पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की यह टीम देश के 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करती है। मकसद साफ है- कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी और पूर्वोत्तर तक हर इलाके की आवाज को संगठन में जगह दी जाए।
भारतीय जनता पार्टी ने अपनी नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी का ऐलान करके आगामी 2029 लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनावों के लिए अपना बड़ा सियासी दांव चल दिया है। 64 सदस्यों वाली इस नई टीम में पुराने तजुर्बे, युवाओं के जोश, प्रांतीय विविधता और सोशल इंजीनियरिंग का जबरदस्त मेल देखने को मिल रहा है। सबसे खास बात यह है कि पूरी टीम में 40 फीसदी से ज्यादा सीटें वंचित, पिछड़े और दलित समुदायों के नेताओं को सौंपी गई हैं।
पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की यह टीम देश के 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करती है। मकसद साफ है- कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी और पूर्वोत्तर तक हर इलाके की आवाज को संगठन में जगह दी जाए।
पूर्वोत्तर और आदिवासियों पर खास दांव
भाजपा ने पूर्वोत्तर राज्यों पर अपना विशेष फोकस बरकरार रखा है। त्रिपुरा, असम और नागालैंड से एक-एक नेता को राष्ट्रीय टीम में जगह दी गई है। इसके साथ ही डॉक्टर संबित पात्रा के नेतृत्व में काम करने वाला 'नॉर्थ-ईस्ट कोऑर्डिनेशन सेल' पहले की तरह सक्रिय रहेगा।
आदिवासी (ST) समाज को साधने के लिए मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और पूर्वोत्तर से चार प्रमुख नेताओं को शामिल किया गया है, जिनमें दो महिला नेता हैं। वहीं उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और मध्य प्रदेश से दलित (SC) समुदाय के तीन बड़े चेहरों को जगह दी गई है।
10 महिला चेहरे और हर धर्म का प्रतिनिधित्व
महिला नेतृत्व को बढ़ावा देने के लिए पार्टी ने 10 अनुभवी महिला नेताओं को राष्ट्रीय पदाधिकारियों की लिस्ट में शामिल किया है।
सोशल और धार्मिक समावेश की बात करें तो इस टीम में सिर्फ हिंदू चेहरे ही नहीं हैं, बल्कि एक सिख, दो ईसाई, एक मुस्लिम, एक जैन और एक पारसी समुदाय के नेता को भी जगह दी गई है।
सरकार चलाने का अनुभव और पेशेवरों की फौज
नई टीम में सिर्फ चुनावी रणनीतिकार ही नहीं हैं, बल्कि प्रशासनिक तजुर्बे की भी कोई कमी नहीं है।
राजस्थान की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे, उत्तराखंड के पूर्व सीएम तीरथ सिंह रावत और त्रिपुरा के पूर्व सीएम बिप्लब कुमार देव जैसे अनुभवी चेहरों को फ्रंट लाइन में रखा गया है। साथ ही केंद्र सरकार में मंत्री रहे 4 पूर्व मंत्रियों और 1 मौजूदा केंद्रीय मंत्री को भी संगठन में बड़ी जिम्मेदारी दी गई है।
पेशेवर विविधता की बात करें तो टीम में 4 प्रैक्टिसिंग डॉक्टर, 2 प्रोफेसर, कई पीएचडी होल्डर्स, इंजीनियर, चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) और वकील शामिल हैं, जो नीतिगत मामलों में पार्टी को जमीन से जुड़ा फीडबैक देंगे।
क्या 2029 के लिए बीजेपी की टीम तैयार?
वसुंधरा राजे, राम माधव, स्मृति ईरानी जैसे पुराने चेहरे वापस लाए गए, यह 2029 लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी में स्थिरता और अनुभव का संकेत है।
साथ ही Gen-Z और युवा नेताओं के साथ महिलाओं को भी शामिल किया गया, यह नई पीढ़ी को जोड़ने की रणनीति है। इसके जरिए बीजेपी पुराने वोट बैंक को बरकरार रखते हुए नए युवा वोटर्स को भी टारगेट कर रही है।
10 साल से ज्यादा समय से बीजेपी का IT सेल संभाल रहे अमित मालवीय से सोशल मीडिया डिपार्टमेंट की जिम्मेदारी लेकर उनकी जगह दीपक म्हास्के को दी गई, यह डिजिटल स्ट्रैटेजी में नई सोच का संकेत है।
महाराष्ट्र, दिल्ली, उत्तराखंड और हरियाणा से चार सोशल मीडिया को-कन्वीनर नियुक्त किए गए। यह मल्टी-प्लेटफॉर्म और रीजनल कंटेंट पर फोकस दिखाता।
2024 से पहले सोशल मीडिया से बड़ी जीत मिली, लेकिन 2029 तक आते-आते AI, डीपफेक, और नए प्लेटफॉर्म का दायरा बढ़ जाएगा, जिसके लिए एक नई टीम चाहिए।
नितिन नवीन की नई टीम में 10 महिलाओं को शामिल करना, यह नारी शक्ति और महिला वोटर्स को टारगेट करने की रणनीति है।
इसके अलावा लाल सिंह आर्य (SC मोर्चा), तारिक मंसूर (अल्पसंख्यक), गजेंद्र पटेल (OBC) जैसे नेताओं को जोड़ कर यह सामाजिक न्याय के साथ वोट बैंक को संतुलित करने की कोशिश है। विपक्ष के जातिगत ध्रुवीकरण के जवाब में बीजेपी समावेशी चेहरे आगे कर रही है।
कैसी है बीजेपी के स्टेट लेवल रणनीति?
आगामी 2027 के 10 से ज्यादा राज्य चुनाव- उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और आदि को 2029 का सेमी फाइनल माना जा रहा है। ऐसे में पार्टी ने राजस्थान से वसुंधरा राजे पंजाब से मनप्रीत सिंह बादल, उत्तर प्रदेश से तारिक मंसूर को पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया। साथ ही गुजरात और दिल्ली के स्थानीय नेताओं को भी जिम्मेदारी दी गई ताकि गृह राज्य में पकड़ बरकरार रखी जाए।
बीजेपी का साफ और सीधा संदेश है कि संगठन मजबूत और स्थिर रखना, ताकि 2029 में बूथ लेवल तक पहुंच मजबूत रहे। यह उसकी लोकसभा चुनाव की लंबी रणनीति का हिस्सा है। पार्टी अनुभव, युवा, महिला, और सामाजिक न्याय का संतुलन बनाकर व्यापक वोट बैंक बनाना चाहती है, जबकि डिजिटल और जमीनी संगठन को मजबूत रखकर 2029 में तीसरी बार सत्ता में वापसी का रास्ता तैयार कर रही है।