दरभंगा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (डीएमसीएच) में पढ़ाई कर रहे करीब 900 पीजी और यूजी छात्र इन दिनों पुराने और बदहाल हॉस्टलों में रहने को मजबूर हैं।
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हॉस्टलों में मूलभूत सुविधाओं की कमी के साथ सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। कई जगह बिजली की वायरिंग खुली और जर्जर है।
इससे शॉर्ट सर्किट और आग लगने का खतरा बना हुआ है। बारिश के बाद हॉस्टल परिसर और आने-जाने वाले रास्तों पर पानी जमा हो जाता है। गंदगी, झाड़ियां, टूटे नल, खराब शौचालय और असुरक्षित परिसर छात्रों की परेशानी बढ़ा रहे हैं।

हॉस्टल कैंपस में वाटर लॉगिंग।
छह हॉस्टलों की स्थिति लगभग एक जैसी
डीएमसीएच के वेस्ट, साउथ, आरजी-1, आरजी-2, नॉर्थ और ईस्ट हॉस्टल की स्थिति कमोबेश एक जैसी है। करीब एक सप्ताह पहले हुई बारिश के बाद भी कई जगहों पर पानी जमा रहा। जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण छात्रों को पानी के बीच से होकर हॉस्टल आना-जाना पड़ रहा है।
गर्ल्स हॉस्टल के मुख्य द्वार के आसपास भी बारिश के बाद पानी जमा हो जाता है। छात्राओं ने अस्थायी तौर पर चौकी आदि के सहारे रास्ता पार करने की व्यवस्था की है। बाइक से आने-जाने वाले छात्र किसी तरह निकल जाते हैं, लेकिन पैदल छात्रों को पानी में चलकर जाना पड़ता है।
वेस्ट हॉस्टल सबसे ज्यादा बदहाल
वेस्ट हॉस्टल की स्थिति सबसे ज्यादा खराब बताई जा रही है। हॉस्टल के चारों तरफ जंगलनुमा स्थिति बनी हुई है। बारिश के बाद परिसर में पानी जमा हो जाता है। हॉस्टल की छत से कई जगह पानी टपकने की शिकायत है।
बिजली के तार भी कई जगह टूटे और खुले हुए हैं। ऐसे में शॉर्ट सर्किट का खतरा बना रहता है। इस हॉस्टल में करीब 50 पीजी और यूजी छात्र रहते हैं।
छात्र कैमरे पर खुलकर कुछ कहने से बचते नजर आए। हालांकि, उन्होंने उम्मीद जताई कि नया हॉस्टल बनने के बाद रहने की व्यवस्था में सुधार होगा।

बिजली व्यवस्था का हाल बेहाल।
पीजी बॉयज-1 में 250 छात्र, मार्च से जनरेटर बंद
पीजी बॉयज-1 हॉस्टल में करीब 250 छात्र रहते हैं। छात्रों के अनुसार, मार्च से हॉस्टल में जनरेटर की सप्लाई बंद है। बिजली कटने पर उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है।
हॉस्टल की बाउंड्री भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। इसके कारण आवारा पशु परिसर में चले आते हैं। ग्राउंड फ्लोर पर सूअर और गाय समेत अन्य पशु घूमते दिखाई देते हैं।
हॉस्टल के आसपास कचरा भी बिखरा रहता है। इससे साफ-सफाई की समस्या के साथ मच्छर और संक्रमण का खतरा भी बना रहता है।
हॉस्टलवार छात्रों की संख्या

खुले बिजली तार से आग का खतरा
हॉस्टलों में कई जगह बिजली की वायरिंग पुरानी और जर्जर हो चुकी है। कुछ स्थानों पर तार खुले हुए हैं। बड़ी संख्या में मेडिकल छात्रों के रहने वाले हॉस्टलों में बिजली की ऐसी स्थिति सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाती है।
छात्रों का कहना है कि अगर किसी तरह की विद्युत दुर्घटना होती है तो स्थिति गंभीर हो सकती है।
हॉस्टल के शौचालय और पानी की व्यवस्था को लेकर भी छात्रों की शिकायतें हैं। कई जगह नल खराब हैं और नियमित सफाई नहीं होने से परेशानी होती है। झाड़ियों और गंदगी के कारण मच्छर और दूसरे कीट-पतंगों का प्रकोप भी बढ़ जाता है।
तीन डॉक्टरों को दी गई है वार्डन की जिम्मेदारी
डीएमसीएच में हॉस्टलों की देखरेख के लिए तीन चिकित्सकों को वार्डन की जिम्मेदारी दी गई है। महिला हॉस्टल की वार्डन डॉ. सुधा कुमारी, पुरुष हॉस्टल के वार्डन डॉ. सुरेंद्र कुमार और फैमिली हॉस्टल के वार्डन डॉ. भरत कुमार हैं।
इसके बावजूद हॉस्टलों की जर्जर स्थिति और मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं पूरी तरह दूर नहीं हो सकी हैं।
छात्रों को नए हॉस्टल से उम्मीद
छात्रों का कहना है कि हॉस्टल की समस्याओं को लेकर वे लंबे समय से परेशान हैं। हालांकि, नया हॉस्टल बनने की प्रक्रिया चलने की जानकारी के बाद उन्हें उम्मीद है कि आने वाले समय में बेहतर सुविधा मिलेगी।
छात्रों का कहना है कि नया हॉस्टल बनने तक पुराने भवनों की मरम्मत, बिजली की वायरिंग, पानी, शौचालय और साफ-सफाई जैसी मूलभूत सुविधाओं को दुरुस्त करने की जरूरत है।
प्राचार्य बोले- पुराने हॉस्टल की समय-समय पर होती है मरम्मत
डीएमसीएच के प्राचार्य डॉ. यूसी झा ने कहा कि नया हॉस्टल बनाया जा रहा है। पुराने हॉस्टलों की जहां तक संभव होता है, समय-समय पर मरम्मत कराई जाती है। पुराने भवनों में उपलब्ध संसाधनों के अनुसार व्यवस्था बेहतर करने का प्रयास किया जा रहा है।
जलजमाव को लेकर प्राचार्य ने बताया कि एलिवेटेड सड़क बनने के कारण पहले पानी निकासी का जो रास्ता था, वह बंद हो गया है। इसी वजह से बारिश के बाद लंबे समय तक पानी जमा रहता है। पहले निकासी का रास्ता उपलब्ध होने के कारण पानी जल्दी निकल जाता था। उन्होंने कहा कि जलजमाव की समस्या का एक बड़ा कारण यही है।
फिलहाल सवाल यह है कि मेडिकल कॉलेज के हॉस्टलों में रहने वाले छात्रों को सुरक्षित और साफ-सुथरा माहौल कब मिलेगा। जर्जर वायरिंग, जलजमाव, गंदगी और खराब बुनियादी सुविधाओं के बीच रह रहे छात्रों की समस्याओं के स्थायी समाधान की जरूरत है।