हरियाणा के पूर्व CM चौधरी भजनलाल की बेटी रोशनी बिश्नोई को SIT की पूछताछ के बाद छोड़ने पर गुरुग्राम की विशेष अदालत ने कड़ी टिप्पणी की है। रोशनी बिश्नोई पर मृत व्यक्ति के नाम से फर्जी दस्तावेज तैयार कर प्लॉट ट्रांसफर कराने के मामले में केस दर्ज है। रोश
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वहीं, 14 सितंबर को SIT ने रोशनी से पूछताछ की और बाद में उन्हें छोड़ दिया। इस पर कोर्ट ने SIT की कार्यप्रणाली पर ऐतराज जताया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि एक ही घटना और समान परिस्थितियों से जुड़े मामलों में जांच एजेंसी का अलग-अलग आरोपियों के साथ अलग रवैया नहीं हो सकता।
इस मामले में जूडीशियल मजिस्ट्रेट (फर्स्ट क्लास) श्रीदेव राय ने टिप्पणी करते हुए कहा-

जांच एजेंसी कानून के अनुसार निष्कर्ष निकालने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है, लेकिन जब रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री से जांच का रुख बदलता दिखे और एक ही घटना से जुड़े आरोपियों के साथ अलग-अलग तरीके अपनाए गए हो, तो कोर्ट स्पष्टीकरण मांगने का हक रखता है। यदि परिस्थितियां समान हैं, तो अलग कार्रवाई के लिए SIT के पास ठोस और प्रमाणित कारण होने चाहिए।


कोर्ट के 4 मुख्य सवाल, जिन पर SIT घिरी…
अन्य आरोपी जेल में, फिर रोशनी बिश्नोई को राहत क्यों?
कोर्ट ने टिप्पणी की- इसी FIR और समान घटना में शामिल कई अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, उन पर मुकदमा चला और वे लंबे समय तक हिरासत में रहे। फिर रोशनी बिश्नोई को जांच में शामिल करके बिना गिरफ्तार किए छोड़ने के पीछे क्या ठोस कारण हैं।
₹2.38 करोड़ के संदिग्ध ट्रांजेक्शन की जांच का क्या हुआ?
कोर्ट ने मृतक सुनील कुमार के खाते से रोशनी बिश्नोई के खाते में करीब ₹2.38 करोड़ के ट्रांजेक्शन, ई-मेल आईडी और सह-आरोपी के बयान समेत जांच में सामने आई सामग्री का जिक्र किया। कोर्ट ने सवाल उठाया कि इन तथ्यों के बावजूद SIT किस आधार पर गिरफ्तारी योग्य सबूत नहीं होने के निष्कर्ष पर पहुंची।
जांच अधूरी, फिर भी ठोस सबूत न होने का दावा कैसे?
कोर्ट ने कहा कि जब दस्तावेजों का सत्यापन, बैलेंस शीट और गूगल से ई-मेल पत्राचार की प्रक्रिया अभी लंबित है, तो SIT ने यह निष्कर्ष इतनी जल्दबाजी में कैसे निकाल लिया।
15 सितंबर की पेशी के बावजूद कोर्ट में पेश क्यों नहीं किया?
कोर्ट ने कहा कि SIT को पता था कि रोशनी बिश्नोई के खिलाफ वारंट और उद्घोषणा की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और 15 सितंबर को उनकी कोर्ट में पेशी तय थी। ऐसे में 14 सितंबर को उनके SIT के सामने उपलब्ध होने के बावजूद उन्हें हिरासत में लेकर कोर्ट में पेश करने के बजाय छोड़ने का कारण क्या था।

कुलदीप बिश्नोई की इकलौती बहन हैं रोशनी बिश्नोई। (फाइल)
29 सितंबर को SIT को देना होगा जवाब
रोशनी बिश्नोई के एडवोकेट ने उद्घोषणा की कार्रवाई रद्द करने के लिए आवेदन दाखिल किया था। इस पर कोर्ट ने फिलहाल कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया, क्योंकि रोशनी खुद कोर्ट में उपस्थित नहीं हुईं।
कोर्ट ने SIT को 29 सितंबर तक केस डायरी और संबंधित रिकॉर्ड के साथ कोर्ट के सभी 11 बिंदुओं पर बिंदुवार स्पष्टीकरण देने के आदेश दिए हैं। संबंधित जांच अधिकारी को भी रिकॉर्ड के साथ व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि SIT के रुख और उसके स्पष्टीकरण पर विचार किए बिना रोशनी बिश्नोई को आरोपी के तौर पर दोषी नहीं माना जाएगा।
अब जानिए क्या है पूरा मामला…
- मृत व्यक्तियों के नाम पर फर्जीवाड़े का आरोप: गुरुग्राम के सेक्टर-14 थाने में दर्ज FIR के मुताबिक, शिकायतकर्ता धर्मवीर बिश्नोई ने रोशनी बिश्नोई और उनके पति अनूप बिश्नोई पर मृत व्यक्तियों के नाम पर कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार करवाने और उनका इस्तेमाल संपत्ति के सौदों में करने के आरोप लगाए हैं।
- फर्जी पैन कार्ड से प्लॉट ट्रांसफर कराने का आरोप: शिकायत के अनुसार, फर्जी पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस के जरिए सेक्टर-23 और 23A के प्लॉटों की खरीद-फरोख्त की गई। पुलिस ने धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश समेत IPC की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू की।
- पिता-चाचा के नाम थे प्लॉट: शिकायतकर्ता धर्मवीर के मुताबिक, सेक्टर-23 और 23A में उसके पिता सुनील और चाचा संदीप कुमार के प्लॉट थे। चाचा संदीप की 1 जुलाई 2004 को मौत हो चुकी थी। आरोप है कि उनकी मौत के कई साल बाद उनके नाम के प्लॉट को फर्जी दस्तावेजों के जरिए ट्रांसफर किया गया।
- दूसरे व्यक्ति को पेश करने का आरोप: शिकायत के अनुसार, संदीप कुमार की जगह किसी दूसरे व्यक्ति को पेश कर पजेशन सर्टिफिकेट और NOC हासिल की गई। इसके बाद फर्जी हलफनामे और अन्य दस्तावेजों के आधार पर 2017 में प्लॉट की कन्वेंस डीड कराई गई और उसे नीलम सिक्का, अशोक कुमार और राज कुमार सिक्का के नाम ट्रांसफर कर दिया गया।
- पैन कार्ड-ड्राइविंग लाइसेंस पर अलग-अलग फोटो: आरोप है कि संदीप कुमार के नाम से बने पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस पर अलग-अलग लोगों की तस्वीरें लगी थीं। शिकायतकर्ता का दावा है कि फर्जी हस्ताक्षरों और दस्तावेजों का सत्यापन किए बिना ही कन्वेंस डीड रजिस्टर कर दी गई।