कौन हैं रुमेश पथिरागे? 134 KMPH की रफ्तार से गेंद फेंकते थे, अब नीरज चोपड़ा को हराकर बने CWG चैम्पियन

Published on 1 अग॰ 2026

शुक्रवार (31 जुलाई) को ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में मेन्स जैवलिन थ्रो का फाइनल उम्मीदों से कहीं ज्यादा रोमांचक साबित हुआ. दुनिया के दिग्गज भाला फेंक खिलाड़ियों के बीच श्रीलंका के युवा खिलाड़ी रुमेश थरंगा पथिरागे ने सबसे लंबा थ्रो करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया.

23 वर्षीय रुमेश ने 89.75 मीटर का दमदार थ्रो किया. वहीं भारत के नीरज चोपड़ा 85.83 मीटर के साथ सिल्वर मेडल तक सीमित रहे, जबकि भारत के ही यशवीर सिंह ने 85.41 मीटर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ (PB) थ्रो करते हुए ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया. सबसे दिलचस्प बात यह रही कि रुमेश का पूरे फाइनल में सिर्फ एक थ्रो वैध रहा, लेकिन वही थ्रो सभी खिलाड़ियों पर भारी पड़ गया.

What a moment ❤️.
Our golden arm has delivered it .
He defeated his counterparts with a country mile.
A beast of a throw!
Truly a roaring moment ✌️👊💪.

Remember the name .
it's OUR GOLDEN BOY - RUMESH THARANGA 🫡. pic.twitter.com/xHTX2jnx4J

— Amila Arachchige (@Im_amila) August 1, 2026

रुमेश थरंगा पथिरागे की जीत इसलिए भी खास रही क्योंकि उन्होंने दो बार के ओलंपिक मेडलिस्ट नीरज चोपड़ा, मौजूदा ओलंपिक चैम्पियन अरशद नदीम, मौजूदा विश्व चैम्पियन केशोर्न वाल्कॉट और पूर्व विश्व चैम्पियन एंडरसन पीटर्स जैसे दिग्गजों को भी पीछे छोड़ा. यह उनके करियर का पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय स्वर्ण पदक है. लेकिन इसे उलटफेर नहीं कहा जा सकता क्योंकि 2026 के सीजन में रुमेश का प्रदर्शन सबसे शानदार रहा है.

रुमेश थरंगा पथिरागे ने मई में रोम डायमंड लीग में 92.62 मीटर का भाला फेंककर पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा था. वह 2026 सीजन में 90 मीटर का आंकड़ा पार करने वाले पहले जैवलिन थ्रोअर बने थे. यही वजह थी कि उन्हें कॉमनवेल्थ गेम्स का सबसे बड़ा दावेदार माना जा रहा था और उन्होंने इस भरोसे को सही साबित किया.

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फाइनल से पहले ही नीरज चोपड़ा ने रुमेश की तारीफ करते हुए कहा था, 'वह बहुत अच्छा लड़का है और मेरा दोस्त भी है. इस साल उसने शानदार प्रदर्शन किया है. श्रीलंका के लिए उसका अच्छा करना खुशी की बात है.' नीरज की यह बात फाइनल में सच साबित हुई, जब रुमेश ने गोल्ड जीतकर इतिहास रच दिया.

क्रिकेट छोड़ जैवलिन को अपनाया
रुमेश थरंगा पथिरागे की सफलता की कहानी भी बेहद दिलचस्प है. बहुत कम लोग जानते हैं कि वह पहले मीडियम पेस गेंदबाज थे. अंडर-18 क्रिकेट में उनकी गेंद की रफ्तार 134 किमी प्रति घंटा तक पहुंच चुकी थी. उस समय वह श्रीलंका के तेज गेंदबाज ईशान मलिंगा के बाद दूसरे सबसे तेज गेंदबाज माने जाते थे. लेकिन कोच टोनी प्रसन्ना की सलाह पर उन्होंने क्रिकेट छोड़ जैवलिन थ्रो को अपना करियर बना लिया.

रुमेश थरंगा पथिरागे कहते हैं, 'कोच टोनी ने मुझे जैवलिन से परिचित कराया. उन्होंने सिर्फ तकनीक ही नहीं, बल्कि जिंदगी जीना भी सिखाया.' 2025 में अपने पहले विश्व चैम्पियनशिप में सातवें स्थान पर रहने वाले रुमेश ने हार नहीं मानी. उन्होंने लगातार मेहनत जारी रखी और 2026 में दुनिया के सबसे खतरनाक जैवलिन थ्रोअर बनकर उभरे.

IOC भी कर रहा रुमेश की मदद
रुमेश थरंगा पथिरागे की सफलता के पीछे सिर्फ उनकी मेहनत ही नहीं, बल्कि इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी (IOC) का सहयोग भी रहा है. श्रीलंकाई स्टार IOC ओलंपिक सॉलिडेरिटी स्कॉलरशिप के तहत चुने गए खिलाड़ियों में शामिल हैं. इस स्कॉलरशिप के तहत खिलाड़ियों को हर महीने आर्थिक सहायता दी जाती है, जिससे वे अपनी ट्रेनिंग, उपकरण, यात्रा और ओलंपिक क्वालिफिकेशन प्रतियोगिताओं का खर्च उठा सकें.

इसका मकसद अलग-अलग देशों के खिलाड़ियों को समान अवसर देना है, ताकि वे ओलंपिक खेलों की बेहतर तैयारी कर सकें. सिडनी ओलंपिक 2000 के बाद से 12000 से अधिक खिलाड़ियों को इस योजना का लाभ मिल चुका है. वहीं लॉस एंजेलिस 2028 ओलंपिक (LA28) की तैयारी कर रहे 1500 से ज्यादा एथलीट भी इस स्कॉलरशिप का हिस्सा हैं. रुमेश थरंगा पथिरागे भी उन्हीं खिलाड़ियों में शामिल हैं, जिन्हें इस योजना से अपने खेल को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में मदद मिली है.

रोम डायमंड लीग के दौरान 92.62 मीटर का थ्रो और अब कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में गोल्ड इस बात का संकेत है कि पुरुष जैवलिन थ्रो में अब रुमेश थरंगा पथिरागे की भी बादशाहत शुरू हो चुकी है. आने वाले वर्ल्ड चैम्पियनशिप और ओलंपिक में यह श्रीलंकाई स्टार स्वर्ण पदक के सबसे बड़े दावेदारों में गिना जाएगा.

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