कैंट की स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कोर्ट में कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद तीनों को 11 अक्टूबर की सुबह छोड़ा गया। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, तीनों से 50-50 हजार रुपये का सिक्योरिटी बॉन्ड भरवाया गया है। उन्हें एक साल तक शांति और अच्छा व्यवहार बनाए रखने की शर्त पर रिहा किया गया है।
इस मामले में एक और चर्चा है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, रिहाई के बाद तीनों को लेने के लिए कोई समर्थक पुलिस स्टेशन नहीं पहुंचा। हालांकि इस दावे से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि पार्टी का जनसमर्थन घट गया है। असली सवाल यह है कि बॉन्ड की शर्तें CJP के आगे के प्रदर्शन और राजनीतिक गतिविधियों को कितना प्रभावित कर सकती हैं।
दिल्ली पुलिस ने बताया हिरासत में लेना क्यों जरूरी था?
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को 10 अक्टूबर 2026 को BNSS की धारा 126 और 170 के तहत निवारक हिरासत में लिया गया था। मुंबई से दिल्ली पहुंचने के बाद उन्हें एयर इंडिया की फ्लाइट से उतरते ही रोका गया।
यह कार्रवाई जंतर-मंतर पर प्रस्तावित बड़े प्रदर्शन से पहले हुई। CJP और कई विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन का आह्वान किया था। यह मांग मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR में कथित गड़बड़ियों को लेकर उठाई गई थी।
दावा किया गया है कि दिल्ली में सुरक्षा कार्रवाई के दौरान 7,000 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। अरविंद केजरीवाल और ममता बनर्जी जैसे विपक्षी नेताओं के भी प्रदर्शन में शामिल होने की कोशिश के दौरान रोके जाने का दावा किया गया है।
50 हजार का बॉन्ड और एक साल की शर्त क्या है?
दिल्ली पुलिस के आधिकारिक बयान के मुताबिक, अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका ने शांति और अच्छे व्यवहार के लिए 50-50 हजार रुपये का सिक्योरिटी बॉन्ड भरा। यह शर्त एक साल की अवधि के लिए रखी गई है।
कोर्ट ने साफ आदेश दिया है कि तीनों नेता किसी भी तरह की सार्वजनिक सभा नहीं करेंगे और न ही कोई कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वाला कदम उठाएंगे। अगर एक साल के भीतर इस बॉन्ड का कोई भी नियम टूटता है, तो पुलिस उन्हें तुरंत दोबारा गिरफ्तार करेगी और उन पर भारी आपराधिक धाराएं लगाई जाएंगी।
बॉन्ड का मतलब यह नहीं है कि तीनों को किसी अपराध में दोषी ठहरा दिया गया है। यह निवारक कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है। हालांकि, बॉन्ड की सटीक शर्तों को समझने के लिए अदालत का आदेश देखना जरूरी है। तीनों नेताओं पर सार्वजनिक सभाओं पर पूरी तरह रोक लगाने का दावा किया गया है।
BNSS की धारा 126 और 170 क्या हैं?
दिल्ली पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के नए कानूनी प्रावधानों का इस्तेमाल करते हुए 10 अक्टूबर 2026 को एयर इंडिया की मुंबई-दिल्ली फ्लाइट से उतरते ही तीनों को हिरासत में लिया था।
धारा 126 BNSS: यह धारा एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट को शक्ति देती है कि अगर शांति भंग होने या हिंसा फैलने की पक्की खबर हो, तो वह व्यक्ति से शांति बनाए रखने का कानूनी बॉन्ड भरवा सकते हैं।
धारा 170 BNSS: यह पुलिस को बिना वारंट और बिना मजिस्ट्रेट के आदेश के ऐसे व्यक्ति को एहतियातन गिरफ्तार करने का अधिकार देती है, जो कोई संज्ञेय अपराध करने की योजना बना रहा हो और उसे रोकने का दूसरा रास्ता न हो।
क्या 'नो गैदरिंग' की शर्त CJP के प्रदर्शन पर असर डालेगी?
अगर अदालत के आदेश में सार्वजनिक सभा या किसी खास गतिविधि पर स्पष्ट रोक है, तो तीनों नेताओं को उसका पालन करना होगा। लेकिन केवल शांति बनाए रखने का बॉन्ड भरने से हर तरह के शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर अपने आप प्रतिबंध नहीं लग जाता। इसके लिए आदेश की वास्तविक भाषा और लागू कानून को देखना होगा।
CJP ने रिहाई के बाद सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी और प्रदर्शन जारी रखने की बात दोहराई। ऐसे में आगे पार्टी की रणनीति इस बात पर निर्भर करेगी कि वह कानूनी शर्तों के दायरे में रहते हुए अपना विरोध किस तरह दर्ज कराती है।