DU Dress Code: सेंट स्टीफन में शॉर्ट्स पर बवाल, कॉलेज ने किया था बैन; विरोध के लिए पहले दिन छात्रों ने तोड़ा ड्रेस कोड

Published on 30 जुल॰ 2026

Jul 30, 2026 04:39 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान

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DU Dress Code: दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रतिष्ठित सेंट स्टीफेंस कॉलेज में क्लासरूम, लाइब्रेरी और मेस में शॉर्ट्स पहनने पर रोक लगा दी गई है। छात्रों ने इसे 'मॉरल पुलिसिंग' बताकर विरोध जताया है।

DU St Stephen's College

सेंट स्टीफेंस कॉलेज

St Stephen's College Shorts Ban: दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) का प्रसिद्ध और प्रतिष्ठित सेंट स्टीफेंस कॉलेज एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार किसी कट-ऑफ लिस्ट या पढ़ाई की वजह से नहीं, बल्कि एक नए ड्रेस कोड विवाद के कारण। कॉलेज प्रशासन ने कैंपस में छात्रों के शॉर्ट्स पहनने पर पाबंदी लगा दी है। नए शैक्षणिक सत्र के पहले ही दिन जैसे ही छात्र कॉलेज पहुंचे, उन्हें परिसर में लगे इस नोटिस के बारे में पता चला, जिसके बाद छात्रों और कई छात्र संगठनों ने इसका कड़ा विरोध शुरू कर दिया है।

किन-किन जगहों पर बैन किए गए शॉर्ट्स?

द प्रिंट के अनुसार कॉलेज की नई प्रिंसिपल प्रोफेसर सुसान एलियास द्वारा 26 जुलाई की तारीख से जारी किए गए इस सर्कुलर की हेडिंग ‘कैंपस रेगुलेशन्स एंड गाइडलाइंस’ है। इसमें सभी छात्रों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे इन जगहों पर शॉर्ट्स पहनकर न आएं:

क्लासरूम, ट्यूटोरियल रूम और लैबोरेट्री

कॉलेज की लाइब्रेरी और असेंबली हॉल

कॉलेज का चैपल (प्रार्थना स्थल) और डाइंग हॉल (मेस)

नोटिस में इसके अलावा यह भी याद दिलाया गया है कि पूरा कैंपस एक ‘स्मोक-फ्री जोन’ है और सभी विद्यार्थियों को हमेशा अपना आईडी कार्ड (ID Card) साथ रखना अनिवार्य होगा।

"यह मॉरल पुलिसिंग है!" – छात्रों का फूटा गुस्सा

कॉलेज प्रशासन के इस फैसले को छात्रों ने अपनी व्यक्तिगत स्वतंत्रता और पहनावे की आजादी पर हमला करार दिया है। नए सत्र के पहले दिन कई छात्रों ने विरोध जताने के लिए जानबूझकर शॉट्स पहनकर कैंपस में एंट्री ली।

फर्स्ट ईयर के छात्रों का कहना है कि स्कूल की सख्त यूनिफॉर्म से निकलकर जब वे कॉलेज पहुंचे, तो उन्हें उम्मीद थी कि यहां उनके विचारों और पहनावे पर कोई पाबंदी नहीं होगी। वहीं स्पोर्ट्स टीमों से जुड़े खिलाड़ियों ने शिकायत की है कि सुबह की प्रैक्टिस के बाद उन्हें अक्सर मेस में खाना खाने से रोक दिया जाता है क्योंकि वे अपने स्पोर्ट्स शॉर्ट्स में होते हैं। NSUI और KYS जैसे छात्र संगठनों ने भी इस आदेश को तुरंत वापस लेने की मांग की है।

प्रशासन और शिक्षकों का क्या है पक्ष?

दूसरी तरफ, कॉलेज के प्रोफेसर का कहना है कि सेंट स्टीफेंस में कुछ जगहों पर शॉर्ट्स न पहनने की यह परंपरा कोई नई नहीं है, बल्कि सालों से एक अनलिखित 'कॉलेज ट्रेडिशन' के रूप में चली आ रही है। हालांकि, यह पहली बार है जब इसे एक लिखित सर्कुलर के रूप में जारी किया गया है।

प्रिंसिपल सुसान एलियास के अनुसार, यह संस्थान 145 सालों की परंपराओं पर टिका है। उनका कहना है कि वे किसी नियम को रातों-रात खत्म नहीं करना चाहतीं और इस विषय पर छात्रों, शिक्षकों और पूर्व छात्रों के साथ बातचीत करके ही आगे का निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल, नए सत्र की शुरुआत के साथ ही कपड़ों को लेकर छिड़ी यह बहस पूरे विश्वविद्यालय परिसर में चर्चा का मुख्य विषय बनी हुई है।

लेखक के बारे में

Prachi

शॉर्ट बायो: प्राची लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। पिछले 2 वर्षों से वे करियर, शिक्षा और सरकारी नौकरियों से जुड़े विषयों पर लिख रही हैं। मुश्किल खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाना उनकी विशेषता है। वे 2024 से लाइव हिन्दुस्तान की करियर टीम का हिस्सा हैं।

अनुभव और करियर का सफर
प्राची ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत 'नन्ही खबर' से की थी, जहां उन्होंने जमीनी स्तर पर खबरों के महत्व को समझा। इसके बाद, उन्होंने 'सी.वाई. फ्यूचर लिमिटेड' और 'कुटुंब' जैसे प्लेटफॉर्म्स पर बतौर कंटेंट राइटर काम करते हुए अपनी लेखनी और रिसर्च स्किल्स को निखारा। लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ने के बाद, वे करियर डेस्क पर सक्रिय हैं और छात्रों के लिए करियर विकल्पों, बोर्ड परीक्षाओं, जॉब और प्रतियोगी परीक्षाओं की बारीकियों को कवर कर रही हैं।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
प्राची ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) से इंग्लिश जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा किया है। उनकी शैक्षणिक नींव दिल्ली यूनिवर्सिटी से है, जहां से उन्होंने इतिहास में ग्रेजुएशन की पढ़ाई की। इतिहास की अच्छी जानकारी होने के कारण, वे आज की खबरों को बेहतर तरीके से समझ और समझा पाती हैं। यही वजह है कि उनके लेखों में जानकारी पूरी तरह सटीक और अधिक भरोसेमंद होती है।

विजन
प्राची का मानना है कि करियर चुनना केवल एक नौकरी पाना नहीं, बल्कि सही दिशा में अपना भविष्य सुरक्षित करना है। उनका उद्देश्य है कि हर छात्र और अभ्यर्थी तक बिना किसी भ्रम के, सटीक और सही समय पर जानकारी पहुंचे। वे पारदर्शिता और विश्वसनीयता को डिजिटल पत्रकारिता की सबसे बड़ी ताकत मानती हैं।

रुचियां
इतिहास की समझ और पत्रकारिता के जुनून के साथ, प्राची को खाली समय में उपन्यास पढ़ना और विश्व सिनेमा देखना पसंद है, जो उनके लेखन में एक नया दृष्टिकोण जोड़ता है।

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