Explained: नया एंटी पेपर लीक बिल पुराने कानून से कितना अलग? जानें सजा और जुर्माना कितना बढ़ा

Published on 28 जुल॰ 2026

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देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी के साथ साथ सामने आए कई अन्य पेपर लीक मामलों और प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ियों के बाद केंद्र सरकार ने पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 लोकसभा में पेश किया है।

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नया एंटी पेपर लीक बिल: पुराने कानून से कितना अलग?

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी के साथ साथ सामने आए कई अन्य पेपर लीक मामलों और प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ियों के बाद केंद्र सरकार ने पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 लोकसभा में पेश किया है। सरकार का दावा है कि यह संशोधन 2024 के मौजूदा कानून को और अधिक सख्त बनाएगा। नए बिल में न केवल सजा और जुर्माना बढ़ाया गया है, बल्कि जांच और ट्रायल की समय-सीमा भी तय की गई है ताकि मामलों का जल्द निपटारा हो सके। सरकार का कहना है कि नए संशोधन का उद्देश्य केवल दोषियों को कड़ी सजा देना नहीं, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बहाल करना है।

पिछले कुछ वर्षों में भारत में लाखों छात्रों ने यही दर्द झेला है। NEET, शिक्षक भर्ती, पुलिस भर्ती, रेलवे भर्ती, शायद ही कोई ऐसी बड़ी परीक्षा बची हो जिस पर कभी न कभी पेपर लीक का आरोप न लगा हो। इसी पृष्ठभूमि में केंद्र सरकार अब ऐसा कानून लेकर आई है, जिसे अब तक का सबसे सख्त एंटी पेपर लीक कानून बताया जा रहा है। सरकार कह रही है कि अब पेपर लीक करने वालों को सिर्फ जेल नहीं होगी, बल्कि उनकी पूरी आर्थिक कमर भी तोड़ दी जाएगी।

नए कानून में क्या प्रावधान

देश में लगातार सामने आए पेपर लीक मामलों और प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ियों के बाद केंद्र सरकार ने पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 लोकसभा में पेश किया है। सरकार का दावा है कि यह संशोधन 2024 के मौजूदा कानून को और अधिक सख्त बनाएगा। नए बिल में न केवल सजा और जुर्माना बढ़ाया गया है, बल्कि जांच और ट्रायल की समय-सीमा भी तय की गई है ताकि मामलों का जल्द निपटारा हो सके।

पुराने कानून में क्या था

2024 में लागू कानून के तहत पेपर लीक या परीक्षा में अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वालों के लिए 3 से 5 साल तक की जेल और 10 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान था। परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों या सर्विस प्रोवाइडर्स की संलिप्तता पाए जाने पर परीक्षा खर्च की वसूली और चार साल तक प्रतिबंध जैसी कार्रवाई की जा सकती थी।

नया बनाम पुराना कानून

नया बनाम पुराना कानून

नए बिल में क्या-क्या बड़े बदलाव हुए?

1. सजा और जुर्माना दोनों बढ़े

अब पेपर लीक या संगठित परीक्षा अपराध में शामिल लोगों के लिए कम से कम 5 साल और अधिकतम 10 साल तक की जेल का प्रावधान किया गया है। वहीं अधिकतम जुर्माना बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये तक किया गया है। इससे सरकार ऐसे अपराधों पर कड़ा संदेश देना चाहती है।

2. दो महीने में जांच पूरी करनी होगी

पहले कानून में जांच पूरी करने की कोई निश्चित समय-सीमा नहीं थी। नए विधेयक में प्रस्ताव है कि पेपर लीक की जांच 2 महीने के भीतर पूरी की जाए, ताकि लंबी जांच के कारण छात्रों का भविष्य प्रभावित न हो।

3. तीन महीने में ट्रायल पूरा करने का लक्ष्य

संशोधित बिल के अनुसार, आरोपपत्र दाखिल होने के बाद विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट तीन महीने के भीतर मुकदमे का निपटारा करने का प्रयास करेंगे। इससे वर्षों तक लंबित रहने वाले मामलों में तेजी आने की उम्मीद है।

4. विशेष टास्क फोर्स और फास्ट ट्रैक कोर्ट

हर राज्य में स्पेशल टास्क फोर्स (STF) गठित करने का प्रस्ताव है, जो पेपर लीक मामलों की जांच करेगी। साथ ही, इन मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे।

5. डिजिटल और AI आधारित धोखाधड़ी भी दायरे में

नए संशोधन में डिजिटल माध्यम, साइबर नेटवर्क और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से होने वाली परीक्षा धांधली को भी स्पष्ट रूप से अपराध की श्रेणी में शामिल करने का प्रस्ताव है।

नजीर बन सकता है फैसला

हाल के वर्षों में NEET, भर्ती परीक्षाओं और कई राज्यों की परीक्षाओं में पेपर लीक के मामलों ने लाखों अभ्यर्थियों को प्रभावित किया है।अगर यह कानून ईमानदारी से लागू हुआ, जांच समय पर हुई, फास्ट ट्रैक कोर्ट ने तय समय में फैसले दिए और दोषियों को वास्तव में दस साल तक की जेल और करोड़ों का जुर्माना मिला तो यह केवल एक नया कानून नहीं होगा बल्कि भारत की परीक्षा व्यवस्था में भरोसा लौटाने की शुरुआत भी बन सकता है। यदि यह कानून प्रभावी ढंग से लागू होता है तो जांच और न्यायिक प्रक्रिया तेज होगी तथा परीक्षा माफिया पर पहले से कहीं अधिक सख्ती की जा सकेगी।