प्रियंका गांधी के 'गोमूत्र विशेषज्ञ' बयान पर विवाद: CSJMU कुलपति विनय पाठक बोले- वैज्ञानिकों को राजनीति से दूर रखें, बयान वापस लें - Kanpur News

Published on 31 जुल॰ 2026

कानपुर14 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक
भारतीय विश्वविद्यालय संघ (AIU) के अध्यक्ष और CSJMU कुलपति प्रो. विनय पाठक। - Dainik Bhaskar

भारतीय विश्वविद्यालय संघ (AIU) के अध्यक्ष और CSJMU कुलपति प्रो. विनय पाठक।

लोकसभा में एंटी-पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान IIT मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामकोटि को लेकर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा की टिप्पणी पर विवाद खड़ा हो गया है। CSJMU कानपुर के कुलपति प्रो. विनय पाठक ने बयान पर आपत्ति जताते हुए इसे वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों का अपमान बताया है।

प्रो. विनय पाठक ने वीडियो जारी कर कहा कि वैज्ञानिक किसी राजनीतिक दल से जुड़े नहीं होते, बल्कि वे देश की ज्ञान परंपरा का हिस्सा होते हैं। उन्होंने सभी दलों से ऐसे बयानों की निंदा करने और प्रियंका गांधी से बयान वापस लेने की मांग की।

दरअसल, लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशंस अमेंडमेंट बिल पर चर्चा के दौरान प्रियंका गांधी ने प्रो. वी. कामकोटि की कमेटी में सदस्यता पर सवाल उठाते हुए उन्हें "गोमूत्र विशेषज्ञ" कहकर तंज कसा था। उनके इस बयान के बाद वैज्ञानिक और शिक्षा जगत में प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं।

"वैज्ञानिकों को राजनीति के चश्मे से नहीं देखना चाहिए"

प्रो. विनय पाठक ने कहा कि देश के वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने सदन में कमेटी को लेकर जो टिप्पणी की कि उसमें "गोमूत्र के एक्सपर्ट" शामिल हैं, उससे देश के वैज्ञानिक और शिक्षाविद आहत हैं।

भारत की परंपरा में विद्वानों को हमेशा सम्मान दिया गया है। हमारे उपनिषदों और ज्ञान परंपरा में भी कहा गया है कि 'विद्वान सर्वत्र पूज्यते'। वैज्ञानिक और शिक्षाविद किसी राजनीतिक दल से जुड़े नहीं होते, बल्कि वे पूरे देश और समाज के लिए काम करते हैं।

प्रो. पाठक ने कहा कि प्रो. वी. कामकोटि देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक हैं और IIT मद्रास जैसे महत्वपूर्ण संस्थान के निदेशक हैं। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि ऐसे बयानों की निंदा होनी चाहिए और इस तरह की टिप्पणी को वापस लिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों का दायित्व है कि वे देश की ज्ञान परंपरा और नए शोध को आगे बढ़ाएं। ऐसे बयानों से शिक्षा और वैज्ञानिक सोच को नुकसान पहुंचता है, इसलिए सभी को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए।

लोकसभा में चर्चा के दौरान शुरू हुआ विवाद

दरअसल, यह विवाद लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशंस अमेंडमेंट बिल, 2026 पर चर्चा के दौरान शुरू हुआ। परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए गठित हाई पावर कमेटी में IIT मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामकोटि को सदस्य बनाया गया है।

चर्चा के दौरान प्रियंका गांधी वाड्रा ने प्रो. कामकोटि की कमेटी में सदस्यता पर सवाल उठाते हुए उन्हें "गोमूत्र विशेषज्ञ" कहकर टिप्पणी की थी। उनका यह बयान प्रो. कामकोटि के गोमूत्र पर किए गए शोध के संदर्भ में था।

प्रो. कामकोटि IIT मद्रास के निदेशक हैं

प्रो. वी. कामकोटि देश के जाने-माने कंप्यूटर वैज्ञानिक हैं और IIT मद्रास के निदेशक के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने कंप्यूटर साइंस और तकनीक के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण काम किए हैं।

उनका नाम परीक्षा सुधार से जुड़ी कमेटी में शामिल किए जाने के बाद ही यह राजनीतिक विवाद शुरू हुआ। अब इस मामले में शिक्षा जगत के लोगों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं।

कुलपति ने बयान वापस लेने की मांग की

प्रो. विनय पाठक ने प्रियंका गांधी वाड्रा से अपने बयान को वापस लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि किसी भी वैज्ञानिक के बारे में टिप्पणी करते समय उनके योगदान और पद की गरिमा का ध्यान रखना चाहिए।

उन्होंने कहा कि देश के विश्वविद्यालयों और वैज्ञानिक संस्थानों में काम करने वाले लोगों को राजनीति से अलग रखकर देखा जाना चाहिए। वैज्ञानिकों का सम्मान देश की प्रगति के लिए जरूरी है।

.

खबरें और भी हैं...

  • बात खरी है

    साइकिल पर दानपेटी बांधकर चलेगी अखिलेश टीम: अमेरिका जैसा एक्सप्रेस-वे 2-2 बार जख्मी, पुलिसवालों को अपना योद्धा मिला

    अमेरिका जैसा एक्सप्रेस-वे 2-2 बार जख्मी, पुलिसवालों को अपना योद्धा मिला|उत्तरप्रदेश,Uttar Pradesh - Dainik Bhaskar1:43
    • कॉपी लिंक

    शेयर