बिहार में DGP, BPSC-BPSSC के अध्यक्ष क्यों छुट्टी पर गए: शिक्षक बहाली बीच में छोड़कर बाहर गए परमार, जानिए विनय कुमार का हेल्थ इश्यू - Bihar News

Published on 16 सित॰ 2026

बिहार सरकार के टॉप लेवल के तीन अधिकारी DGP विनय कुमार, BPSC के अध्यक्ष परमार रवि मनुभाई और BPSSC के अध्यक्ष केएस द्विवेदी एक साथ छुट्टी पर चले गए। इसके बाद प्रीता वर्मा को कार्यवाहक DGP बनाया गया। BPSC की कमान हरजोत कौर को सौंपी गई।

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अफसरों के छुट्टी पर जाने से 50 हजार बहाली डिले होने की संभावना है। पॉलिटिकल और प्रशासनिक सर्किल में इस घटनाक्रम को लेकर तरह-तरह की चर्चा है। भास्कर की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में पढ़िए अंदरखाने की पूरी कहानी।

1. 21 दिन की छुट्टी पर गए DGP विनय कुमार, प्रीता वर्मा के हाथ में पुलिस की कमान

बिहार के DGP विनय कुमार 15 सितंबर से 5 अक्टूबर तक 21 दिनों के अवकाश पर हैं। गृह विभाग के आदेश के मुताबिक उन्होंने अपरिहार्य निजी और स्वास्थ्य संबंधी कारणों का हवाला दिया है। उनकी अनुपस्थिति में 1991 बैच की वरिष्ठ IPS अधिकारी प्रीता वर्मा को DGP का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।

प्रीता वर्मा अभी DG, होमगार्ड एवं फायर सर्विसेज के पद पर हैं। यानी अगले तीन सप्ताह वह अपनी मौजूदा जिम्मेदारी के साथ बिहार पुलिस मुख्यालय और DGP के पद से जुड़े कामकाज करेंगी। यह स्थायी नियुक्ति नहीं, बल्कि DGP के अवकाश की अवधि तक की व्यवस्था है।

DGP की छुट्टी को लेकर क्या चर्चा?

DGP विनय कुमार के मामले में दो तरह की बातें चर्चा में हैं। पहली चर्चा राजनीतिक वजह को लेकर है। सत्ता के गलियारों में कुछ लोग उनके अवकाश को लेकर अलग-अलग कयास लगा रहे हैं।

दूसरी बात स्वास्थ्य और निजी कारणों से जुड़ी है। गृह विभाग की मानें तो उन्होंने निजी और स्वास्थ्य संबंधी कारण बताकर छुट्टी ली है।

छुट्टी में क्या करेंगे डीजीपी विनय कुमार

डीजीपी विनय कुमार के नजदीकी की मानें तो वह सबसे पहले IGIMS में स्टोन का इलाज कराएंगे। बताया जाता है कि उनकी किडनी में स्टोन है। वह कुछ दिनों से ज्यादा परेशान हैं।

दिसंबर में कार्यकाल समाप्त हो रहा है। इसलिए इससे पहले सर्जरी करा लेना चाहते हैं। छुट्टी के दूसरे फेज में वह अपने बच्चे के पास रहेंगे।

DGP ऐसे समय छुट्टी पर गए हैं जब दारोगा भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मामले में EOU जांच की चर्चा है। इसी वजह से पुलिस मुख्यालय के स्तर पर भी सवाल उठ रहे हैं कि जांच से जुड़े अगले कदमों के दौरान DGP की अनुपस्थिति में समन्वय कैसे होगा।

कौन हैं प्रीता वर्मा, जिन्हें मिला DGP का प्रभार?

प्रीता वर्मा 1991 बैच की बिहार कैडर की वरिष्ठ IPS अधिकारी हैं। उनके पास तीन दशक से ज्यादा का प्रशासनिक और पुलिस सेवा अनुभव है। उन्हें पुलिस सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक भी मिल चुका है।

विनय कुमार की गैरमौजूदगी में अब राज्य पुलिस से जुड़े महत्वपूर्ण प्रशासनिक फैसले, पुलिस मुख्यालय का कामकाज और कानून-व्यवस्था से जुड़े शीर्ष स्तर के समन्वय की जिम्मेदारी उनके अतिरिक्त प्रभार में रहेगी। यानी अगले 21 दिन बिहार पुलिस की कमान एक महिला IPS अधिकारी के हाथ में होगी।

प्रभारी गैर जरूरी वर्क पर फोकस नहीं करेंगी। वह रूटीन वर्क निपटाएंगी। इसलिए डीजीपी की छुट्टी की वजह से काम पर असर पड़ना लाजमी है।

अपने ही महकमे के अफसरों की जांच कर चुकी हैं प्रीता वर्मा

प्रीता वर्मा ने ऐसे मामले की जांच की है, जिनमें उनके ही महकमे के सीनियर अफसर आरोपों के घेरे में थे। 2014-16 में एक महिला DSP ने तत्कालीन वैशाली SP आनंद कुमार पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे।

मामले की जांच के लिए गठित आंतरिक समिति की अध्यक्षता प्रीता वर्मा ने की थी। रिपोर्टों के मुताबिक, समिति ने आरोपों को सही पाया था। इसके बाद मामला काफी चर्चा में रहा और आरोपी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ी।

2. BPSC अध्यक्ष परमार रवि मनुभाई भी अवकाश पर

बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) के अध्यक्ष परमार रवि मनुभाई व्यक्तिगत कारणों से 15 सितंबर से 9 अक्टूबर तक अवकाश पर हैं। उनकी गैरमौजूदगी में राजस्व पर्षद की अध्यक्ष-सह-सदस्य हरजोत कौर बम्हरा को BPSC अध्यक्ष का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।

हरजोत कौर 1992 बैच की बिहार कैडर की IAS अधिकारी हैं। वह कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर काम कर चुकी हैं, जिसमें जिलाधिकारी और विभागों में अपर मुख्य सचिव स्तर की जिम्मेदारियां शामिल हैं।

अब उनके सामने BPSC के नियमित प्रशासनिक कामकाज के साथ परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े कामों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी। टीआरई-4 की वैकेंसी की जिम्मेदारी उनके ऊपर होगी।

BPSC में भर्ती परीक्षाओं का दबाव

BPSC अध्यक्ष परमार रवि मनुभाई के अवकाश के समय भी आयोग के सामने परीक्षा और भर्ती से जुड़े कई महत्वपूर्ण काम हैं। उनकी जगह हरजोत कौर को अतिरिक्त प्रभार देने का मतलब है कि आयोग का नियमित कामकाज प्रभावित नहीं होगा। इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था कर दी गई है।

कंडोम वाले बयान के चलते विवाद में आईं थीं हरजोत कौर

हरजोत कौर की पहचान एक तेज तर्रार, कार्यकुशल और सख्त फैसले लेने वाली ऑफिसर के रूप में है। वह कंडोम से जुड़े विवाद में फंस गईं थीं। बात 27 सितंबर 2022 की है। पटना में 'सशक्त बेटी, समृद्ध बिहार: टुवर्ड्स एन्हान्सिंग द वैल्यू ऑफ गर्ल चाइल्ड' विषय पर वर्कशॉप था।

इसमें एक लड़की ने हरजोत कौर से पूछा कि क्या सरकार 20-30 रुपए का सैनिटरी पैड नहीं दे सकती। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि इस मांग का कोई अंत है। वे आगे बोलीं, '20-30 रुपए का सैनिटरी पैड दे सकते हैं। कल को जींस-पैंट दे सकते हैं। परसों सुंदर जूते क्यों नहीं दे सकते हैं?'

हरजोत ​यहीं नहीं रुकीं। यह भी बोल गईं कि अंत में जब परिवार नियोजन की बात आएगी तो निरोध भी मुफ्त में भी देना पड़ेगा।

इस मामले के तूल पकड़ने के बाद हरजोत को माफी मांगनी पड़ी थी। उन्होंने कहा था, 'मेरे कहे गए कुछ शब्दों के कारण अगर किसी बालिका या प्रतिभागी की भावाओं को ठेस पहुंची है तो इसके लिए मैं खेद व्यक्त करती हूं।'

हरजोत कौर को प्रशासनिक हलकों में कड़े और बेबाक अंदाज के लिए भी जाना जाता रहा है। यही बेबाकी कई मौकों पर उनके सार्वजनिक बयानों को चर्चा में ला चुकी है।

3. BPSSC अध्यक्ष केएस द्विवेदी ने ली एक महीने की पारिवारिक छुट्टी

बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग यानी (BPSSC) के अध्यक्ष और पूर्व DGP केएस द्विवेदी करीब 30 दिन के अवकाश पर गए हैं। उन्होंने पारिवारिक कारण बताते हुए छुट्टी ली है। बताया जाता है कि उनकी पत्नी की तबीयत खराब है। उनके इलाज के लिए उन्हें बाहर जाना है।

इनकी छुट्टी की चर्चा की वजह दारोगा भर्ती परीक्षा को लेकर विवाद और जांच भी बताई जा रही है। आर्थिक अपराध ईकाई ने दरोगा भर्ती गड़बड़ी जांच के लिए कई नोटिस भेज चुकी है। कहा जा रहा है कि इसी वजह से उन्होंने छुट्टी ले रखी है।

BPSSC में सबसे ज्यादा नजर दारोगा भर्ती पर

तीसरी बड़ी कड़ी BPSSC है। केएस द्विवेदी के अवकाश के समय दारोगा भर्ती परीक्षा से जुड़ी जांच और विवाद की वजह से आयोग पर खास नजर है।

यहीं से यह सवाल भी उठ रहा है कि भर्ती प्रक्रिया से जुड़े अगले प्रशासनिक कदम कैसे आगे बढ़ेंगे। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार BPSSC अध्यक्ष के अवकाश का कारण पारिवारिक बताया गया है।

एक साथ तीन बड़े अधिकारियों की छुट्टी से क्यों बढ़ी चर्चा?

तीनों अधिकारी ऐसे पदों पर हैं, जिनका सीधा असर राज्य के प्रशासन, पुलिस और भर्ती व्यवस्था पर पड़ता है। DGP छुट्टी पर हैं और पुलिस की कमान अतिरिक्त प्रभार में है।

BPSC अध्यक्ष की जगह भी अतिरिक्त व्यवस्था की गई है। BPSSC अध्यक्ष भी एक महीने के अवकाश पर हैं। यही संयोग प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।