By Oneindia Staff
Published: Sunday, September 13, 2026, 8:19 [IST]
Divya Shrivastava CM Yogi press conference controversy: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान तीखे सवाल पूछने वाली स्वतंत्र महिला पत्रकार दिव्या श्रीवास्तव (Divya Shrivastava) अचानक देश भर की सुर्खियों में आ गई हैं। दिव्या श्रीवास्तव का दावा है कि उनके सवाल सुनकर सीएम मोदी बिना जवाब दिए मंच छोड़कर चले गए। इसके बाद से सोशल मीडिया पर एक तरफ जहां सियासी घमासान छिड़ गया है, वहीं दूसरी तरफ महिला पत्रकार को लगातार धमकियों का सामना करना पड़ रहा है।
दिव्या श्रीवास्तव ने दावा किया है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस वाले वीडियो वायरल होने के बाद उन्हें रेप और जान से मारने की धमकी आ रही है। इंस्टाग्राम पर 12 सितंबर को देर रात वीडियो शेयर करते हुए उन्होंने कहा, ''नींद नहीं आ रही मुझे! आज इस बात की सजा मिल गई मुख्यमंत्री योगी से सवाल पूछ लिया!क्यों? मेरी डिग्री का क्या फायदा हुआ कि कुछ कर नहीं पाई! क्यों गलत बोल रहे हो यार! प्लीज प्लीज मै क्या करूं बताइए!''
मामला यहीं नहीं रुका। सोशल मीडिया पर दिव्या को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दावे भी किए जाने लगे। कुछ पोस्ट में उन्हें समाजवादी पार्टी या कांग्रेस से जुड़ा बताया गया। दिव्या ने इन आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि वह स्वतंत्र पत्रकार हैं और उनके सवालों को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की जा रही है। ऐसे में आइए जानते हैं कि ये पूरा मामला क्या है और दिव्या श्रीवास्तव कौन हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में आखिर हुआ क्या?
दिव्या श्रीवास्तव के मुताबिक, उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सवाल पूछे। उनके सवालों के बाद सीएम योगी मुस्कुराए और वहां से निकल गए। घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर साझा किया गया, जिसे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और अखिलेश यादव,कांग्रेस समेत कुछ राजनीतिक लोगों ने अपने पोस्ट में इस्तेमाल किया।
दिव्या का कहना है कि कार्यक्रम से बाहर निकलते वक्त खुद को बीजेपी समर्थक बताने वाले कुछ लोगों ने उन पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि उनसे पूछा गया कि वह किस चैनल के लिए काम करती हैं और उनके साथ बदसलूकी भी की गई। इस पूरे मामले पर बीजेपी की तरफ से इस इनपुट में कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं दी गई है।
दिव्या श्रीवास्तव कौन हैं और क्या करती हैं? (Who Is Divya Shrivastava)
- दिव्या श्रीवास्तव एक स्वतंत्र डिजिटल पत्रकार हैं। उन्होंने इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी (IGNOU) से पत्रकारिता में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है और फिलहाल पीएचडी (PhD) की तैयारी कर रही हैं।
- सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि सवाल पूछने की वजह से दिव्या को उनके चैनल से निकाल दिया गया है। हालांकि दिव्या ने 'द पायनियर' से बातचीत में इन अफवाहों को खारिज करते हुए कहा कि वे अभी भी अपने नेटवर्क के साथ जुड़ी हुई हैं और काम कर रही हैं।
- दिव्या के इंस्टाग्राम अकाउंट @journalism_with_divya/ पर एक लाख 15 हजार फॉलोअर्स हैं। (खबर लिखे जाने तक) अपने बॉयो में दिव्या ने खुद को एंकर, क्रिएटर और पत्रकार कहा है। दिव्या लखनऊ में रहती हैं.
- दिव्या का कहना है कि पत्रकारिता में उन्होंने सवाल पूछने और सत्ता से जवाब मांगने की भूमिका को हमेशा अहम माना है। लेकिन इस घटना के बाद उनके मन में यह सवाल उठा कि क्या पत्रकारिता में सत्ता से सवाल पूछने की आजादी पहले जैसी बची है।
- उन्होंने यह भी कहा कि वर्षों की पत्रकारिता की पढ़ाई के बाद कभी-कभी उन्हें लगता है कि कहीं यह मेहनत बेकार तो नहीं गई। उनका सवाल सिर्फ अपने मामले तक सीमित नहीं है। वह इस बात पर भी सवाल उठाती हैं कि पत्रकारों को उनके सवालों के आधार पर कभी 'एंटी-मीडिया' तो कभी 'गोदी मीडिया' कहकर पहचान देने की कोशिश क्यों होती है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद क्या-क्या हुआ?
दिव्या श्रीवास्तव ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि सवाल पूछने के बाद जब वे बाहर निकल रही थीं, तो कुछ लोगों ने उन्हें घेर लिया और बदसलूकी की। उनसे पूछा गया कि वे किस चैनल से आई हैं। दिव्या का आरोप है कि उन्हें सोशल मीडिया पर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का एजेंट बताकर ट्रॉल किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि इस घटना के बाद से उन्हें ऑनलाइन धमकियां मिल रही हैं, जिससे उनका पूरा परिवार सहमा हुआ है और वे घर से बाहर निकलने में डर महसूस कर रही हैं। दिव्या का कहना है, "इस कड़वे अनुभव ने मुझे यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या भारत में सत्ता से सवाल पूछने की आजादी का वजूद खत्म हो चुका है? क्या मेरी सालों की पढ़ाई बेकार चली गई?"
इस विवाद के बीच सोशल मीडिया पर यह दावा भी सामने आया कि दिव्या को उनके समाचार संस्थान से निकाल दिया गया है। दिव्या ने इस दावे को गलत बताया। उनका कहना है कि वह अब भी उसी समाचार संस्थान के साथ काम कर रही हैं।
अखिलेश यादव और विपक्ष का सीएम योगी पर करारा हमला
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी इस घटना को लेकर योगी सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में सवाल बहुत हैं, लेकिन सरकार के पास उनके जवाब नहीं हैं। अखिलेश ने तंज कसते हुए कहा कि अगर पत्रकारों को सिर्फ बयान सुनना है और सवाल पूछने की इजाजत नहीं है, तो 'प्रेस कॉन्फ्रेंस' का नाम बदलकर 'प्रेस मोनोलॉग' कर देना चाहिए।
उन्होंने लिखा,
"नाम बदलनेवाले अब 'प्रेस वार्ता' का नाम बदलकर 'प्रेस एकालाप' कर दें क्योंकि जब सिर्फ़ बयान दिया जाना है और प्रेस को सवाल पूछने का अधिकार ही नहीं है तो बिना वार्तालाप 'वार्ता' शब्द का क्या अर्थ रह जाता है? माननीय सबका समय क्यों खराब कर रहे हैं, प्रेस रिलीज भेजकर ही काम चलाएं और दोनों का समय बचाएं। सत्य ये है कि उप्र में सवालों की भरमार है लेकिन इनके पास जवाब ही नहीं हैं। मुँह मोड़ कर जाना, मैदान छोड़कर भागना भी कहलाता है। ये शासन में पक्षपात करते हैं और प्रेस वार्ता में एकतरफा बयानबाजी। अब क्या ये भी कहेंगे कि 'प्रश्न सुनने के मूड में नहीं है।'''
कॉकरोच जनता पार्टी और कांग्रेस भी मैदान में
कॉकरोच जनता पार्टी ने भी कथित घटना का वीडियो साझा करते हुए योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधा। पार्टी ने दावा किया कि पत्रकार सवाल करती रहीं और मुख्यमंत्री वहां से चले गए। अपने पोस्ट में पार्टी ने इसे प्रेस की स्वतंत्रता से जोड़ते हुए भारत की प्रेस फ्रीडम रैंकिंग का हवाला दिया।
कांग्रेस ने इससे आगे बढ़कर दिव्या की नौकरी और सुरक्षा को लेकर दावा किया। पार्टी ने आरोप लगाया कि सवाल पूछने के बाद महिला पत्रकार को नौकरी से हटाया गया और बीजेपी कार्यालय में उन्हें घेरकर धमकाया गया। इन धमकियों में कथित तौर पर बुलडोजर कार्रवाई की बात भी शामिल थी।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि सवाल पूछने पर पत्रकार की नौकरी और सुरक्षा पर संकट पैदा होना उस सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है, जो सुशासन का दावा करती है। उन्होंने इसे पत्रकार पर हमला ही नहीं, बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला बताया।
फिलहाल इस पूरे विवाद में बीजेपी की ओर से प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में तस्वीर के दो हिस्से अलग-अलग हैं। एक तरफ दिव्या श्रीवास्तव के सवाल पूछने, ऑनलाइन धमकियों और राजनीतिक लेबल लगाए जाने के आरोप हैं। दूसरी तरफ विपक्षी दलों के राजनीतिक हमले हैं। अब इस विवाद का अगला अहम सवाल यही है कि संबंधित पक्ष इन आरोपों पर क्या आधिकारिक जवाब देते हैं और पत्रकार की सुरक्षा को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं।