EPF Scheme 2026: तीन महीने घटा PF योगदान तो रिटायरमेंट फंड पर कितना पड़ेगा असर? - Haribhoomi

Published on 17 सित॰ 2026

महामारी या राष्ट्रीय आपदा में सरकार अधिकतम तीन महीने PF योगदान घटा या टाल सकती। योगदान घटने से टेक-होम सैलरी बढ़ेगी, लेकिन पीएफ कॉर्पस और कंपाउंडिंग का फायदा कम हो सकता है। यह व्यवस्था अपने आप लागू नहीं होगी, इसके लिए सरकार को अलग से आदेश जारी करना होगा।

Provident fund india

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  • Published: 17 Sep 2026, 12:42 PM IST
  • Last Updated: 17 Sep 2026, 12:42 PM IST

नए इम्पलॉय प्रोविडेंट फंड स्कीम 2026 में सरकार को खास हालात में पीएफ योगदान घटाने या कुछ समय के लिए टालने का अधिकार दिया गया। महामारी या राष्ट्रीय आपदा की स्थिति में कर्मचारी, नियोक्ता या दोनों के योगदान में अधिकतम तीन महीने तक बदलाव किया जा सकता है। इससे नौकरीपेशा लोगों की टेक-होम सैलरी कुछ समय के लिए बढ़ सकती है, लेकिन इसका असर उनके रिटायरमेंट फंड पर भी पड़ेगा।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि कर्मचारियों का PF योगदान अभी अपने आप कम हो जाएगा। यह प्रावधान तभी लागू होगा, जब महामारी या राष्ट्रीय आपदा की स्थिति में सरकार इसके लिए अलग से आदेश जारी करेगी। ऐसा कोई आदेश नहीं होने पर PF योगदान सामान्य तरीके से चलता रहेगा।

अभी कितना जमा होता है PF?
मौजूदा व्यवस्था में लागू नियमों के तहत कर्मचारी और नियोक्ता आमतौर पर बेसिक सैलरी और DA का 12-12% योगदान करते हैं। नए प्रावधान के तहत आपात स्थिति में सरकार कर्मचारी, नियोक्ता या दोनों का योगदान अस्थायी तौर पर कम या स्थगित कर सकती है।

अगर कर्मचारी का योगदान घटाया जाता है तो हर महीने सैलरी से PF की कटौती कम होगी। इससे हाथ में आने वाली रकम बढ़ेगी और मुश्किल आर्थिक हालात में परिवार को कुछ राहत मिल सकती है। लेकिन इसका दूसरा पहलू भी है। PF में कम पैसा जाने से रिटायरमेंट के लिए जमा होने वाली रकम घट सकती है।

6 हजार की जगह 5 हजार रुपए जमा हुए तो?
इसे एक उदाहरण से समझिए। मान लीजिए हर महीने कर्मचारी के हिस्से से 6,000 रुपए PF में जाते हैं। इसे तीन महीने के लिए घटाकर 5,000 रुपए कर दिया जाता है। ऐसे में हर महीने 1,000 रुपए कम जमा होंगे और तीन महीने में कुल 3,000 रुपए का अंतर आएगा।

नुकसान सिर्फ इन 3,000 रुपए तक सीमित नहीं होगा। इस रकम पर भविष्य में मिलने वाला ब्याज और कंपाउंडिंग का फायदा भी नहीं मिलेगा। खासतौर पर करियर के शुरुआती वर्षों में योगदान कम होने का असर ज्यादा हो सकता है, क्योंकि उस रकम को कई वर्षों तक ब्याज कमाने का मौका मिलता।

नियोक्ता का हिस्सा घटा तो भी असर
अगर सरकार कर्मचारी के बजाय नियोक्ता का PF योगदान कम करती है, तब भी रिटायरमेंट कॉर्पस प्रभावित हो सकता है। कितना असर होगा, यह योगदान में कटौती की रकम, उसकी अवधि और रिटायरमेंट में बचे समय पर निर्भर करेगा।

वहीं, योगदान घटाने और उसे टालने में अंतर है। अगर योगदान केवल स्थगित किया जाता है तो उसका भुगतान बाद की तारीख से दोबारा शुरू या जमा कराया जा सकता है। ऐसे मामले में क्या व्यवस्था होगी, यह सरकार के संबंधित आदेश की शर्तों से तय होगा।

ज्यादा PF जमा करने का भी विकल्प
नई व्यवस्था में कर्मचारी वैधानिक वेतन सीमा से ज्यादा वेतन पर अपनी इच्छा से अतिरिक्त PF योगदान कर सकता है। हालांकि, कर्मचारी जितनी अतिरिक्त रकम जमा करेगा, उतनी रकम नियोक्ता के लिए भी जमा करना जरूरी नहीं होगा। महामारी या दूसरी आपात स्थिति में इस तरह के स्वैच्छिक योगदान का क्या होगा, यह उस समय सरकार की ओर से जारी आदेश पर निर्भर करेगा।

(प्रियंका कुमारी)