Ekadashi Date Time: सितंबर की अजा एकादशी से दिसंबर की मोक्षदा तक - देखें अगले चार महीनों के एकादशी व्रत की पूरी लिस्ट

Published on 18 अग॰ 2026

अध्यात्म

  • Authored by: मेधा चावला
  • Updated Aug 18, 2026, 05:18 PM IST

Ekadashi Date Time, September To December Ekadashi Tithi Kab Padegi: सितंबर की अजा एकादशी से दिसंबर की मोक्षदा एकादशी तक देखें सभी एकादशी व्रत की तारीख, तिथि, समय और महत्व।

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अगले चार महीनों में एकादशी व्रत कब कब हैं

September To December Ekadashi Tithi Date Day: साल के आखिरी चार महीने त्योहारों के साथ कई महत्वपूर्ण एकादशी व्रत भी लेकर आते हैं। सितंबर में अजा एकादशी से शुरू हुआ यह क्रम दिसंबर की मोक्षदा एकादशी तक चलता है। इसी दौरान परिवर्तिनी एकादशी, इंदिरा एकादशी, पापांकुशा एकादशी, रमा एकादशी और देवउठनी एकादशी जैसे बड़े व्रत आएंगे।

पंचांग के अनुसार, हर महीने दो एकादशी होती हैं। एक कृष्ण पक्ष में और दूसरी शुक्ल पक्ष में। इस तरह सितंबर से दिसंबर 2026 के बीच कुल आठ एकादशी व्रत रखे जाएंगे। भगवान विष्णु को समर्पित इन सभी एकादशियों का नाम और महत्व अलग-अलग है। ऐसे में पहले से तारीख लिख लेना पूजा और व्रत की तैयारी आसान कर सकता है।

सितंबर से दिसंबर 2026 तक एकादशी की पूरी लिस्ट

एकादशी व्रतव्रत की तारीखदिनएकादशी तिथि का समय
अजा एकादशी7 सितंबर 2026सोमवार6 सितंबर शाम 7:29 बजे से 7 सितंबर शाम 5:03 बजे तक
परिवर्तिनी एकादशी22 सितंबर 2026मंगलवार21 सितंबर रात 8:00 बजे से 22 सितंबर रात 9:43 बजे तक
इंदिरा एकादशी6 अक्टूबर 2026मंगलवार6 अक्टूबर रात 2:07 बजे से 7 अक्टूबर रात 12:34 बजे तक
पापांकुशा एकादशी22 अक्टूबर 2026गुरुवार21 अक्टूबर दोपहर 2:11 बजे से 22 अक्टूबर दोपहर 2:47 बजे तक
रमा एकादशी5 नवंबर 2026गुरुवार4 नवंबर सुबह 11:03 बजे से 5 नवंबर सुबह 10:35 बजे तक
देवउठनी एकादशी20 नवंबर 2026शुक्रवार20 नवंबर सुबह 7:15 बजे से 21 नवंबर सुबह 6:31 बजे तक
उत्पन्ना एकादशी4 दिसंबर 2026शुक्रवार3 दिसंबर रात 11:03 बजे से 4 दिसंबर रात 11:44 बजे तक
मोक्षदा एकादशी20 दिसंबर 2026रविवार19 दिसंबर रात 10:09 बजे से 20 दिसंबर रात 8:14 बजे तक

ये समय दिल्ली के अनुसार हैं। अलग-अलग शहरों में तिथि और पारण के समय में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है। स्थानीय पंचांग से पुष्टि करना बेहतर रहेगा। तारीख और तिथि का विवरण दृक पंचांग के दिल्ली कैलेंडर के अनुसार है।

अजा एकादशी से होगी सितंबर 2026 की शुरुआत

सितंबर की पहली एकादशी अजा एकादशी होगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह व्रत व्यक्ति को अपनी पुरानी गलतियों पर विचार करने और जीवन में नई शुरुआत करने की प्रेरणा देता है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है।

इसके बाद 22 सितंबर को परिवर्तिनी एकादशी आएगी। इसे पार्श्व एकादशी भी कहते हैं। मान्यता है कि चातुर्मास के दौरान इसी तिथि पर भगवान विष्णु योग निद्रा में करवट बदलते हैं। इसलिए इसका नाम परिवर्तिनी एकादशी पड़ा।

अक्टूबर 2026 में एकादशी व्रत कब कब पड़ेंगे

6 अक्टूबर को पड़ने वाली इंदिरा एकादशी का संबंध पितरों से माना जाता है। यह व्रत आमतौर पर पितृ पक्ष के दौरान आता है। श्रद्धालु इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ अपने पूर्वजों की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं।

22 अक्टूबर को पापांकुशा एकादशी होगी। धार्मिक मान्यताओं में इस व्रत को आत्मसंयम, अच्छे कर्म और गलत आदतों से दूरी बनाने वाला माना गया है।

नवंबर 2026 में कौन से एकादशी व्रत आएंगे

नवंबर में पहली एकादशी रमा एकादशी होगी, जो 5 नवंबर को पड़ेगी। दिवाली से ठीक पहले आने वाली इस एकादशी में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।

20 नवंबर को देवउठनी एकादशी मनाई जाएगी। इसे देवोत्थान या प्रबोधिनी एकादशी भी कहते हैं। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु चार महीने की योग निद्रा से जागते हैं। इसके साथ ही विवाह, गृह प्रवेश और दूसरे मांगलिक कार्य दोबारा शुरू हो जाते हैं। हालांकि 2026 में गौण और वैष्णव देवउठनी एकादशी 21 नवंबर को मानी जाएगी।

दिसंबर 2026 में उत्पन्ना और मोक्षदा एकादशी के व्रत

4 दिसंबर को उत्पन्ना एकादशी का व्रत रखा जाएगा। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन एकादशी देवी प्रकट हुई थीं। जो लोग एकादशी व्रत शुरू करना चाहते हैं, वे इस तिथि से इसकी शुरुआत कर सकते हैं।

साल के इस हिस्से की अंतिम एकादशी मोक्षदा एकादशी होगी, जो 20 दिसंबर को पड़ेगी। इसी दिन गीता जयंती भी मनाई जाती है। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र में अर्जुन को इसी तिथि पर गीता का ज्ञान दिया था। दक्षिण भारत में इसे वैकुंठ एकादशी के रूप में भी विशेष श्रद्धा से मनाया जाता है।

एकादशी व्रत में क्या करें

एकादशी पर केवल भूखे रहना ही व्रत नहीं माना जाता। इसका भाव मन और व्यवहार में संयम लाना है। श्रद्धालु इस दिन श्रद्धा से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा कर सकते हैं। इस दिन किया गया विष्णु सहस्रनाम या श्रीहरि के मंत्रों का पाठ शुभ फल देता है। इसके अलावा सामर्थ्य के अनुसार फलाहार या जल लेकर व्रत रख सकते हैं। वरना अनाज, चावल और तामसिक भोजन से दूरी रखें। सात्विक विचारों का पालन करें।

Medha Chawla

मेधा चावलाauthor

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वाली मेधा की विशेषज्ञता हेल्थ, वेलनेस, फिटनेस, मेंटल हेल्थ, डेली लाइफ इम्प्रूवमेंट, ह्यूमन-इंटरेस्ट फीचर्स और रिसर्च-बेस्ड स्टोरीज तक फैली है। उनकी लेखन शैली पाठकों को जटिल स्वास्थ्य और जीवनशैली संबंधी विषयों को आसान, समझने योग्य और व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करती है, जिससे उनका कंटेंट व्यापक पाठक समूह से जुड़ता है। अबतक 30,000 से अधिक कंटेंट पीस लिख चुकी मेधा की कई एक्सक्लूसिव स्टोरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड सेट कर चुकी हैं।

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