एजुकेशन
- Authored by: नीलाक्ष सिंह
- Updated Aug 4, 2026, 08:55 PM IST
दिल्ली सरकार ने सरकारी स्कूलों में पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए बड़ा फैसला लिया है। शिक्षा निदेशालय ने सभी सरकारी स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे छात्रों के लिए हर दिन 30 मिनट का रीडिंग सेशन आयोजित करें।
![]()
Delhi Schools: दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पढ़ने की आदत बढ़ाने की पहल, रोज 30 मिनट होगा रीडिंग सेशन (Image - chatGPT)
'पढ़ने से भला होगा तेरा' किसी जमाने में एक विज्ञापन की लाइन थी, लेकिन अब ये लाइन दिल्ली के सरकारी स्कूलों पर फिट बैठती है। दरअसल, दिल्ली सरकार ने सरकारी स्कूलों में पढ़ने की संस्कृति (Reading Culture) को बढ़ावा देने के लिए बड़ा फैसला लिया है। शिक्षा निदेशालय (Directorate of Education) ने सभी सरकारी स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे छात्रों के लिए हर दिन 30 मिनट का रीडिंग सेशन आयोजित करें। यह फैसला राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत लिया गया है, जिसका उद्देश्य बच्चों में किताबें पढ़ने की रुचि विकसित करना और उनकी भाषा, समझने की क्षमता तथा सोचने की शक्ति को बेहतर बनाना है।
क्या होंगे नए नियम?
शिक्षा विभाग की ओर से जारी सर्कुलर के अनुसार स्कूलों को नई एक्टिविटीज करानी होंगी।
- प्राथमिक कक्षाओं के लिए रोज 30 मिनट का रीडिंग पीरियड अनिवार्य होगा।
- हर कक्षा में रीडिंग कॉर्नर बनाया जाएगा।
- लंच ब्रेक के दौरान भी स्कूल लाइब्रेरी खुली रहेगी, ताकि छात्र किताबें पढ़ सकें।
- शिक्षक रीडिंग के दौरान छात्रों के साथ बैठकर पढ़ाई में उनकी मदद करेंगे।
- सिर्फ पढ़ना ही नहीं, होंगी कई रोचक गतिविधियां
छात्रों में पढ़ने की रुचि बढ़ाने के लिए पूरे साल अलग-अलग गतिविधियां आयोजित की जाएंगी, जैसे:
- सप्ताह में दो बार बुक डिस्कशन (Book Talk)।
- स्टोरी टेलिंग (कहानी सुनाने) एक्टिविटीज।
- किताबों की समीक्षा (Book Review) लिखना।
- पढ़कर सुनाने (Read Aloud) के सत्र।
- हर महीने रीडिंग असेंबली का आयोजन।
- समय-समय पर बुक एग्जीबिशन, रीडिंग चैलेंज और रीडिंग फेस्टिवल।
इसके अलावा, कुछ छात्रों को "रीडिंग एंबेसडर" भी बनाया जाएगा, जो अपने साथियों को किताबें पढ़ने के लिए प्रेरित करेंगे।
अभिभावकों की भी होगी भूमिका
दिल्ली सरकार ने सिर्फ स्कूलों ही नहीं, बल्कि अभिभावकों को भी इस अभियान से जोड़ने की योजना बनाई है। हर तीन महीने में पेरेंट्स रीडिंग वर्कशॉप आयोजित की जाएगी। परिवारों को सलाह दी गई है कि वे रोज कम से कम 10 मिनट बच्चों के साथ बैठकर किताब पढ़ें। इससे बच्चों में घर और स्कूल दोनों जगह पढ़ने की आदत विकसित होगी।
लाइब्रेरियन की जिम्मेदारी भी बढ़ी
- सर्कुलर के अनुसार स्कूल लाइब्रेरियन को भी कई नई जिम्मेदारियां दी गई हैं।
- नई आने वाली किताबों को प्रमुख स्थान पर प्रदर्शित करना।
- हर छात्र को हर सप्ताह कम से कम दो किताबें जारी करना।
- छात्रों के पढ़ने का रिकॉर्ड तैयार रखना।
- ऐसे छात्रों की पहचान करना जो किताबें पढ़ने में रुचि नहीं लेते और उन्हें व्यक्तिगत रूप से प्रेरित करना।
स्कूलों में होगी निगरानी
शिक्षा विभाग ने साफ किया है कि इन निर्देशों के पालन की समीक्षा स्कूल निरीक्षण और मासिक बैठकों के दौरान की जाएगी। सभी स्कूल प्रमुखों (Head of Schools) को इन नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
क्यों है यह पहल महत्वपूर्ण?
विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित रूप से किताबें पढ़ने से बच्चों की भाषा क्षमता, शब्दावली, कल्पनाशक्ति, आत्मविश्वास और समझने की क्षमता बेहतर होती है। यही वजह है कि दिल्ली सरकार ने पढ़ाई को सिर्फ पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न रखते हुए बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करने के लिए यह नई पहल शुरू की है।
(पीटीआई से इनपुट)
![]()
नीलाक्ष सिंहauthor
नीलाक्ष सिंह 2021 से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल से जुड़े हैं और एजुकेशन सेक्शन के लिए कंटेंट लिखते हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने प्रिंट मीडिया में इंटर्नशिप की, जहां फील्ड रिपोर्टिंग, स्टूडेंट-इश्यू बेस्ड ग्राउंड स्टोरीज और सटीक न्यूजराइटिंग की बुनियादी समझ हासिल की। प्रिंट के बाद डिजिटल मीडिया में भी वह एजुकेशन बीट पर ही लगातार काम करते रहे हैं। पत्रकारिता में 10 सालों से सक्रिय नीलाक्ष सिंह 12 हजार से अधिक खबरें लिख चुके हैं। वह एग्जाम अपडेट्स, एडमिशन प्रोसेस, करियर गाइडेंस, स्टूडेंट वेलफेयर, बोर्ड रिजल्ट्स और नीतिगत बदलावों पर गहन और बेहद उपयोगी कंटेंट तैयार करते हैं।
और पढ़ें
- Hindi News
- Education
End of Article