मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण ने महायोजना-2041 पर जनता से सुझाव और आपत्तियां लेने के लिए 28 जुलाई से 4 अगस्त 2026 तक अतिरिक्त जनसुनवाई आयोजित करने का फैसला किया है। ट्रांसपोर्ट नगर स्थित एमडीडीए कार्यालय के सभागार में रोजाना सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक नागरिक अपनी राय दर्ज करवा सकेंगे।
देहरादून, 23 जुलाई 2026 (दून हॉराइज़न)।
Dehradun Master Plan 2041 : मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने देहरादून महायोजना-2041 के ड्राफ्ट पर आम जनता से सुझाव और आपत्तियां मांगने के लिए एक और मौका देने की आधिकारिक घोषणा की है। 28 जुलाई 2026 से लेकर 4 अगस्त 2026 तक ट्रांसपोर्ट नगर स्थित एमडीडीए कार्यालय के सभागार में दोबारा विशेष जनसुनवाई आयोजित की जाएगी।
यह सुनवाई प्रतिदिन सुबह 11:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक चलेगी। कोई भी स्थानीय निवासी, भू-स्वामी या संस्था का प्रतिनिधि सीधे हॉल में पहुंचकर ड्राफ्ट नक्शों पर अपने लिखित व मौखिक सुझाव प्रस्तुत कर सकता है।
इससे पहले एमडीडीए ने 6 जुलाई से 21 जुलाई 2026 तक देहरादून के अलग-अलग सेक्टरों में जाकर पहले चरण की जनसुनवाई पूरी की थी। उस दौरान कई लोग अपनी बात रखने से छूट गए थे, जिसे देखते हुए प्रशासन ने यह अतिरिक्त समय देने का निर्णय लिया है।
एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने स्पष्ट किया कि राजधानी का ढांचा सिर्फ फाइलों या सरकारी दफ्तरों में बैठकर तैयार नहीं किया जा सकता। शहर का नक्शा कैसा होगा, यह जनता की सीधे तौर पर दी गई राय और वास्तविक जरूरतों से तय किया जाएगा।
मास्टर प्लान 2041 का मुख्य उद्देश्य शहर को अगले 15 वर्षों की आबादी और ट्रैफिक दबाव के लिए तैयार करना है। इसमें सड़क चौड़ीकरण, नया ड्रेनेज सिस्टम, सीवरेज नेटवर्क, पार्किंग सुविधाएं और पानी की पाइपलाइनों को बिछाने का पूरा मास्टर ढांचा शामिल किया गया है।
उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी के अनुसार, नागरिकों से जो भी लिखित सुझाव और आपत्तियां मिलेंगी, उन्हें सीधे मंजूर या खारिज नहीं किया जाएगा। तकनीकी विशेषज्ञों और कानूनी सलाहकारों की एक टीम हर एक बिंदु का परीक्षण करेगी।
पहले चरण की बैठकों में सबसे ज्यादा विरोध और चिंताएं ट्रैफिक जाम को लेकर सामने आई थीं। चंद्रबनी, मोहकमपुर और शिमला बाईपास जैसे इलाकों में रोजाना लग रहे लंबे जाम से निपटने के लिए लोगों ने नए बाईपास और कनेक्टिंग रास्तों की मांग उठाई थी।
शिक्षाविदों, व्यापारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा था कि पुराने देहरादून और नए बस रहे इलाकों में बुनियादी सुविधाएं पूरी तरह चरमरा चुकी हैं। नए ड्राफ्ट में कम से कम 50 साल आगे की प्लानिंग दिखनी चाहिए।
पर्यावरण से जुड़े लोगों ने दून की घटती हरियाली पर तीखे सवाल खड़े किए। जनसुनवाई में मांग रखी गई कि रेन वॉटर हार्वेस्टिंग, भूजल रिचार्ज और प्राकृतिक बरसाती नालों के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ की इजाजत इमारतों को न दी जाए।
लोगों का तर्क था कि देहरादून की पहचान उसकी आबो-हवा और हरियाली से है, इसलिए कंक्रीट के जंगल बनाने के चक्कर में पर्यावरण का नुकसान बर्दाश्त नहीं होगा। विकास और प्रकृति के बीच सही संतुलन बनाना एमडीडीए की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
एमडीडीए अधिकारियों के अनुसार, जमीन के इस्तेमाल (लैंड यूज Change) और बिल्डिंग बाय-लॉज को लेकर सबसे ज्यादा भ्रम था। अलग-अलग वार्डों और गांवों की भौगोलिक स्थिति भिन्न है, इसलिए एक ही नियम पूरे शहर पर थोपा नहीं जा सकता।
एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि महायोजना-2041 केवल कंक्रीट की इमारतें या लंबी सड़कें बनाने की कागजी योजना नहीं है। यह आने वाले दशकों में देहरादून के स्वरूप को सुरक्षित और रहने योग्य बनाने का एक व्यापक दस्तावेज है।
बंशीधर तिवारी ने आगे कहा कि जनता के सीधे जुड़ाव से ही इस योजना को व्यावहारिक बनाया जा सकता है। प्राधिकरण का काम सिर्फ नक्शा पास करना नहीं, बल्कि नागरिकों को बेहतर जीवन देना है, इसीलिए यह अतिरिक्त समय दिया जा रहा है।
एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने बताया कि प्राप्त होने वाले हर एक सुझाव का आधिकारिक रिकॉर्ड रजिस्टर दर्ज किया जा रहा है। विशेषज्ञों की अलग-अलग कमेटियां इन सुझावों की भौतिक और कानूनी जांच करेंगी।
सचिव बर्निया ने स्पष्ट किया कि शहर का अनियोजित फैलाव रोकना ही इस पूरे अभियान का असली लक्ष्य है। जो भी जायज आपत्तियां होंगी, उन्हें महायोजना के अंतिम ड्राफ्ट में संशोधित करके शामिल किया जाएगा।
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