Aug 04, 2026 06:32 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान
E20 पेट्रोल की क्वॉलिटी और उसमें संभावित मिलावट को लेकर मिनिस्ट्री ऑफ पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस ने अब ऑफिशियल क्लेरिफिकेशन दिया है। मंत्रालय के मुताबिक सभी Oil Marketing Companies (OMCs) रेग्युलरली फ्यूल क्वॉलिटी को चेक करती हैं।

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E20 पेट्रोल की क्वॉलिटी और उसमें संभावित मिलावट को लेकर सोशल मीडिया और मीडिया रिपोर्ट्स में उठ रहे सवालों के बीच मिनिस्ट्री ऑफ पेट्रोलियम और नैचुरल गैस ने अब ऑफिशियल क्लेरिफिकेशन दिया है। मंत्रालय ने कहा है कि देशभर में एथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल की क्वॉलिटी पर लगातार नजर रखी जा रही है और पूरी सप्लाई चेन में कई लेवल पर जांच की जाती है। मंत्रालय के मुताबिक सभी Oil Marketing Companies (OMCs) रेग्युलरली फ्यूल क्वॉलिटी को चेक करती हैं। इसके अलावा किसी भी तरह की मिलावट या कंटैमिनेशन को रोकने के लिए अलग से भी जांच शुरू की गई है।
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87 हजार से ज्यादा पेट्रोल पंपों पर लगातार जांच
मंत्रालय के अनुसार देशभर के 87 हजार से ज्यादा रिटेल आउटलेट्स पर दिन में 8 से 12 बार वॉटर इनग्रेस टेस्टिंग की जा रही है। इसके अलावा 2 हजार से ज्यादा फ्यूल सैंपल्स में क्लोराइड और सल्फाइड कंटैमिनेशन की जांच की जा चुकी है। सरकार ने बताया कि अभी तक पूरे देश में क्लोराइड कंटैमिनेशन के सिर्फ दो अलग-अलग मामले सामने आए हैं। इन दोनों मामलों में संबंधित पेट्रोल पंपों से फ्यूल की बिक्री को तुरंत रोक दिया गया। मंत्रालय ने साफ कहा है कि अगर किसी रिटेल आउटलेट पर फ्यूल में कंटैमिनेशन या मिलावट पाई जाती है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
डिस्टिलरी से ही शुरू होती है E20 की जांच
मंत्रालय ने E20 पेट्रोल की पूरी सप्लाई चेन को समझाने के लिए एक मल्टी-लेयर्ड क्वालिटी कंट्रोल सिस्टम की जानकारी भी दी है। इसके तहत जांच पेट्रोल पंप तक पहुंचने से काफी पहले ही शुरू हो जाती है। सबसे पहले एथेनॉल की खरीद के समय उसकी क्वॉलिटी सुनिश्चित की जाती है। हर बैच को BIS के IS 15464 स्टैंडर्ड के अनुसार होना जरूरी है और इसमें कम से कम 99.6 प्रतिशत प्योरिटी होनी चाहिए। डिस्टिलरी से OMC डिपो तक भेजे जाने वाले हर एथेनॉल कंसाइनमेंट के साथ एक सर्टिफाइड क्वॉलिटी रिपोर्ट भी दी जाती है।
क्वॉलिटी में कमी मिली तो टैंकर वापस
मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक जुलाई 2024 से जून 2026 के बीच करीब 10,500 किलोलीटर एथेनॉल लेकर जाने वाले 302 टैंकर ट्रकों को क्वॉलिटी स्टैंडर्ड पर खरा नहीं उतरने के कारण रिजेक्ट किया गया। इन टैंकरों में एथेनॉल की शुद्धता, पानी की मात्रा और डेंसिटी जैसी चीजों में कमी पाई गई थी। इसका मतलब है कि खराब गुणवत्ता वाला एथेनॉल सप्लाई चेन में आगे बढ़ने से पहले ही रोकने की व्यवस्था है। मंत्रालय के मुताबिक यह प्रक्रिया E20 पेट्रोल की क्वॉलिटी को बनाए रखने के लिए लगातार लागू है।
स्टोरेज और ब्लेंडिंग के दौरान भी निगरानी
क्वॉलिटी टेस्ट में पास होने के बाद एथेनॉल को अलग स्टोरेज फैसिलिटी में रखा जाता है, ताकि दूसरे फ्यूल या किसी बाहरी पदार्थ के साथ क्रॉस-कंटैमिनेशन की संभावना कम हो। डिपो में टैंकर कॉन्टेंट को लेने से पहले ऊपर और नीचे दोनों हिस्सों से सैंपल लिए जाते हैं। इसके बाद भी निगरानी जारी रहती है और आखिर में एथेनॉल को पेट्रोल के साथ ब्लेंड करके E20 तैयार किया जाता है। मंत्रालय का कहना है कि यह मल्टी-लेवल क्वॉलिटी कंट्रोल सिस्टम E20 पेट्रोल को डिस्टिलरी से लेकर गाड़ी के फ्यूल टैंक तक सुरक्षित और सेट स्टैंडर्ड्स के अनुरूप रखने के लिए बनाया गया है।

