रांची2 घंटे पहले
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पुराने दस्तावेजों की अनिवार्यता ने मतदाताओं की बढ़ा दी हैं मुश्किलें
विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के तहत नाम जुड़वाने और सुधार करवाने की अंतिम दिन की सूचना पर मंगलवार को रांची के विभिन्न अंचल कार्यालयों में मतदाताओं की भारी भीड़ उमड़ी। हेहल, हिनू और रांची अंचल कार्यालयों में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। पुराने दस्तावेजों की अनिवार्यता ने मतदाताओं की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
अंचल कार्यालयों में चल रहे मतदाता मैपिंग अभियान के दौरान ऐसे कई मामले सामने आए, जहां अनाथ महिला पुराने पारिवारिक कागजात नहीं होने से मैपिंग नहीं करा सकी। 20 वर्षों से मतदान कर रहे व्यक्ति का नाम 2003 की सूची में नहीं मिला। दिव्यांग बुजुर्ग मां के दस्तावेज पूरे होने के बावजूद बेटे को दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़े। वहीं, गोद में मासूम को लेकर पहुंचे जावेद ने दशकों से रांची में रहने के बावजूद स्थानीयता साबित करने में आ रही परेशानी बताई। प्रशासनिक जटिलताओं, अनुपस्थित कर्मचारियों और पुराने दस्तावेजों की मांग के कारण कई लोगों को निराश भी लौटना पड़ा। प्रक्रियाओं के सरल न होने और तकनीकी-दस्तावेजी अड़चनों के कारण शहर के सैकड़ों योग्य मतदाता सूची में शामिल होने और मैपिंग कराने से वंचित रह गए।
अंचल कार्यालयों में मतदाताओं ने बताई अपनी परेशानी
हेहल अंचल कार्यालय पहुंची विनीता कुमारी ने बताया कि बचपन में ही उनके माता-पिता का निधन हो गया था। आवश्यक पुराने कागजात न होने के कारण उनकी मैपिंग नहीं हो सकी। सवाल उठाया कि अगर दस्तावेज नहीं हैं, तो क्या उसे मताधिकार से वंचित कर दिया जाएगा।
असंभव लग रहे दस्तावेज मांग रहे
हेहल अंचल में पिता का काम कराने पहुंची पूजा कैथा ने बताया कि उनके पिता बीते 20 वर्षों से वोट डाल रहे हैं, लेकिन 2003 की मतदाता सूची में उनका नाम नहीं दिख रहा है। ऐसे दस्तावेज मांगे जा रहे हैं जिन्हें जुटाना असंभव जैसा है।
मां संग दफ्तरों के चक्कर काट रहे
हिनू अंचल पहुंचे राजेश एक्का ने बताया कि उनकी 70 वर्षीय मां मरियम एक्का दिव्यांग हैं। सभी कागजात होने के बावजूद कभी बीएलओ तो कभी संबंधित कर्मी के न मिलने से काम नहीं हो सका। मां को बार-बार कार्यालय लाना बेहद कष्टदायी साबित हो रहा है।
गोद में मासूम को लिए पहुंचे जावेद
हिंदपीढ़ी नदी ग्राउंड निवासी मोहम्मद जावेद पत्नी और बहन की उम्र संबंधी विसंगति सुधारने के लिए रांची अंचल कार्यालय पहुंचे। कहा कि दशकों से रांची में रहने पर भी स्थानीयता साबित करने के नाम पर परेशान किया जा रहा है।
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