Delhi Riots 2020: दिल्ली दंगा मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने 12 आरोपियों को बरी कर दिया है। कोर्ट का कहना है कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ सबूत पेश करने में असफल रहा।
दिल्ली दंगा मामले में 12 आरोपी बरी।
- Published: 01 Sep 2026, 06:03 PM IST
- Last Updated: 01 Sep 2026, 06:03 PM IST
Delhi Riots 2020: उत्तर-पूर्वी दिल्ली में फरवरी 2020 में हुए दंगों से जुड़े एक मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने 12 आरोपियों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने गैरकानूनी जमावड़ा, दंगा, आगजनी, हत्या, सबूत मिटाने, डकैती और लोगों के बीच दुश्मनी व भावनाएं भड़काने समेत कई गंभीर आरोपों से सभी 12 आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में नाकाम रहा।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने 25 अगस्त को फैसला सुनाते हुए लोकेश सोलंकी, पंकज शर्मा, अंकित चौधरी उर्फ फौजी, प्रिंस उर्फ डीजे वाला, जतिन शर्मा उर्फ रोहित, हिमांशु ठाकुर, विवेक पंचाल उर्फ नंदू, ऋषभ चौधरी उर्फ तपस, सुमित चौधरी उर्फ बादशाह, टिंकू अरोड़ा, संदीप उर्फ मोगली और साहिल उर्फ बाबू को राहत दी।
अभियोजन आरोप साबित करने में नाकाम
अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर सका कि आरोपियों ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 144, 147, 148 और 149 के तहत गैरकानूनी जमावड़े और दंगे से जुड़े अपराध किए थे।
इसके अलावा IPC की धारा 302, 201, 432, 435 और 34 के साथ धारा 149 के तहत हत्या, सबूत मिटाने और आगजनी के आरोप भी साबित नहीं हो सके। वहीं धारा 395 और 396 के तहत डकैती और डकैती के दौरान हत्या तथा धारा 153A और 505 के तहत लोगों के बीच दुश्मनी और भावनाएं भड़काने से जुड़े आरोपों को भी अदालत ने प्रमाणित नहीं माना।कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष इन आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा। इसलिए आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए इन अपराधों से बरी किया जाता है।
हिमांशु ठाकुर को धारा 411 के तहत दोषी ठहराया
हालांकि, अदालत ने आरोपी हिमांशु ठाकुर को चोरी की संपत्ति रखने के मामले में दोषी पाया। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने संदेह से परे साबित किया है कि हिमांशु ठाकुर ने IPC की धारा 411 के तहत अपराध किया।
धारा 411 चोरी की संपत्ति को यह जानते हुए रखने से संबंधित है कि वह चोरी की संपत्ति है। इस मामले में हिमांशु ठाकुर को इसी अपराध के लिए दोषी ठहराया गया।
'सिर्फ भीड़ का हिस्सा होना पर्याप्त नहीं'
आरोपियों को राहत देते हुए अदालत ने अहम टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि किसी आरोपी के भीड़ का हिस्सा होने की बात साबित हो जाना अपने आप में पर्याप्त नहीं है। अभियोजन को यह भी साबित करना जरूरी है कि आरोपी ने व्यक्तिगत तौर पर क्या अपराध किया और उसके खिलाफ ठोस सबूत क्या हैं।
अदालत ने कहा कि अगर आरोपियों को भीड़ का हिस्सा माना भी जाए, तब भी प्रत्येक आरोपी के खिलाफ यह साबित करना जरूरी था कि वह घातक हथियार से लैस था। कोर्ट के मुताबिक रिकॉर्ड में ऐसा कोई सबूत नहीं है, जिससे यह साबित हो कि गैरकानूनी जमावड़े के दौरान किसी आरोपी के पास हथियार था। ऐसे में अभियोजन IPC की धारा 144 के जरूरी तत्व भी साबित नहीं कर पाया।
मुरसलीन की हत्या के चश्मदीद गवाहों ने नहीं किया समर्थन
मामले में मुरसलीन की हत्या से जुड़े सबूतों की भी अदालत ने विस्तार से समीक्षा की। अभियोजन पक्ष ने जिन लोगों को हत्या का चश्मदीद गवाह बताया था, उनमें से किसी ने भी अभियोजन की कहानी का समर्थन नहीं किया।
गवाहों ने यह नहीं कहा कि उन्होंने 25 फरवरी 2020 को शाम करीब 4 से 4:30 बजे जोहरीपुर पुलिया पर दंगाई भीड़ द्वारा मुरसलीन की हत्या होते देखी थी। अदालत ने कहा कि ऐसी स्थिति में हत्या के आरोप को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं बचता। कोर्ट ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड में डकैती से संबंधित कोई ठोस सबूत मौजूद नहीं है।
सरकारी वकील ने भी माना- पर्याप्त सबूत नहीं
सुनवाई के दौरान विशेष लोक अभियोजक (SPP) ने भी माना कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ IPC की धारा 302, 395 और 396 के तहत हत्या और डकैती जैसे अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत पेश नहीं कर पाया है।
अदालत ने भी रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों का मूल्यांकन करने के बाद माना कि हत्या और डकैती के आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।
नाले में मिला था मुरसलीन का शव
अभियोजन के मुताबिक, 28 फरवरी 2020 की सुबह करीब 10:13 बजे गोकुलपुरी थाने को सूचना मिली थी कि जोहरीपुर तिराहे के पास एक नाले में शव पड़ा है। पुलिस ने शव को GTB अस्पताल भेजा, जहां उसका मेडिकल लीगल केस (MLC) तैयार किया गया। इसके बाद शव को अस्पताल की मोर्चरी में सुरक्षित रखवा दिया गया।
इससे पहले 1 मार्च 2020 को नर्गिस ने गोकुलपुरी थाने में अपने पति मुरसलीन के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बाद में 12 मार्च 2020 को नर्गिस ने शव की पहचान अपने पति मुरसलीन के रूप में की।
फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान मुरसलीन की मौत से जुड़ा यह मामला इसी आधार पर दर्ज किया गया था। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर हत्या, डकैती और दंगे समेत अधिकांश आरोपों में अभियोजन की विफलता को देखते हुए 12 आरोपियों को बरी कर दिया, जबकि हिमांशु ठाकुर को चोरी की संपत्ति रखने के अपराध में दोषी ठहराया।